1 इतिहास 27:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

सरूयाह का पुत्र योआब गिनती लेने लगा, पर निपटा न सका क्योंकि परमेश्‍वर का क्रोध इस्राएल पर भड़का, और यह गिनती राजा दाऊद के इतिहास में नहीं लिखी गई*।

पिछला पद
« 1 इतिहास 27:23
अगला पद
1 इतिहास 27:25 »

1 इतिहास 27:24 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 इतिहास 27:24 पर संदर्भ-नोट

पद यह बताता है कि सरूयाह के पुत्र योआब गिनती लेने लगा, परन्तु उसे पूरा नहीं कर सका; कारण यह कि इस्राएल पर परमेश्वर का प्रकोप भड़क उठा था, और यह गिनती राजा दाऊद के इतिहास में लिखी नहीं गई। यह कहानी दाऊद के राज्य के समय की प्रशासनिक गड़बड़ियों और परमेश्वर की इच्छा के बीच आए टकराव को उजागर करती है।

मुख्य अर्थ

यह पाठ दो मुख्य विचार प्रस्तुत करता है। एक, प्रशासनिक प्रयोजन से गिनती करना सामान्य होता है, परन्तु परमेश्वर की संहिता के विरुद्ध कदम उठाने पर उसकी इच्छा और विधि का प्रश्न उभरता है। दूसरा, दाऊद के शासनकाल की कुछ घटनाओं का रिकॉर्ड-निर्माण में निष्कलंकता का अभाव दिखता है, जो वर्षों बाद सत्यापित प्रार्थनाओं और कृपा के लिए स्मरणीय है। इस हिस्से में यह संकेत है कि सबै कार्य परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप होने चाहिए—अन्यथा उसका क्रोध उठ सकता है।

कुंजी विषय

  • परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप रिकॉर्ड-निर्माण: बिना उसकी अनुमति के या उसकी इच्छा के विरुद्ध गिनती करना उचित नहीं माना गया।
  • आत्म-निगरानी और आचार-विचार: दाऊद के समय में प्रशासनिक अड़चनें और अधूरा रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि परमेश्वर के सामने विनम्रता और सावधानी कितनी ज़रूरी है।
  • कृतज्ञता बनाम क्रोध-भ्रष्ट इतिहास: परमेश्वर की क्रोध का उल्लेख यह संकेत देता है कि भविष्य की योजनाओं में पवित्र विवेक अनिवार्य है।

महत्त्वपूर्ण क्रॉस-रेफरेंस

- 2 समु 24:1–25: यह बताता है कि गिनती के समय आह्वान या संहिता कैसे प्रभु की इच्छा को प्रभावित कर सकते हैं और क़ायदे से आगे बढ़ने का आह्वान करते हैं।

- 1 इतिहास 25–29: दाऊद के प्रशासनिक प्रयास और किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड बनते हैं, यह पंक्तियाँ समकालीन रिकॉर्ड-निर्माण के पहलुओं को जोड़ती हैं।

- हामी: 2 समु 24:1–2, 10-25 के सन्दर्भ—यद्यपि एक अन्य दृश्य, पर समान चिंता कि कैसे मानव प्रयास परमेश्वर की योजना से जुड़ते हैं।

व्यावहारिक reflection

हमारे जीवन में भी कभी-कभी हम बड़े योजनाओं के क्रम में रिकॉर्ड-निर्माण या निर्णय ले लेते हैं। यह स्मरणीय है कि परमेश्वर की योजना और समय-सारिणी के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए, न कि अपनी-अपने ढंग से। जब हम किंचित भी अति-आत्मविश्वासी हों या परमेश्वर के निर्देशों को हल्के में लें, तब भी खतरे रहते हैं। आर्त prarthna और परामर्श-प्रशासन हमें सचेत करते हैं कि हर कदम में भरोसा और श्रद्धा आवश्यक है।

सार और निष्कर्ष

इस verse से सीख मिलती है कि दाऊद के शासन के इतिहास में उन घटनाओं का प्रमुख बिंदु यह है कि परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार रिकॉर्ड-निर्माण और किए गए निर्णय ही सही दिशा में ले जाते हैं। गिनती का अधूरा होना संकेत देता है कि मानव प्रयासों का पूर्ण-विकास तब ही संभव है जब वह परमेश्वर की इच्छा के साथ तालमेल में हों।

उद्धरण नोट: नीचे दी गई तीन विश्वसनीय पूर्ववर्ती टीकाओं में से कुछ सीधे उद्धरण नहीं हैं, पर उनकी सोच इस पाठ के व्याख्यान में समाहित है।

याद रखने योग्य विचार-चिह्न (Cross-reference): 2 समु 24:1–25; 1 इतिहास 25–29; 2 समु 24:10-25—इनमें रिकॉर्ड-निर्माण और परमेश्वर की योजना के साथ हमारा सामंजस्य कैसे बिठाना चाहिए—इनका छोटा व्याख्यात्मक सार है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 इतिहास 27:24 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

2 शमूएल 24:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 शमूएल 24:1 (HINIRV) »
यहोवा का कोप इस्राएलियों पर फिर भड़का*, और उसने दाऊद को उनकी हानि के लिये यह कहकर उभारा, “इस्राएल और यहूदा की गिनती ले।”

1 इतिहास 21:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 इतिहास 21:1 (HINIRV) »
और शैतान* ने इस्राएल के विरुद्ध उठकर, दाऊद को उकसाया कि इस्राएलियों की गिनती ले।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें