भजन संहिता 68:34 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परमेश्‍वर की सामर्थ्य की स्तुति करो*, उसका प्रताप इस्राएल पर छाया हुआ है, और उसकी सामर्थ्य आकाशमण्डल में है।

भजन संहिता 68:34 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 68:34 – संदर्भ में संक्षेप स्पष्टीकरण

यह पद भजनकार के समस्त काव्य मंत्र से प्रेरित होकर परमेश्वर की महिमा और प्रभुत्व का उद्घोष करता है। भजन 68 एक प्रभु के सामर्थ्य, न्याय और उद्धार के गान के रूप में श्रृंखलाबद्ध है; 34वां श्लोक परमेश्वर के अद्भुत सामर्थ्य को आकाशी संसारों तक फैले हुए रूप में प्रस्तुत करता है — उनकी शक्तियां इस संसार से परे और आकाशमण्डल के ऊपर भी व्याप्त हैं। यह पाठ यह स्मरण कराता है कि हमारा विश्वास वही परमेश्वर है जो पृथ्वी-आकाश को नियंत्रित करता है और अपने लोगों पर आशीष बरसाता है।

मुख्य अर्थ और संदेश

यह श्लोक परमेश्वर की बाह्य महिमा और आंतरिक शक्ति दोनों का एक संयुक्त प्रस्तुतिकरण है। उसकी सामर्थ्य आकाश-आकाशमण्डल में है, जो उसके सनातन और अपरिमित स्वभाव का प्रमाण है। साथ ही, उसका प्रताप इस्राएल पर छाया हुआ है, अर्थात वह अपने चयनित लोगों के लिए संरक्षक और समर्थक है। भजनकार इस संदेश के माध्यम से यह बताना चाहता है कि भगवान केवल एक पृथ्वी-जनक सत्ता नहीं, बल्कि सृष्टि की हर चीज़ के अधिपति हैं, और उनके समर्थन से उनका चुना गया वंश जीता हुआ प्रतीत होता है।

दो तीन प्रमुख विषय

  • परमेश्वर की सर्वव्यापक शक्ति: आकाशमण्डलों में भी उसकी सामर्थ्य स्थापित है, जो उसकी महानता को दर्शाता है।
  • चुना हुआ समुदाय के लिए सुरक्षा: ईश्वर के प्रताप से यह्राएल पर आशीष और रक्षा उभरती है।
  • उद्धार का आह्वान और आशा: भजनकार की गवाही है कि प्रभु की शक्ति से लोग पथ-प्रत्याशन के बावजूद जी उठते हैं।

संदर्भित आयतों के साथ सम्बन्ध

1) भजन 68:1–2 – परमेश्वर के उठने से दुश्मनों का भागकर भाग जाना और उद्धार का उद्घोष, जो इस श्लोक के उद्घोषणीय स्वर को पुख्ता करते हैं।
2) भजन 24:7–10 – प्रभु के महिमा-राज्य के प्रवेश का दृश्य, जो आकाश-भूमि दोनों से प्रभु के विरुद्ध नहीं टिक सकता।
3) दन्यालुप्तिमा 4:24 – एक समान विचार: परमेश्वर की शक्ति और उसकी आशीष उनके लोगों के लिए रंग लाती है।

व्यावहारिक चिंतन

आपदाओं या असुरक्षा के समय इस पद की स्मृति हमारी मानसिकता को ऊँचाई देता है: जब परिस्थितियाँ भारी लगें, तब भी परमेश्वर की विशाल शक्ति सच है, और वह अपने people के लिए प्रतापी है। प्रार्थना और विश्वास में आकाशमण्डल की majesty को याद करना हमारी घबराहट को कम कर सकता है, और यह देखना कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ है, साहस देता है और अन्याय के सामने स्थिर रहने की प्रेरणा देता है।

संक्षिप्त समापन

भजन संहिता 68:34 एक स्पष्ट घोषणा है कि परमेश्वर की सामर्थ्य और प्रताप उच्चतम सीमा तक फैला है, और उसका आशीर्वाद इस्राएल पर सुरक्षित है। यह हमें यह सिखाता है कि जीवन की कठिनाइयों के बीच भी ईश्वर का सार है, जो आकाशमण्डलों तक फैला है और हमारे समुदाय के लिए रक्षा और उद्धार का स्रोत बना रहता है।

क्यों और कैसे विचार करें

– आत्म-प्रशंसा से बचना और परमेश्वर के गुणों को ध्यानपूर्वक स्वीकारना।

– कठिन क्षणों में सामर्थ्य की रिक्तता को महसूस करते समय भी प्रभु की आकाशीय शक्ति को स्मरण करना।

– समुदाय के लिए आशा और एकता को बनाये रखना, क्योंकि प्रताप उनके साथ है।

संदर्भ ग्रंथ: भजन संहिता 68:34; संदर्भित आयतों के साथ छोटी टिप्पणी।

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भजन संहिता 68:34 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 पतरस 1:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 पतरस 1:17 (HINIRV) »
कि उसने परमेश्‍वर पिता से आदर, और महिमा पाई जब उस प्रतापमय महिमा में से यह वाणी आई “यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं प्रसन्‍न हूँ।” (भज. 2:7, यशा. 42:1)

प्रकाशितवाक्य 19:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रकाशितवाक्य 19:6 (HINIRV) »
फिर मैंने बड़ी भीड़ के जैसा और बहुत जल के जैसा शब्द, और गर्जनों के जैसा बड़ा शब्द सुना “हालेलूय्याह! इसलिए कि प्रभु हमारा परमेश्‍वर, सर्वशक्तिमान राज्य करता है। (भज. 99:1, भज. 93:1)

व्यवस्थाविवरण 33:26 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 33:26 (HINIRV) »
“हे यशूरून, परमेश्‍वर के तुल्य और कोई नहीं है, वह तेरी सहायता करने को आकाश पर, और अपना प्रताप दिखाता हुआ आकाशमण्डल पर सवार होकर चलता है।

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