Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
एज्रा 7:1 एज्रा 7:2 एज्रा 7:3 एज्रा 7:4 एज्रा 7:5 एज्रा 7:6 एज्रा 7:7 एज्रा 7:8 एज्रा 7:9 एज्रा 7:10 एज्रा 7:11 एज्रा 7:12 एज्रा 7:13 एज्रा 7:14 एज्रा 7:15 एज्रा 7:16 एज्रा 7:17 एज्रा 7:18 एज्रा 7:19 एज्रा 7:20 एज्रा 7:21 एज्रा 7:22 एज्रा 7:23 एज्रा 7:24 एज्रा 7:25 एज्रा 7:26 एज्रा 7:27 एज्रा 7:28


एज्रा 7:20 - सीधे अर्थ का स्पष्टीकरण
यह वचन कहता है: यदि तुम्हारे परमेश्वर के भवन के लिये और भी कुछ वस्तुएँ या धन चाहिए, जो राजा के खजाने से देना हो, तो दे देना चाहिए। यहाँ यह संकेत है कि परमेश्वर के मंदिर के लिये आवश्यक सामग्री और निधि वही मानी जाएँगी जो राज्य-प्रमुखों के आधीन हो, परन्तु यह भी स्पष्ट है कि धन ऐसे उद्देश्य के लिये ही उपयोग होना चाहिए जो परमेश्वर के घर के लिये आवश्यक हो।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
एज्रा 7 अध्याय में यहूदियों के वापस लौटने और परमेश्वर के मंदिर को पुनः स्थापित करने की दिशा में राजा आसाफिया के कानूनी-नियोजन के संदर्भ हैं। एज्रा नबकर्दन-नियोजन के समय के धार्मिक और सामाजिक पुनर्गठन का समन्वय करते समय खजाने, भत्ते और सुरक्षा के मुद्दों को स्पष्ट करता है। इस वचन में विशेषकर मंदिर के निर्माण और सेवा के लिए राजकीय संसाधनों के आवंटन की बाध्यता दिखती है।
व्याख्या के वह बिंदु जो ध्यान योग्य हैं
क्रॉस-रेफरंस (संবद्ध संदर्भ) और उनका संक्षेप
1) नीतिवचन 3:9-10 — परमेश्वर के लिये महिमा और धन का सही उपयोग संतुलन पर निर्भर है; समृद्धि केवल उसकी सेवा के लिये हो।
2) हबक्कुक 2:3 — जो प्रत्यक्षतः समय पर पूर्ण होना चाहिए, मंदिर-कार्य हेतु समय पर संसाधन उपलब्ध होना चाहिए।
3) मलाकी 3:10 — दीन-हितैषी दान का आशीर्वाद और ईश्वर की उदारता; मंदिर-कार्य के लिये संयत दान प्रेरित होते हैं।
कैसे समझें और कैसे व्यवहार करें
यह वचन ईश्वर की मंदिर-योजना के लिये विश्वसनीय वित्तीय दिशा-निर्देश देता है। वित्तीय निर्णयों में स्पष्ट उद्देश्य, पारदर्शिता और नैतिकता आवश्यक है। समाज के राजकाज और परमेश्वर की सेवा के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है ताकि मंदिर की सेवाओं को बाधित न हो और उन सेवाओं के पूरे लाभ मिल सकें।
त्वरित निष्कर्ष
अगर मंदिर के लिये आवश्यक धन चाहिए, तो वह राज्य खजाने से मिलता है, बशर्ते उसका उपयोग मंदिर-कार्य के लिये ही हो। यह परमेश्वर की योजना के अनुरूप एक सुव्यवस्थित और जिम्मेदार वित्तीय व्यवस्था का संकेत है।
संरचना-आउटलाइन के अनुसार एक छोटी सूची
नोट: इस पंक्ति के मुख्य अर्थ पर गहरी दृष्टि डालते हुए, मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायस्पोर-पूर्व टिप्पणी-उद्धरण से संक्षेप में प्रेरणा मिलती है; उनके शब्दों के पूर्ण उद्धरण यहाँ संक्षेप में उद्धृत हैं ताकि हिंदी पाठक को संदर्भ समझ में आये।