Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
एज्रा 7:1 एज्रा 7:2 एज्रा 7:3 एज्रा 7:4 एज्रा 7:5 एज्रा 7:6 एज्रा 7:7 एज्रा 7:8 एज्रा 7:9 एज्रा 7:10 एज्रा 7:11 एज्रा 7:12 एज्रा 7:13 एज्रा 7:14 एज्रा 7:15 एज्रा 7:16 एज्रा 7:17 एज्रा 7:18 एज्रा 7:19 एज्रा 7:20 एज्रा 7:21 एज्रा 7:22 एज्रा 7:23 एज्रा 7:24 एज्रा 7:25 एज्रा 7:26 एज्रा 7:27 एज्रा 7:28



अर्थ का संक्षेप — एज्रा 7:16
इस पद में स्पष्ट है कि यहूदियों को राजा अर्मियाही या देश के भीतर मिलने वाली सम्पत्ति और दान-याची की इच्छा से इज़राइल के परमेश्वर के भवन, यरूशलेम के मंदिर, के लिए दी जाने वाली चाँदी-सोना और दान की स्वीकृति है। यह संकेत देता है कि पवित्र मंदिर के लिये समर्पण और बंधुत्व का उद्देश्य समुदाय के भीतर एकजुटता का प्रदर्शन है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
एज्रा 7 अध्याय में पवित्र मंदिर के पुनर्निर्माण और यहूदियों के तीर्थ-यात्रा के समय की स्थिति दीखी जाती है। ईसरायेल की दासता से लौटकर यहूदियों ने अपने परमेश्वर के भवन को फिर से स्थापित करने का निर्णय लिया और यह अध्याय यूरेशलेम के लिए देव-उत्साह और जिम्मेदारी दोनों का चित्रण करता है।
interpretive observations
छोटे थीमैटिक बिंदु
अनुकरण योग्य क्रॉस-रेफरेंसेस
— एब्राहम की कहानी में भी दान और प्रणिपत स्वीकार-भाव का महत्त्व स्पष्ट है (उद्धार के बंधन में दान की भूमिका).
— स्वेच्छाय दान का आदर्श: अन्यत्र स्रोतों में समुदाय की प्राथना और सेवक-उत्साह मंदिर-निर्माण के लिए प्रेरणा बनते हैं।
— मंदिर के लिए समर्पण का विचार पुरातन इस्राएल की पूजा-व्यवस्था का केंद्रीय हिस्सा रहा है, जिसका उद्देश्य परमेश्वर के सम्मान का प्रदर्शन है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
जब समुदाय अपने संसाधन दे और याजक-नेताओं के साथ मिलकर सहयोग करें, तब पूजा-स्थल शक्तिशाली रूप से बहाल होता है और लोगों की भक्ति और एकता मजबूत होती है। आपके समुदाय में भी यदि आवश्यक देनदारियाँ, दान या सेवाकार्यों के लिए उत्साह पैदा हो, तो वह सामान्य जीवन से उठकर आध्यात्मिक प्रेरणा बन सकता है।
संदर्भ-विचार
1) मंदिर के लिए दान का उद्देश्य कैसे समाज में एकता और जिम्मेदारी बढ़ाता है।
2) राजस्व-सहयोग और धार्मिक नेतृत्व की भूमिका—याजकों की सहभागिता क्यों महत्त्वपूर्ण है।
3) परमेश्वर के भवन के लिये समर्पण का स्थायित्व बनाये रखना कैसे व्यक्तिगत और सामुदायिक आस्था को पुष्ट करता है।
नोट: नीचे दिए गए एतिहासिक टिप्पणीकारों से संक्षिप्त विचारों को समाहित किया गया है, ताकि पाठक को स्पष्ट और संतुलित व्याख्या मिल सके (जहाँ अनुपलब्ध हो, वहाँ मूल पाठ के संदर्भों पर निर्भर रखा गया है)।
कुछ उद्धरण (सार-सार) अगर उपलब्ध हों तो विभिन्न टिप्पणीकारों से:
- मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के विद्यमान प्राकृतिक दर्शनों के छोटे-छोटे पंक्तियाँ जिनके बारे में पंक्तियाँ सीधे उद्धृत नहीं की गईं, उनके विचारों को समुचित स्पष्टीकरण के साथ सम्मिलित किया गया है।