Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
एज्रा 7:1 एज्रा 7:2 एज्रा 7:3 एज्रा 7:4 एज्रा 7:5 एज्रा 7:6 एज्रा 7:7 एज्रा 7:8 एज्रा 7:9 एज्रा 7:10 एज्रा 7:11 एज्रा 7:12 एज्रा 7:13 एज्रा 7:14 एज्रा 7:15 एज्रा 7:16 एज्रा 7:17 एज्रा 7:18 एज्रा 7:19 एज्रा 7:20 एज्रा 7:21 एज्रा 7:22 एज्रा 7:23 एज्रा 7:24 एज्रा 7:25 एज्रा 7:26 एज्रा 7:27 एज्रा 7:28



एज्रा 7:25 — संदर्भित पथ के अनुसार न्याय-न्यायिक व्यवस्था
इस वाचा का immediate setting यह है कि एज्रा, जो लोग बन्धन-विभाजन के बाद लौटे हैं, उन्हें अपना कार्य-स्रोत और आधिकारिक जिम्मेदारियाँ सौंपी जा रही हैं। परमेश्वर ने एज्रा को ज्ञान-संयम और कानून की समझ दी थी ताकि वह कानून के अनुसार विद्वानों और न्यायाधीशों का चयन कर सके, जो यहूदा के भीतर और पार महानदी के निवासियों में धर्म-नियम पालन कराएं।
परमेश्वर का प्रकटन: बुद्धि और व्यवस्था
कथन एकात्मता से दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के जीवन-निर्णयों में बुद्धि को महत्त्व देता है—जीवंत विश्वास के साथ विवेकपूर्ण व्यवस्था बनाकर। एज्रा के पास मिली हुई बुद्धि से वह न्याय और प्रशासन के हर स्तर पर मार्गदर्शन कर सके। इस प्रकार परमेश्वर का उद्देश्य एक स्पष्ट, निष्पक्ष और शिक्षाप्रद समाज बनाना है जिसमें जान-पहचान, कर्तव्य और कानून का सम्मान हो।
महत्वपूर्ण शब्द और imagery की स्पष्टता
संबंधी पाठ (Cross-references) — छोटा परिचय
• नीतिवचन और 사회-व्यवस्था के संदर्भ देता है कि ज्ञान और विवेक कैसे न्याय को समर्थ बनाते हैं।
• दान-प्रबंध और समाज-व्यवस्था में नेताओं की भूमिका पर दृष्टि डालता है कि कैसे शासन और शिक्षण का मिश्रण होता है।
आज-के-समय के लिए व्यवहारिक अनुप्रयोग
- कटिबद्ध निर्णय लेने वालों के लिए: परमेश्वर ने जो बुद्धि दी है, उसे नम्रता और सत्यनिष्ठा के साथ प्रयोग करें। न्याय-निर्णयों में तटस्थ रहना, पक्षपात से दूर रहना और तथ्य-आधारित विवेक प्रमुख है।
- शिक्षा-जनित दायित्व: यदि आप न्यायाधीश या शिक्षक हैं, तो उन्हें कानून की मानक समझ प्रदान करें और उन लोगों को भी सीख दें जो अवगत नहीं हैं।
- सामुदायिक एकता: महानद के पार भी ऐसे नियम हों जो स्मरण रखें कि व्यवहार और इज्ज़त दोनों को बनाए रखना ही सामाजिक समृद्धि है।
उद्धृत विचार (महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ)
इस अंश के लिए दो-तीन विश्वसनीय पुरानी टीका-आलेखों के सार से प्रेरित विचार मिलते हैं कि परमेश्वर का उद्देश्य शिक्षा और न्याय के एक संतुलित समाज की स्थापना है, जिसमें नेता सत्य और निष्पक्षता पर आधारित निर्णय लें।
महत्वपूर्ण उद्धरण: यदि उपलब्ध हो, तो मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के संकलनों से छोटे-शब्द उद्धरण मिलेंगे—परन्तु यहाँ पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है।
संक्षिप्त सार
ईश्वर एज Ezra के अंदर से बुद्धि निकाले और उसे न्याय-निर्णय और शिक्षण के क्षेत्र में नियुक्तियों के लिए प्रेरित करते हैं। यह न केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था है, बल्कि धार्मिक कर्तव्य और आध्यात्मिक शिक्षा का समन्वय है ताकि जो लोग जानते हैं वे नियमन के अनुसार चलें और जो नहीं जानते उन्हें सिखाएं।