Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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एज्रा 7:27 — संदर्भ और संदेश
येज़रा 7 अध्याय का यह हिस्सा यहूदी निर्वासन के बाद वापसी की कहानी में है। यहाँ राजा असहाय के आदेश पर यहूदा के पित्रों के परमेश्वर पर की गई वाणी और धन्य-ध्वनि चलती है, जो यहोदाह के प्रबल विश्वास को संकेत देती है कि परमेश्वर ने यरूशलेम के भवन के पुनर्निर्माण की योजना अपने भक्तों के मन में डाली है। यह वचन देव की पूर्व-योजना और मानव आज्ञाओं के बीच संतुलन को दर्शाता है: परमेश्वर की इच्छा से क्रमबद्ध योजनाएँ मानव इतिहास में घटित होती हैं।
ईश्वर का विश्वास और योजना
यह पाठ दिखाता है कि परमेश्वर अपने प्रत्याशित उद्देश्यों को पूरी तरह से जानते हैं और वे मन और राजा के दिल में जो कुछ भी प्रेरित करते हैं, उसके पीछे एक लक्ष्य होता है। “धन्य है हमारे पितरों का परमेश्वर यहोवा” कहना यह बताता है कि इतिहास और प्रवृत्ति एक पवित्र योजना की भागीदारी हैं, जिसमें परमेश्वर ने अपने चित्त के अनुरूप प्रेरणा दी। ईश्वर के स्वभाव की यह उद्घोषणा यह भी संकेत देती है कि वस्तुतः भवन-निर्माण जैसी मानव-चेतन गतिविधियाँ परमेश्वर की महिमा और धार्मिक-समृद्धि के उपाय बनती हैं।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
इसमें यह स्पष्ट होता है कि भौतिक पुनर्निर्माणों के पीछे भी आध्यात्मिक उद्देश्य होता है—याखूब के चहुए गए भय के बाद भी परमेश्वर अपने पंक्ति-खण्ड को एकीकृत करना चाहते हैं।
अन्य संबंधित बाइबिल पाठ
1) हब 11:3 — विश्वास के कारण संसार की रचना क्रमशः हुआ; यह दिखाता है कि विचार और साधन परमेश्वर के अनुसार मिलते हैं।
2) दान 2:28 — व्यवस्थाओं के समय पर निर्भरता: परमेश्वर मानव इतिहास को अपने उद्देश्य के अनुसार संचालित करते हैं।
3) ने 12:27 — मंदिर-निर्माण के पवित्र उद्देश्य का स्मरण: परमेश्वर का नाम बुलंद करने वाला भवन भी एक पवित्र कार्य है।
प्रयोग—आज की जीवनशैली में
- यदि आप कठिन समय में स्थित हों, तो यह पाठ स्मरण कराता है कि परमेश्वर की योजना मानव-प्रयासों से आगे है। आपके निर्णय अक्सर उनके उद्देश्य के अनुरूप होते हैं, चाहे वे पहली दृष्टि में स्पष्ट न दिखें।
- ईश्वर की महिमा के लिए कार्य करें—चाहे वह प्रेरणादायी हो या चुनौतीपूर्ण—यही नमूना है कि कैसे विश्वास और कार्य एक साथ चलते हैं।
मैथ्यू हेनरी, आर्थबुक और एडम क्लार्क से स्निप्त उद्धरण
मैथ्यू हेनरी: “परमेश्वर के काम का ढांचा मानव साधनों के द्वारा स्थिर होता है; वही जो महत्ता देता है, वही उनका अंत है।”
आर्थबर्न्स: “यह उद्धाटन ईश्वर की चरणबद्ध योजना का भाग है, जिसमें राज्य की नीति और मंदिर के पुनर्निर्माण का क्रम एक पवित्र इच्छा के अनुरूप चलता है।”
एडम क्लार्क: “यह महान कार्य यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर अपने लोगों के उद्धार और समृद्धि के लिए ऐसे उपाय बनाते हैं जो मानव-चेतना के बाहर होते हैं।”
नोट: ऊपर के उद्धरण शब्द-शाब्दिक पूर्ण पाठ नहीं हैं, बल्कि समरी हैं ताकि पाठक को मूल विचार मिलें।