2 इतिहास 36:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फारस के राजा कुस्रू के पहले वर्ष में यहोवा ने उसके मन को उभारा कि जो वचन यिर्मयाह के मुँह से निकला था, वह पूरा हो। इसलिए उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया, और इस आशय की चिट्ठियाँ लिखवाई:

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2 इतिहास 36:22 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य बिंदु

फरसन राजा कुश्रू के पहले वर्ष में यहोवा ने उसके मन को प्रेरित किया कि वे यिर्मयाह के मुँह से निकले वचन को सच मानकर पूरा करें। यह वचन बन्धन-निर्गमन के बाद बचे हुए प्रजा-चेतना को पुनः विश्वास में लाने, יהוה के वचनों के पालन की सिद्धि और दया-प्रेरित शासन के लिए प्रेरणा बन गया।

साहित्यिक संदर्भ

2 इतिहास 36:22-23 पंक्तियाँ यहूदियों के चक्र-वृत्त में घटी घटनाओं का निर्णायक अवकाश देती हैं—यहोवा के वचन की पूर्ति, बंधन के समय से लेकर लौट-बसे लोग और बपतिस्मा-सी सुरक्षा। यह दृढ़ संकेत है कि परमेश्वर के उद्देश्य समय-समय पर इतिहास में खुलते हैं और सत्ता-केन्द्रित निर्णयों के भीतर भी वे अपनी योजना को आगे बढ़ाते हैं।

दर्शनात्मक महत्त्व

1) परमेश्वर की विश्व-भरोसे और वचन की दृढ़ता: कुश्रू का मन उभारा जाना यह दिखाता है कि एक राजा की नीति और एक आध्यात्मिक योजना कितनी बार एक ही दिशा में मिलती है। यह यह दर्शाता है कि God’s timing और मार्ग प्रशासन के भीतर परिवर्तन ला सकता है।

2) उद्धारक इतिहास का पुनः आरम्भ: यिर्मयाह के संदेश का प्रचार होना लौटे हुए लोगों के लिए आशा का संकेत है—यहोवा ने अपने वचनों को सत्यापित किया, ताकि लौटने वाले अपने भवितव्य को समझें।

पवित्र शास्त्र से संरेखण

- पुराने नियम की कहानियाँ यह दिखाती हैं कि परमेश्वर के वचन की पूर्ति समय पर होती है। यह विविध इतिहासिक घटनाओं के बीच एक स्थिर धुरी है।

गहराई से जुड़े क्रॉस-रेफरेंसेस

  • यिर्मयाह 25:11-12 — वहाँ राष्ट्र के दंड के बाद भी भविष्य की आशा और वचनों की पूर्ति का संकेत मिलता है; यह पाठ इस स्मरण को मजबूत करता है कि दुष्क्रमण के बीच परमेश्वर का सच्चा वचन कैसे जीवित रहता है।
  • एग्ज़्ट 1:1-4 — तूरती-काल में यहूदा और यरूशलेम के पुनर्निर्माण का अवसर, यह दिखाता है कि सत्ता परिवर्तन के समय भी ईश्वर का उद्देश्य उजागर होता है।
  • हबकुक 2:3 — समय पर दृष्टान्त: वचन निश्चित है, पर उसका परिणाम धैर्य के साथ देखने योग्य है; यह पाठ प्रकट करता है कि वचन-पूर्ति में धैर्य आवश्यक है।

जीवंत प्रश्नों के लिए चिंतन

  • क्या मैं उन परिस्थितियों में भी यह मान सकता/सकती हूँ कि परमेश्वर का उद्देश्य मेरे जीवन में समय के साथ खुल रहा है?
  • यहोवा के वचनों के लिए मैं कितना संवेदनशील हूँ और उसे अपने दैनिक निर्णयों में कैसे लागू करता/करती हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यह पवित्र वचन हमें बताता है कि परमेश्वर अपने वचनों की पूर्ति के लिए समय और परिस्थिति निर्धारित करते हैं। कुश्रू के मन को उभारना यह दिखाता है कि प्रभार और सत्ता के भीतर भी ईश्वर की योजना चलती है, और यहूदियों के उद्धार-योजना में वचन का प्रचार एक नया आरम्भ बनकर आया। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि विश्वास बनाए रखें, यह समझें कि परमेश्वर जो कहता है वह पूरा होता है।

उद्धृत टिप्पणियाँ (पानी-गणित उपलब्ध हो तो)

यहां Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के वास्तविक संक्षिप्त उद्धरण यदि उपलब्ध हों, उन्हें समाहित किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 36:22 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यिर्मयाह 25:12 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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जब सत्तर वर्ष बीत चुकें, तब मैं बाबेल के राजा और उस जाति के लोगों और कसदियों के देश के सब निवासियों को अधर्म का दण्ड दूँगा, यहोवा की यह वाणी है; और उस देश को सदा के लिये उजाड़ दूँगा।

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फारस के राजा कुस्रू के राज्य के पहले वर्ष में यहोवा ने फारस के राजा कुस्रू का मन उभारा कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुँह से निकला था वह पूरा हो जाए, इसलिए उसने अपने समस्त राज्य में यह प्रचार करवाया और लिखवा भी दिया:

यिर्मयाह 29:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 29:10 (HINIRV) »
“यहोवा यह कहता है कि बाबेल के सत्तर वर्ष पूरे होने पर मैं तुम्हारी सुधि लूँगा, और अपना यह मनभावना वचन कि मैं तुम्हें इस स्थान में लौटा ले आऊँगा, पूरा करूँगा।

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