2 इतिहास 36:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यह सब इसलिए हुआ कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुँह से निकला था, वह पूरा हो, कि देश अपने विश्राम कालों में सुख भोगता रहे। इसलिए जब तक वह सूना पड़ा रहा तब तक अर्थात् सत्तर वर्ष के पूरे होने तक उसको विश्राम मिला।

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2 इतिहास 36:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

स्थिति और पृष्ठभूमि

2 इतिहास 36:21 उस समय का संदर्भ देता है जब यहोवा के लोगों का देश पन्थो-विदित अत्याचार के कारण निर्जन कर दिया गया था। नबियों के वचन के अनुसार, बेदखली के कारण सात्टी वर्ष तक “विश्राम” मिला, ताकि देश अपने विश्राम कालों में सुख भोग सके। यह टेक्स्ट यह दिखाता है कि इतिहास का क्रम परमेश्वर के वचन के अनुरूप चलता है और उसकी योजना से बाहर कुछ भी नहीं होता।

ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से 무엇 संकेत मिलते हैं

यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए सच्चा और निर्देशित इतिहास लिखता है। जब लोग असंयम पर चलते हैं, तो वह चीत्कार-भरे दण्ड से नहीं, बल्कि अनुशासन के रूप में विश्राम के वर्षों को निर्धारित करता है ताकि वे वापस अपनी सभ्यता और भक्ति के मूल में लौटें। यह दर्शाता है कि ईश्वर का निर्णय और उसकी कृपा एक साथ चलते हैं—न तो दण्ड बिना उद्देश के और न ही कृपा बिना पवित्र उद्देश्य के।

प्रमुख शब्दों और प्रतिमाओं की स्पष्टता

  • (sabāṣṭta śabda): समय की वह अवधि जब देश शांत रहता है और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियाँ ठहर जाती हैं; यह एक दिवंगत-वर्ष की विश्राम की प्रतिश्रुति नहीं, बल्कि एक संरक्षित योजना है।
  • (maun hona ya उन्नमित निर्गमन): अस्थायी शांति और खालीपन जस का तस रहने के कारण, लोग अपने दायित्वों पर लौट सकें—यही विश्राम की सार है।

अन्य जुड़ी आयतें

— यह विचार 2 इतिहास के संदर्भों में बार-बार आता है, जहां पंथ के प्रतिशोधित समय में निर्बलता और पुनर्स्थापन के बीच संतुलन बनता है।

— यिर्मयाह की भविष्यवाणी और परमेश्वर की वाणी के पालन से जुड़ी सन्तुलित प्रेरणा मिलती है कि नियम-पालन और दया एकसाथ चलती हैं।

आज के संदर्भ में उपभोक्ता-उपयोग

हम में से प्रत्येक के लिए यह स्मरण कराता है कि कठिन समय भी परमेश्वर के नियंत्रण के भीतर है। अगर कभी जीवन में विश्राम की आवश्यकता हो—आत्म-शांतता, आत्म-समर्पण और पुनः भरोसा—तो यह वही अवसर है जिसमें हम भागीदारी कर सकते हैं, ताकि हमारी आत्मा लौटकर परमेश्वर के साथ एक बार फिर से विश्राम पाए।

क्रॉस-रेफरेंसेज़

यशायाह 30:15 — भय और विश्राम के बीच संतुलन की महत्ता; 2 इतिहास 7:14 — पाप-त्याग और पश्चात्ताप के बाद परमेश्वर की कृपा; दानिय्येल 9:2 — समय की योजना और विश्राम के संकेत।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि ईश्वर के निर्णय समय-समय पर पुनः व्यवस्थित होते हैं ताकि लोग सत्य के साथ जीना सीखें और उसकी कृपा को अनुभव करें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 36:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यिर्मयाह 29:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 29:10 (HINIRV) »
“यहोवा यह कहता है कि बाबेल के सत्तर वर्ष पूरे होने पर मैं तुम्हारी सुधि लूँगा, और अपना यह मनभावना वचन कि मैं तुम्हें इस स्थान में लौटा ले आऊँगा, पूरा करूँगा।

लैव्यव्यवस्था 26:34 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लैव्यव्यवस्था 26:34 (HINIRV) »
“तब जितने दिन वह देश सूना पड़ा रहेगा और तुम अपने शत्रुओं के देश में रहोगे उतने दिन वह अपने विश्रामकालों को मानता रहेगा। तब ही वह देश विश्राम पाएगा, अर्थात् अपने विश्रामकालों को मानता रहेगा।

दानिय्येल 9:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
दानिय्येल 9:2 (HINIRV) »
उसके राज्य के पहले वर्ष में, मुझ दानिय्येल ने शास्त्र के द्वारा समझ लिया कि यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहोवा के उस वचन के अनुसार, जो यिर्मयाह नबी के पास पहुँचा था, कुछ वर्षों के बीतने पर अर्थात् सत्तर वर्ष के बाद पूरी हो जाएगी।

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