Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
2 इतिहास 1 2 इतिहास 2 2 इतिहास 3 2 इतिहास 4 2 इतिहास 5 2 इतिहास 6 2 इतिहास 7 2 इतिहास 8 2 इतिहास 9 2 इतिहास 10 2 इतिहास 11 2 इतिहास 12 2 इतिहास 13 2 इतिहास 14 2 इतिहास 15 2 इतिहास 16 2 इतिहास 17 2 इतिहास 18 2 इतिहास 19 2 इतिहास 20 2 इतिहास 21 2 इतिहास 22 2 इतिहास 23 2 इतिहास 24 2 इतिहास 25 2 इतिहास 26 2 इतिहास 27 2 इतिहास 28 2 इतिहास 29 2 इतिहास 30 2 इतिहास 31 2 इतिहास 32 2 इतिहास 33 2 इतिहास 34 2 इतिहास 35 2 इतिहास 36Verse
2 इतिहास 36:1 2 इतिहास 36:2 2 इतिहास 36:3 2 इतिहास 36:4 2 इतिहास 36:5 2 इतिहास 36:6 2 इतिहास 36:7 2 इतिहास 36:8 2 इतिहास 36:9 2 इतिहास 36:10 2 इतिहास 36:11 2 इतिहास 36:12 2 इतिहास 36:13 2 इतिहास 36:14 2 इतिहास 36:15 2 इतिहास 36:16 2 इतिहास 36:17 2 इतिहास 36:18 2 इतिहास 36:19 2 इतिहास 36:20 2 इतिहास 36:21 2 इतिहास 36:22 2 इतिहास 36:23



स्थिति और पृष्ठभूमि
2 इतिहास 36:21 उस समय का संदर्भ देता है जब यहोवा के लोगों का देश पन्थो-विदित अत्याचार के कारण निर्जन कर दिया गया था। नबियों के वचन के अनुसार, बेदखली के कारण सात्टी वर्ष तक “विश्राम” मिला, ताकि देश अपने विश्राम कालों में सुख भोग सके। यह टेक्स्ट यह दिखाता है कि इतिहास का क्रम परमेश्वर के वचन के अनुरूप चलता है और उसकी योजना से बाहर कुछ भी नहीं होता।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से 무엇 संकेत मिलते हैं
यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए सच्चा और निर्देशित इतिहास लिखता है। जब लोग असंयम पर चलते हैं, तो वह चीत्कार-भरे दण्ड से नहीं, बल्कि अनुशासन के रूप में विश्राम के वर्षों को निर्धारित करता है ताकि वे वापस अपनी सभ्यता और भक्ति के मूल में लौटें। यह दर्शाता है कि ईश्वर का निर्णय और उसकी कृपा एक साथ चलते हैं—न तो दण्ड बिना उद्देश के और न ही कृपा बिना पवित्र उद्देश्य के।
प्रमुख शब्दों और प्रतिमाओं की स्पष्टता
अन्य जुड़ी आयतें
— यह विचार 2 इतिहास के संदर्भों में बार-बार आता है, जहां पंथ के प्रतिशोधित समय में निर्बलता और पुनर्स्थापन के बीच संतुलन बनता है।
— यिर्मयाह की भविष्यवाणी और परमेश्वर की वाणी के पालन से जुड़ी सन्तुलित प्रेरणा मिलती है कि नियम-पालन और दया एकसाथ चलती हैं।
आज के संदर्भ में उपभोक्ता-उपयोग
हम में से प्रत्येक के लिए यह स्मरण कराता है कि कठिन समय भी परमेश्वर के नियंत्रण के भीतर है। अगर कभी जीवन में विश्राम की आवश्यकता हो—आत्म-शांतता, आत्म-समर्पण और पुनः भरोसा—तो यह वही अवसर है जिसमें हम भागीदारी कर सकते हैं, ताकि हमारी आत्मा लौटकर परमेश्वर के साथ एक बार फिर से विश्राम पाए।
क्रॉस-रेफरेंसेज़
यशायाह 30:15 — भय और विश्राम के बीच संतुलन की महत्ता; 2 इतिहास 7:14 — पाप-त्याग और पश्चात्ताप के बाद परमेश्वर की कृपा; दानिय्येल 9:2 — समय की योजना और विश्राम के संकेत।
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि ईश्वर के निर्णय समय-समय पर पुनः व्यवस्थित होते हैं ताकि लोग सत्य के साथ जीना सीखें और उसकी कृपा को अनुभव करें।