Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 9:1 दानिय्येल 9:2 दानिय्येल 9:3 दानिय्येल 9:4 दानिय्येल 9:5 दानिय्येल 9:6 दानिय्येल 9:7 दानिय्येल 9:8 दानिय्येल 9:9 दानिय्येल 9:10 दानिय्येल 9:11 दानिय्येल 9:12 दानिय्येल 9:13 दानिय्येल 9:14 दानिय्येल 9:15 दानिय्येल 9:16 दानिय्येल 9:17 दानिय्येल 9:18 दानिय्येल 9:19 दानिय्येल 9:20 दानिय्येल 9:21 दानिय्येल 9:22 दानिय्येल 9:23 दानिय्येल 9:24 दानिय्येल 9:25 दानिय्येल 9:26 दानिय्येल 9:27



दानिय्येल 9:2 — तत्काल सत्यान्वेषण का आरम्भ
दानिय्येल के मन में उसी वर्ष के भीतर जो दृश्य उभरकर आया, वह यह कि यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहोवा के वचन के अनुसार, यिर्मयह नबी से जुड़े बंधनों के अनुसार, कुछ वर्षों के बीतने पर पूरी होगी — अर्थात् सत्तर वर्ष के पश्चात्। यह पाठ शास्त्र-वाचन और भविष्य-वाणी के बीच संतुलन दिखाता है। दानिय्येल ने इतिहास और भविष्य को एक समन्वित दृष्टि से देखने का प्रयास किया; उन्होंने यह मान लिया कि परमेश्वर का उद्देश्य समय के भीतर स्पष्ट रूप से प्रकट होगा।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से जो प्रत्यक्ष सीख मिलती है
महत्वपूर्ण शब्द एवं छवियाँ
शास्त्र के द्वारा समझ लिया का अर्थ है परमेश्वर के वचन से ज्ञान और समझ प्राप्त करना—ताकि स्थिति स्पष्ट हो और विश्वास को दशा के अनुरूप मार्गदर्शन मिले। यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहाँ दुष्कर समय की प्रतीक है; यह संकेत है कि पवित्र शहर और आराधना-स्थान के लेकर हुए नुकसान का समय-निर्धारण था, जिसे पवित्रशास्त्रों में स्पष्ट किया गया है।
संबद्ध वचन-May और उनके संकेत
1) यिर्मयाह 25:11–12 और 29:10— यह बताता है कि बंधनों के भीतर बसे हुए समूहों की अवधि एक निर्धारित समय तक रहेगी, और फिर उद्धार का समय आता है।
2) दानिय्येल 9:24–27— एक व्यापक भविष्य-दृष्टि जो मसीह-आगमन और समय के पूर्ण होने की बात करती है।
3) दानिय्येल 6–7— प्रभु-राज्य के पीछे की स्थायित्व और परमेश्वर के शासन की पुष्टि।
विश्वास के नई भूमिका — आज के संदर्भ
आज हम जीवन में कैसी परिस्थिति भी मान लें, यह पाठ याद दिलाता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर की योजना है। हमारे लिए यह संकेत है कि धैर्य बनाए रखें, Shastra-आधारित मूल्य-निर्णय करें, और इतिहास के प्रभु के नियंत्रण को याद रखें। यह विश्वास देता है कि समय के साथ परमेश्वर की प्रेरणा और उद्देश्य स्पष्ट होंगे, चाहे वर्तमान तथ्य कितने भी कठोर क्यों न लगें।
क्रॉस-रेफरेंसेज और उनके संक्षिप्त अर्थ
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि इतिहास और भविष्य परमेश्वर के क्रम में एकसाथ चलते हैं, और विश्वासी को शास्त्र-धारण के साथ व्यावहारिक जीवन में धैर्य बनाए रखना चाहिए।