दानिय्येल 9:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसके राज्य के पहले वर्ष में, मुझ दानिय्येल ने शास्त्र के द्वारा समझ लिया कि यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहोवा के उस वचन के अनुसार, जो यिर्मयाह नबी के पास पहुँचा था, कुछ वर्षों के बीतने पर अर्थात् सत्तर वर्ष के बाद पूरी हो जाएगी।

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दानिय्येल 9:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

दानिय्येल 9:2 — तत्काल सत्यान्वेषण का आरम्भ

दानिय्येल के मन में उसी वर्ष के भीतर जो दृश्य उभरकर आया, वह यह कि यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहोवा के वचन के अनुसार, यिर्मयह नबी से जुड़े बंधनों के अनुसार, कुछ वर्षों के बीतने पर पूरी होगी — अर्थात् सत्तर वर्ष के पश्चात्। यह पाठ शास्त्र-वाचन और भविष्य-वाणी के बीच संतुलन दिखाता है। दानिय्येल ने इतिहास और भविष्य को एक समन्वित दृष्टि से देखने का प्रयास किया; उन्होंने यह मान लिया कि परमेश्वर का उद्देश्य समय के भीतर स्पष्ट रूप से प्रकट होगा।

ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से जो प्रत्यक्ष सीख मिलती है

  • ईश्वर का नियंत्रण और योजना: दानिय्येल को यह दृढ़ विश्वास है कि इतिहास परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार चलता है। भय और आशंकाओं के बीच भी परमेश्वर के उद्देश्य मानवीय लेखाओं के ऊपर शासन करते हैं।
  • उद्धार के समय का निर्धारित क्रम: बाइबल का यह भाग यह संकेत देता है कि प्रभु के समय-सारिणी में सभी घटनाओं का एक निर्धारित क्रम है, चाहे वे दशाओं की क्षणिक विचलनें ही क्यों न हों।
  • विश्वास की अनुभूति और शास्त्र-निष्ठा: दानिय्येल ने शास्त्र के द्वारा अपने समय की घटनाओं का अनुरोध और विश्लेषण किया; यह देखना कि शास्त्र किस प्रकार घटनाओं को पूर्वसूचित करता है, विश्वास को दृढ़ बनाता है।

महत्वपूर्ण शब्द एवं छवियाँ

शास्त्र के द्वारा समझ लिया का अर्थ है परमेश्वर के वचन से ज्ञान और समझ प्राप्त करना—ताकि स्थिति स्पष्ट हो और विश्वास को दशा के अनुरूप मार्गदर्शन मिले। यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहाँ दुष्कर समय की प्रतीक है; यह संकेत है कि पवित्र शहर और आराधना-स्थान के लेकर हुए नुकसान का समय-निर्धारण था, जिसे पवित्रशास्त्रों में स्पष्ट किया गया है।

संबद्ध वचन-May और उनके संकेत

1) यिर्मयाह 25:11–12 और 29:10— यह बताता है कि बंधनों के भीतर बसे हुए समूहों की अवधि एक निर्धारित समय तक रहेगी, और फिर उद्धार का समय आता है।

2) दानिय्येल 9:24–27— एक व्यापक भविष्य-दृष्टि जो मसीह-आगमन और समय के पूर्ण होने की बात करती है।

3) दानिय्येल 6–7— प्रभु-राज्य के पीछे की स्थायित्व और परमेश्वर के शासन की पुष्टि।

विश्वास के नई भूमिका — आज के संदर्भ

आज हम जीवन में कैसी परिस्थिति भी मान लें, यह पाठ याद दिलाता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर की योजना है। हमारे लिए यह संकेत है कि धैर्य बनाए रखें, Shastra-आधारित मूल्य-निर्णय करें, और इतिहास के प्रभु के नियंत्रण को याद रखें। यह विश्वास देता है कि समय के साथ परमेश्वर की प्रेरणा और उद्देश्य स्पष्ट होंगे, चाहे वर्तमान तथ्य कितने भी कठोर क्यों न लगें।

क्रॉस-रेफरेंसेज और उनके संक्षिप्त अर्थ

  • यिर्मयाह 29:10 — पक्का समय पर उद्धार का वचन; सत्तर-वर्षों के संदर्भ की एक बड़ी नींव देता है।
  • दानिय्येल 9:24–27 — मसीह-आगमन और समय-सारिणी का विस्तृत संकेत; प्रेरित करता है कि इस समय के प्रश्नों के लिए श्रद्धा-पूर्वक प्रतीक्षा करें।
  • यिर्मयाह 33:14–16 — सामने आने वाले समय में पवित्रता और उद्धार का पुनः आश्वासन।

इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि इतिहास और भविष्य परमेश्वर के क्रम में एकसाथ चलते हैं, और विश्वासी को शास्त्र-धारण के साथ व्यावहारिक जीवन में धैर्य बनाए रखना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

दानिय्येल 9:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यिर्मयाह 29:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 29:10 (HINIRV) »
“यहोवा यह कहता है कि बाबेल के सत्तर वर्ष पूरे होने पर मैं तुम्हारी सुधि लूँगा, और अपना यह मनभावना वचन कि मैं तुम्हें इस स्थान में लौटा ले आऊँगा, पूरा करूँगा।

यिर्मयाह 25:11 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 25:11 (HINIRV) »
सारी जातियों का यह देश उजाड़ ही उजाड़ होगा, और ये सब जातियाँ सत्तर वर्ष तक बाबेल के राजा के अधीन रहेंगी।

2 इतिहास 36:21 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 इतिहास 36:21 (HINIRV) »
यह सब इसलिए हुआ कि यहोवा का जो वचन यिर्मयाह के मुँह से निकला था, वह पूरा हो, कि देश अपने विश्राम कालों में सुख भोगता रहे। इसलिए जब तक वह सूना पड़ा रहा तब तक अर्थात् सत्तर वर्ष के पूरे होने तक उसको विश्राम मिला।

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