Old Testament
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दानिय्येल 9:1 दानिय्येल 9:2 दानिय्येल 9:3 दानिय्येल 9:4 दानिय्येल 9:5 दानिय्येल 9:6 दानिय्येल 9:7 दानिय्येल 9:8 दानिय्येल 9:9 दानिय्येल 9:10 दानिय्येल 9:11 दानिय्येल 9:12 दानिय्येल 9:13 दानिय्येल 9:14 दानिय्येल 9:15 दानिय्येल 9:16 दानिय्येल 9:17 दानिय्येल 9:18 दानिय्येल 9:19 दानिय्येल 9:20 दानिय्येल 9:21 दानिय्येल 9:22 दानिय्येल 9:23 दानिय्येल 9:24 दानिय्येल 9:25 दानिय्येल 9:26 दानिय्येल 9:27



दानिय्येल 9:19 के विपुल पाठ का परिचय और सार
परिप्रेक्ष्य की पहली झलक: यह दानिय्येल की प्रार्थना-याचना है, जो उद्धारक संदेश के पहले भाग, इब्रानी शास्त्रों के अनुसार समय-समय पर पवित्र परमेश्वर के सामने विनति की तरह उठती है। दानिय्येल ने अपने देश की दुर्दशा देख कर, प्रभु से कृपा, क्षमा और नये कदम उठाने की प्रार्थना की। वह जानता है कि परमेश्वर अपने नाम के विरुद्ध नहीं, बल्कि अपनी महिमा और अपने पात्र के अनुरूप पापों के प्रभाव को दूर कर सकता है।
यह पाठ परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
यह श्लोक तीन सत्यों को ऊँचाई देता है: (1) प्रभु सुनते हैं—हमें विश्वास है कि ईश्वर मौन नहीं रहते; (2) पाप क्षमा—ईश्वर करुणा-परम्परा से पाप को माफ कर सकता है; (3) क्रिया-निश्चय—जो करना है, वह समय पर और सही ढंग से होता है। दानिय्येल की प्रार्थना में उद्धार और फिर से लौटने की आशा स्पष्ट है, जिससे दिखता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए योजना बनाते रहते हैं और वे उसकी कृपा पर भरोसा कर सकते हैं।
शब्दों और तसवीरों की स्पष्ट समझ
संबंधित आयतें और उनके संकेत
– आकाशीय दया और क्षमा की सिंहावलोकन से जुड़ी अन्य बातें: दानिय्येल 9 के आगे और पीछे के भागों में पक्ष-निष्कर्ष और भविष्यवाणी का विहंगम चित्र मिलता है कि परमेश्वर के ईरादे समय पर पूरे होते हैं—जहाँ क्षमा से जीवन और देश की पुनर्स्थापना संभव होती है।
– अन्य संदर्भ जिनसे विश्वास की यह धारा मजबूत होती है: 約 1:9 (यूहन्ना 1:9) कि यदि हम पाप के बारे में सचेत रहें तो हमारा उद्धारकर्ता हमें शुद्ध करता है; यशायाह 44:22-23 में उद्धार की स्मृति से परमेश्वर की पवित्रता उजागर होती है।
प्रेमयोग और आज के लिए अनुप्रयोग
आज के पाठ से सीख: जब हम गलतियों के एहसास के साथ परमेश्वर के सामने नम्र हों, तो वह क्षमा की राह खोलता है और हमें अपने नाम के लिए बुलाए देश-समुदाय के साथ पुनः एकीकृत करता है। यह याद दिलाता है कि प्रार्थना बिना प्रयत्न के नहीं, बल्कि स्पष्ट कर्म-निर्देशन और निर्भरता के साथ होनी चाहिए।
पूर्व-चाल–संक्षिप्त समरी
दानिय्येल 9:19 एक दृढ़ विश्वास का नारा है: सुनो प्रभु, क्षमा कर, और जो किया जाना है, उसे समय पर करो—ताकि तेरे नाम के कारण तेरी प्रजा फिर से जीवित हो और तेरे नगर की महिमा बनी रहे।
सूचनात्मक पंक्तियाँ (सरल darunter)
cross-reference 1: परमेश्वर सुनते हैं—यह विश्वास दिलाता है कि प्रार्थना प्रभावी है।
cross-reference 2: पाप की क्षमा—ईश्वर की करुणा से जीवन परिवर्तन संभव है।
cross-reference 3: नगर और प्रजा—समुदायिक पुनर्स्थापन की आशा रही है, जो परमेश्वर के नाम पर निर्भर है।
इन विचारों को एक साथ रखकर, यह पाठ एक समृद्ध प्रार्थना-आधार देता है जिसमें ईश्वर की करुणा, धार्मिक आचरण और समुदायिक पुनर्स्थापन की आशा एक साथ सुनाई देती है.