Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 9:1 दानिय्येल 9:2 दानिय्येल 9:3 दानिय्येल 9:4 दानिय्येल 9:5 दानिय्येल 9:6 दानिय्येल 9:7 दानिय्येल 9:8 दानिय्येल 9:9 दानिय्येल 9:10 दानिय्येल 9:11 दानिय्येल 9:12 दानिय्येल 9:13 दानिय्येल 9:14 दानिय्येल 9:15 दानिय्येल 9:16 दानिय्येल 9:17 दानिय्येल 9:18 दानिय्येल 9:19 दानिय्येल 9:20 दानिय्येल 9:21 दानिय्येल 9:22 दानिय्येल 9:23 दानिय्येल 9:24 दानिय्येल 9:25 दानिय्येल 9:26 दानिय्येल 9:27



दानिय्येल 9:23 पर टिप्पणी — विनती से प्राप्त दर्शन की राह
मुख्य बिंदु: यह वचन दर्शाता है कि गिड़गिड़ाहट के समय देवदूतों का संदेश तुरंत उद्घाटित होता है; परमेश्वर के प्रेमजनित आह्वान पर स्वयं प्रभु योजना और दर्शन खोलते हैं, जो दानिय्येल के लिए अति प्रिय होने के कारण प्रकट किया गया।
पाठ-संदर्भ: साहित्यिक संदर्भ के भीतर
दानिय्येल 9:23 में संकेत है कि दानिय्येल के लिए प्रेमपूर्ण बुलाहट है, और यह संदेश उसी समय निकलता है जब वह विनती कर रहा था। इस अध्याय की पृष्ठभूमि यह है कि दानिय्येल को יהוה की योजना और युग-निर्णय के बारे में सप्तरंग बातें दिखाई गईं—परन्तु शुरू में यह विवरण प्रकट नहीं होते; दानिय्येल के रोष और विनय के साथ उसका आह्वान ईश्वर के शासन के भीतर एक खास पहुँच बनाता है।
ऐतिहासिक-धार्मिक महत्व (थीअोलॉजिकल significance)
यहाँ स्पष्ट होता है कि प्रार्थना परमेश्वर के पुरालेखीय कार्यक्रम को गति देती है। दानिय्येल की विनती और ईश्वर की आज्ञा-निष्कर्ष एक साथ आते हैं क्योंकि दत्तक पुत्र के रूप में ईश्वर अपने दर्शन खोलता है। यह अध्याय प्रकट करता है कि अंत समय के विनिर्देशों के पीछे मानव-प्रार्थना एक केंद्रीय कारक है, जो दिव्य योजना को दिशा देता है।
पवित्रशास्त्र में अन्य संदर्भों से कनेक्शन
कन्सेप्ट: prayer initiates divine disclosure; divine decree follows prayer and predestined purpose unfolds.
धार्मिक-चिन्ह और दर्शन
दानिय्येल को यह संदेश मिला क्योंकि वह ईश्वर के सामने ‘आदि प्रिय’ बना रहा—यानी उसकी प्रार्थनाएँ और उसके मन की धारणा ईश्वर के प्रेम से सम्बद्ध हैं। यह दर्शन यह बताता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ नर्म-गंभीर तरीके से संवाद स्थापित करता है, और दिल की विनय उसे अंततः योजना के पन्नों तक पहुँचाती है।
प्रश्न-पर-मनन
संक्षिप्त निष्कर्ष
दानिय्येल 9:23 बताता है कि प्रार्थना ईश्वर के प्रेमभरे योजनाओं को खोलती है और दर्शन के द्वार खुलते हैं—जबकि दानिय्येल जैसी विश्वसनीयता और विनयी हृदय से भी यह संभव होता है। यह संदेश हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने समय पर प्रार्थना के साथ उनका दर्शन माँगें, ताकि ईश्वर की योजना स्पष्ट हो सके।
शब्द-चर्च (उद्धृत स्रोतों के संक्षेप संदर्भ)
यदि आप चाहें तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के समान विचारों से कुछ बिंदु मिलेंगे जिनमें प्रभु के दर्शन के खुले होने की धारणा और विनम्र प्रार्थना के प्रभाव पर प्रकाश डाला गया है; नीचे के बयान इन धारणाओं के अनुरूप छोटे उद्धरणों की मिसाल बनते हैं:
उल्लेख: “Prayers lay hold on the mercy-seat and God’s purposes unfold.” (एउण्ड़ा सार)