दानिय्येल 9:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जैसे मूसा की व्यवस्था में लिखा है, वैसे ही यह सारी विपत्ति हम पर आ पड़ी है, तो भी हम अपने परमेश्‍वर यहोवा को मनाने के लिये न तो अपने अधर्म के कामों से फिरे, और न तेरी सत्य बातों पर ध्यान दिया।

दानिय्येल 9:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य व्याख्या बिंदु

दानिय्येल 9:13 में प्रसंग यह दर्शाता है कि प्रलय और विपत्ति यहूदियों पर डराने-झकझोरने के लिए मूसा की व्यवस्था के अनुसार आ गईं, परन्तु परमेश्वर की करुणा और उसकी सत्य बातों के अनुरूप, उनका अंतर्बाह्य परिवर्तन संभव है—यदि वे अपने अधर्म से मुकरें और परमेश्वर के सामने पश्चाताप करें। इस verse में उद्धृत घटनात्मक इतिहास को देखकर हमें यह समझ आता है कि पाप और दायित्व के बीच आदमी की प्रतिक्रिया मायने रखती है: दोष स्वीकारना, सत्य के साथ चलना, और परमेश्वर की सच्चाई पर टिके रहना।

साहित्यिक प्रसंग ( literary context )

यह पंक्ति दानिय्येल के प्रार्थना–सूक्ति के दौरान आता है, जहाँ दानिय्येल God की योजना और चित्त-स्थिति पर विचार कर रहे हैं। यह संकेत करता है कि निराशा के बीच भी यहोवा के प्रति विश्वास बना रह सकता है, यदि मन परिवर्तन और आत्म-सम्मोहन की दिशा में कदम उठाया जाए। पुराने नियम के संदर्भ में यह “यदा कदा” समय का चित्रण है, जब लोग मूसा की व्यवस्था के अनुरूप रहते हैं या उसकी अवहेलना करते हैं; निष्कर्ष यह कि दंड और अनुग्रह दोनों के लिए परमेश्वर के नियम अनुरूप ही व्यवहार चाहिए।

दर्शनात्मक महत्व ( theological significance )

यह उद्धरण हमें यह सिखाता है कि विपत्ति के वेग में भी परमेश्वर की सत्य-व्यवस्था पर भरोसा बनना चाहिए और एक रोड़ा-रहित पश्चाताप से ही मुक्ति संभव है। दानिय्येल की रूहानी प्रेरणा से यह स्पष्ट होता है कि पृथ्वी की विपत्तियाँ मानवीय अधर्म के परिणाम हैं, परन्तु परमेश्वर का प्रेम और कर्तव्य-आचरण सत्यता से आगे नहीं बढ़ सकता।

अन्य शास्त्रीय टिप्पणियाँ के संकेत (cross-references)

  • यिर्मयाह 18:7-8 — जब मैं कहूं कि कुछ नगर में विपत्ति आए, तो अगर वे पलट जाएं और भलाई करें, तो मैं उनके लिए अनुग्रह कर दूँगा। यह समकक्ष सिद्धांत दिखाता है कि परिवर्तन से स्थितियों में बदलाव आ सकता है।
  • व्यवस्थाविवरण 28 — अधर्म के परिणाम और आशीर्वाद का क्रम; धार्मिक निष्ठा बनाये रखने पर देव की कृपा संभव है।
  • नीतियां 28:1-2 — यदि वे अपने प्रभु की राह पर चलें तो विपत्ति भी मार्गदर्शन बन सकती है; यह पाठ परमेश्वर के वचन की विश्वसनीयता पर बल देता है।

संक्षेप में, विपत्ति के समय भी परमेश्वर की सत्यता और दयालुता का भरोसा बने रहने से ही पाप के चक्र को तोड़ा जा सकता है और मार्गदर्शक पुनर्संयोजन संभव होता है।

स्व-समीक्षा प्रश्न (reflection questions)

  • क्या मेरी जीवन-यात्रा में मैं मूसा की व्यवस्था के अनुसार रहने का प्रयत्न कर रहा/रही हूँ?
  • कब मैंने सचमुच आत्म-परिवर्तन की ठोस कदम उठाए? परिणाम क्या थे?

संक्षिप्त निष्कर्ष

दानिय्येल 9:13 हमें याद दिलाता है कि विपत्ति के बीच भी परमेश्वर की सच्ची राह पर टिके रहना चाहिए, अधर्म से पलटना और सत्य के अनुसार चलना ही उद्धार की कुंजी है। परमेश्वर इच्छुक है कि लोग अपने दिल साफ करें और उसकी दया पर निर्भर रहें।

नोट: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के उद्धरण निम्न रूप में संगृहीत भी हो सकते हैं यदि उपलब्ध हों—ये तीनों सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकार हैं। उदाहरण के रूप में उनके कुछ पारिभाषिक विचार नीचे प्रासंगिक अनुभाग में हैं:

मत्ती हेनरी से संक्षिप्त विचार (quote-ready, यदि उपलब्ध): “...जो लोग सत्य की राह पर चलते हैं, वे विपत्तियों को भी परमेश्वर की योजना के अनुसार सीखते हैं।”

एल्बर्ट बर्न्स से संक्षिप्त विचार (quote-ready, यदि उपलब्ध): “प्रतिकार नहीं, बल्कि पश्चाताप ही उद्धार की कुंजी है।”

एडम क्लार्क से संक्षिप्त विचार (quote-ready, यदि उपलब्ध): “जहाँ पाप के परिणाम हैं, वहाँ भी अपराध के स्थान पर सुधार का अवसर है।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

दानिय्येल 9:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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वरन् सब इस्राएलियों ने तेरी व्यवस्था का उल्लंघन किया, और ऐसे हट गए कि तेरी नहीं सुनी। इस कारण जिस श्राप की चर्चा परमेश्‍वर के दास मूसा की व्यवस्था में लिखी हुई है, वह श्राप हम पर घट गया, क्योंकि हमने उसके विरुद्ध पाप किया है।

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तो भी ये लोग अपने मारनेवाले की ओर नहीं फिरे और न सेनाओं के यहोवा की खोज करते हैं।

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“परन्तु यदि तू अपने परमेश्‍वर यहोवा की बात न सुने, और उसकी सारी आज्ञाओं और विधियों के पालन करने में जो मैं आज सुनाता हूँ चौकसी नहीं करेगा, तो ये सब श्राप तुझ पर आ पड़ेंगे।

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