Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 9:1 दानिय्येल 9:2 दानिय्येल 9:3 दानिय्येल 9:4 दानिय्येल 9:5 दानिय्येल 9:6 दानिय्येल 9:7 दानिय्येल 9:8 दानिय्येल 9:9 दानिय्येल 9:10 दानिय्येल 9:11 दानिय्येल 9:12 दानिय्येल 9:13 दानिय्येल 9:14 दानिय्येल 9:15 दानिय्येल 9:16 दानिय्येल 9:17 दानिय्येल 9:18 दानिय्येल 9:19 दानिय्येल 9:20 दानिय्येल 9:21 दानिय्येल 9:22 दानिय्येल 9:23 दानिय्येल 9:24 दानिय्येल 9:25 दानिय्येल 9:26 दानिय्येल 9:27



दानिय्येल 9:26 का पाठ—स्थापित संदर्भ और उसकी व्याख्या
यह वाक्यदानिय्येल के 9वें अध्याय के बिंदु-निर्धारण से जुड़ा है, जहां भविष्यवाणी के क्रम में Messiah के आना और उसका उद्धार-कार्य चिन्हित किया गया है। पाठ बताता है कि अभिषिक्त पुरुष की मृत्यु कैसे घटित होगी और इसके बाद सत्ताधारी प्रधान और नगर-प्रजा के क्रिया-कलाप कैसे चलेंगे। यह खंड दो चरणों में घटित घटना दिखाता है: 1) अभिषिक्त का मोहित और काटे जाना; 2) प्रत्यक्ष प्रभाव के रूप में नगर और पवित्रस्थानों का नाश, परन्तु अंत में प्रधान का भाग्य और संघर्ष जारी रहेगा।
सूचक शब्द और imagery
ग्रंथीय संदर्भ और उनके अर्थ
यह उपजीविका दानिय्येल की भविष्यवाणी में “समय-सारिणी” का हिस्सा है—मसीह के आने के पहले और उसके बाद की घटनाओं का क्रम स्पष्ट किया गया है। मुख्यमुख्य बिंदु यह है कि दानिय्येल का संकेतित समय-चक्र समाप्त होते-होते, अभिषिक्त के साथ जुड़ी विपदा आयेगी, फिर नगर-प्रजा को नुकसान पहुँचेगा, परन्तु अंततः परमेश्वर की योजनाओं के अनुसार संघर्ष और उद्धार क्रमबद्ध रहेगा।
प्रमुख उद्धरण-आधारित प्रेरणा (डायरेक्ट कोटेशन के लिए संदर्भित स्रोतों के छोटेExcerpt)*
जहाँ आवश्यक हो, नीचे प्रसिद्ध पवित्र-टीका-कारकों के विचारों के साथ संकल्पना मिलती है, परंतु पूर्ण टेक्स्ट उद्धृत नहीं किया गया है। यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट संक्षिप्त कथनों के छोटे उद्धरण चाहते हैं, वह केवल अगर उपलब्ध हों तो ही प्रस्तुत किए जाएँगे।
सम्भावित cross-refs (संक्षिप्त उल्लेख और तात्पर्य)
1) दानिय्येल 9:27 से संबंधित: अभिषिक्त के प्रदेश-बंधनों और अंत के समय का उल्लेख—यह स्पष्ट करता है कि उद्धार के मार्ग में पूरे समय-चक्र में अनगिनत घटनाक्रम होंगे।
2) मत्ती 24:15-22 के संदर्भ: पवित्रस्थलों के विरुद्ध आक्रमण और बुरे दिनों के समय के संकेत; यह पाठ भविष्यवाणी के ज्यादातर हिस्से को समकालीन इतिहास से अलग नहीं करता, बल्कि उसे पूर्ण रूप से दिखाता है।
3)पालन—यशायाह 9:6-7: अभिषिक्त के राज और शांति-युग का पूर्वाभास, जो दानिय्येल के संकेत के साथ पूरी तस्वीर प्रस्तुत करता है कि उद्धार का क्रम परमेश्वर की योजना के अनुरूप है।
आज के पाठ-प्रयोग (व्यावहारिक निष्कर्ष)
1) परमेश्वर के विवेक पर भरोसा रखें: समय-चक्र कठिन और स्पष्ट है, पर वह सत्ता-नियंत्रण करता है।
2) संकट के बीच धारणाएं ����—नगर-प्रजा के विरुद्ध आने वाले संकटों में भी परमेश्वर के उद्धार-कार्य का विश्वास बनाए रखें।
3) आस्था-जीवन में स्थिरता: कठिन समय के बीच भी अंततः ईश्वर की योजना का पालन, और प्रतिकूलताओं के बाद भी संघर्ष जारी रहता है—उद्धार की दिशा में यह क्रम चलता है।
संक्षिप्त संरचना
- पाठ का सेटिंग: अभिषिक्त के समय-चक्र की पूर्वघटना
- ईश्वर के विश्वास और निश्चय: समय-चक्र और उद्धार-योजना
- शब्दार्थ चित्रण: अभिषिक्त, नगर, पवित्रस्थान, बाढ़
- क्रॉस-रेफरेंस और अनुप्रयोग: वर्तमान विश्वास जीवन में आशा-उत्साह
नोट: ऊपर का संक्षेप हर प्रकार की चर्चात्मक धारणाओं को समाहित कर एक सौम्य, विद्वत्तापूर्ण परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करता है। अगर आप चाहें तो मैं Matthew Henry, Albert Barnes अथवा Adam Clarke के वास्तविक छोटे उद्धरण जोड़कर पाठ-उत्पादन को और अधिक विशिष्ट बना दूँ।