दानिय्येल 9:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इस कारण यहोवा ने सोच विचार कर हम पर विपत्ति डाली है; क्योंकि हमारा परमेश्‍वर यहोवा जितने काम करता है उन सभी में धर्मी ठहरता है*; परन्तु हमने उसकी नहीं सुनी।

दानिय्येल 9:14 पद-दर-पद बाइबल टीका

दानिय्येल 9:14 पर टिप्पणी

पद का संधर्व: दानिय्येल 9 अध्याय में प्रायः मसीह के आने से ठीक पहले की कविता-सी अवधि का संदर्भ मिलता है, जब यहोवा अपने लोगों के लिए दया और दंड के बीच निर्णय ले रहा है। यहाँ कहा गया है कि यहोवा ने ज्ञानपूर्वक परेशानी पैदा की है, ताकि धर्मी ठहरें और साथ ही यह भी स्पष्ट हो कि हमने उसकी स्तुति और वचन के पालन में चूक की है। इस संदर्भ में वाक्य एक उत्तरदायित्व-भरे पश्चाताप और ईश्वर की न्यायपूर्ण शासन की पुष्टि है।

मुख्य विचार

इस verse में दो प्रमुख धाराएँ स्पष्ट हैं: (1) परमेश्वर की धर्मी शासन और कार्य-धर्म; (2) मानवके दोष और उसकी ओर लौटने की आवश्यकता। यह दर्शाता है कि उद्धार के इतिहास में विपत्ति कभी बिना उद्देश्य के नहीं आती; वह पाप के परिणामों को प्रतिफलित करती है ताकि लोग सचेत हों और Jehovah के साथ संबंध पुनः स्थापित करें।

तीन प्रमुख विषय

  • धर्मी ईश्वर की ठहरानी: “यहोवा जितने काम करता है उनमें धर्मी ठहरता है”—ईश्वर की व्यवस्था और न्याय पर अडिग विश्वास।
  • पश्चाताप का आग्रह: “परन्तु हमने उसकी नहीं सुनी”—मानव की जिम्मेदारी और ईश्वर की करुणा के बीच का संतुलन।
  • विकल्प और प्रतिफल: विपत्ति के पीछे ईश्वर का उद्देश्य—मनुष्यों को सचेत करना और उनके धर्मिक-जीवन को पुनः व्यवस्थित करना।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में) एवं उनसे जुड़ी समझ

1) निर्भरता और पश्चाताप: अन्य ग्रंथों में भी पाप के कारण दुःख आता है ताकि मनुष्य ईश्वर की ओर लौटे (यशायाह/यिर्मयाह के कुछ भाग देखें) - यह Verse समाधान के लिए एक संकेत देता है कि दंड और उद्धार एक साथ चलते हैं।

2) ईश्वर की नम्रता और उद्धार: धर्मी ठहरना—यह केवल मानवीय आचरण नहीं, बल्कि परमेश्वर के करुणा-परक शासन की पुष्टि है, जिससे उद्धार का मार्ग खुलता है।

3) पश्चाताप और पुनःस्थापना: जब मानव सचेत होकर ईश्वर के आदेशों को स्वीकारे, तब उद्धार का मार्ग साफ होता है और भीतर की धरोहर–आशीर्वाद लौट आता है।

व्यावहारिक विचार

- कठिन समय में भी अपना नजरिया बदलिए: दयालु परमेश्वर की दृष्टि में धर्मी रहने की कोशिश करें और पवित्र वचन की सूचित राह पर चलें।

- आत्म-निश्छलता विकसित करें: स्वयं की कमजोरियों का ईमानदारी से सत्यापन करें और पश्चातापपूर्ण-prayer से परिवर्तन की ओर बढ़ें।

संक्षिप्त निष्कर्ष

यहोवा के धर्म-संरक्षण और नीति की शब्दावली में यह वचन बताता है कि विपत्ति भी ईश्वर के न्यायपूर्ण कदमों का हिस्सा है जो धर्मियों को अधिक दृढ़ बनाते हैं और मानव को उनके रिश्ते में ईश्वर के प्रति अधिक सचेत बनाते हैं। हमारी जिम्मेदारी है—उसकी सुनी और पालन करने की।

पठन-संदर्भ

1) दानिय्येल 9–12 की विस्तृत महिमा और पश्चाताप की प्रक्रिया; 2) यिर्मयाह और येशा में ईश्वर के शास्त्रीय न्याय के साथ दया का समन्वय; 3) नीतिवचन में ज्ञान और विवेक के मार्गदर्शन के लिए संकेत।

उद्धृत स्रोत-धारा: मॉडर्न-यूनीफाइड पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायस्टी टिप्पणियों से समेकित विचारों का सम्मिलन किया गया है; इनमें से यदि शुद्ध शब्द-उद्धरण मिला हो तो वही दिया गया है—उद्धरण चिन्हित कर दिए जाते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

दानिय्येल 9:14 समानांतर पद और संबंधित वचन

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दानिय्येल 9:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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हे प्रभु, तू धर्मी है, परन्तु हम लोगों को आज के दिन लज्जित होना पड़ता है, अर्थात् यरूशलेम के निवासी आदि सब यहूदी, क्या समीप क्या दूर के सब इस्राएली लोग जिन्हें तूने उस विश्वासघात के कारण जो उन्होंने तेरे साथ किया था, देश-देश में तितर-बितर कर दिया है, उन सभी को लज्जित होना पड़ता है।

नहेम्याह 9:33 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नहेम्याह 9:33 (HINIRV) »
तो भी जो कुछ हम पर बीता है उसके विषय तू तो धर्मी है; तूने तो सच्चाई से काम किया है, परन्तु हमने दुष्टता की है।

यिर्मयाह 44:27 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 44:27 (HINIRV) »
सुनो, अब मैं उनकी भलाई नहीं, हानि ही की चिन्ता करूँगा*; मिस्र देश में रहनेवाले सब यहूदी, तलवार और अकाल के द्वारा मिटकर नाश हो जाएँगे जब तक कि उनका सर्वनाश न हो जाए।

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