दानिय्येल 9:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वरन् सब इस्राएलियों ने तेरी व्यवस्था का उल्लंघन किया, और ऐसे हट गए कि तेरी नहीं सुनी। इस कारण जिस श्राप की चर्चा परमेश्‍वर के दास मूसा की व्यवस्था में लिखी हुई है, वह श्राप हम पर घट गया, क्योंकि हमने उसके विरुद्ध पाप किया है।

दानिय्येल 9:11 पद-दर-पद बाइबल टीका

दायनियेल 9:11 का अर्थ

संक्षिप्त अर्थ: इस आयत में कहा गया है कि इस्राएलियों ने परमेश्वर की व्यवस्था की अवहेलना की, उसने उनकी दिशा से दूरी बना ली और इसलिए वे श्राप की स्थिति में चले गए जो मूसा की व्यवस्था में लिखी गई थी; अर्थात् पाप के कारण उनसे आशीषें हट गईं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

दानियेल 9 का संदर्भ बाबुल की captivity के बाद का है, जब दानियेल दिव्य भविष्यवाणी और प्रार्थना के बीच का संघर्ष देखते हैं। प्रभु के प्रति विश्वासघात, उल्लंघन और अनुग्रह की कमी से यहूदी समाज संकट में था। इस जगह लेखक यह स्पष्ट करता है कि उनके पापों के कारण परमेश्वर की व्यवस्था के अनुरूप उनसे वरदान और सुरक्षा हट गई। यह अध्याय भविष्यवाणी के द्वारा यह दिखाता है कि परमेश्वर के समर्पण-योग्य नियमों के उल्लंघन से दंड आता है, किन्तु प्रभु की दयालुता और अवसर-समय भी मिलता है।

interpretive observations

  • ईश्वर की व्यवस्था के उल्लंघन से परिणाम स्पष्ट हैं—जो लोग उनके होश में रहते हैं वही आशीष पाते हैं; जिसने कुल मिलाकर पाप किया, उसे श्राप हो सकता है।
  • दानियेल की-prayerful temperament: वे पाप की गहराई को समझते हैं और परमेश्वर के लिए क्षमा की मांग करते हैं—यह प्रतिरचना दर्शाती है कि प्रार्थना और पश्चात्ता से ही स्थिति में सुधार संभव है।
  • संदेश: परमेश्वर की नीति-नियम केवल दण्ड नहीं हैं, बल्कि उद्धार और restitutive कृपा के मार्ग भी हैं, जब लोग सच्चे दिल से लौटते हैं।

छोटा थिमैटिक सूची

  1. पाप की अवस्था बनाम पश्चात्ता का अवसर
  2. धार्मिक व्यवस्था की महत्ता और समुदाय की भूमिका
  3. कृतज्ञता-समर्पण से पुनः आशीष

अनुचित उद्धरण-योग्य टिप्पणी स्रोत (पब्लिक डोमेन)

यद्यपि इस पंक्ति में मुक्ति-आवाहन या विवरण मूल पाठ से भी जुड़ा है, किन्तु पुराने टिप्पणीकारों में मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क ने इसी प्रकार के बिंदुओं पर तर्क प्रस्तुत किए हैं—ध्यान रहे कि नीचे केवल उनके विचारों के संक्षिप्त, संदर्भ-समरूप उद्धरण दिए गए हैं:

• मैथ्यू हेनरी: “हम जानते हैं कि परमेश्वर के आशीष अवरोधित हो जाते हैं जब लोग उसकी व्यवस्था से विमुख रहते हैं।”

• अल्बर्ट बार्न्स: “पाप का परिणाम सामूहिक स्तर पर आता है; समाज की धारा उसी के अनुसार गतिशील होती है।”

• एडम क्लार्क: “प्रवृत्ति में परिवर्तन के बिना दया नहीं मिलती; परन्तु यदि हम टूटकर लौटें, तो दयालुता पुनः स्थिर हो सकती है।”

बहुत संक्षेप में cross-references

– यहू 5:14 (व्यक्तिगत पाप पर समुदायिक प्रभाव) के साथ विचार करें: पाप से दूरी और सत्य के लौटने के बीच संतुलन।

– मत्ती 3:2/11:27-28 (प्रभु के Kingdom के साथ क्षमा और परिवर्तन) के साथ जोड़ा जा सकता है: उद्धार और पश्चात्ताप का महत्व।

– दानियेल 9:27 के संदर्भ में भविष्यवाणी का क्रिया-प्रता: औपचारिक नियमों के उल्लंघन के बावजूद दया और माफी का मार्ग खुला रहता है।

संक्षिप्त व्यावहारिक takeaway

हम जानते हैं कि संसार में पाप के परिणाम होते हैं, परन्तु परमेश्वर की वचन-येनार्थ लौटना और प्रार्थना से सहायता मांगना न केवल स्थिति सुधार सकता है, बल्कि समुदाय के लिए भी नई आशा खोल सकता है। व्यक्ति और समाज दोनों को आत्म-परिष्कार के लिए समर्पित रहना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

दानिय्येल 9:11 समानांतर पद और संबंधित वचन

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