यिर्मयाह 8:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जब कोई भटक जाता है तो क्या वह लौट नहीं आता? फिर क्या कारण है कि ये यरूशलेमी सदा दूर ही दूर भटकते जाते हैं? ये छल नहीं छोड़ते, और फिर लौटने से इन्कार करते हैं।

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यिर्मयाह 8:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 8:5 — तत्काल संदर्भ और स्पष्टता

यिर्मयह का यह पद बैतल की रोथी जैसी निष्ठा से भरा नहीं है, बल्कि उसके भीतर एक तीखी पुकार है: जब मनुष्य पूरी तरह से भटकता है, तो क्या वह लौट नहीं आता? भविष्यवाणी राज्य के विरह-हृदय को दर्शाती है कि इसतथाimestep दूर-डोर, बनती-बनती, यह्रूशलेम की लोगन जब गलत रास्ते पर चलते हैं, तो वे अपने पथ से वापस लौटना नहीं चाहते। यहाँ परमेश्वर की चिंता, पथभ्रष्टता के परिणाम और प्रेम-युक्त आह्वान एक साथ उभरते हैं।

ईश्वर की याददारी और विश्वास की चुनौती

पद इस बात को उजागर करता है कि परमेश्वर संतप्त और धैर्यवान होते हुए भी, जब insanlar अपनी राह से टकराते हैं और बहकते हैं, तो वे फिर लौटना नहीं चाहते। यह शोकपूर्ण स्थिति यह साबित करती है कि पाप की लगाम ढीली पड़ जाए तो मानव मन स्थिर नहीं रहता; वे उस रास्ते पर चले जाते हैं जो उनके लिए विनाशकारी हो सकता है। इसी में एकाधिकदा यह बात मिलती है कि परमेश्वर न्याय के साथ भी कृपा और करुणा को खुला रखते हैं, ताकि पुनः लौटने के अवसर बनें।

महत्वपूर्ण शब्दों का सरल मार्गदर्शन

  • भटकना– दृष्कोणीय मार्ग से विचलन। यहाँ मतलब व्यावहारिक रूप से व्यवहारिक अवसाद या असाढक निर्णयों से जीवन-मार्ग से दूर जाना है।
  • लौटना– आध्यात्मिक फिर-आना, परमेश्वर के साथ व्यवहारिक संगति को पुनः प्राप्त करना।
  • येरूशलेम– न्याय, स्थिति और दायित्व के प्रतीक के रूप में; यहाँ उसकी स्थिति में तिरस्कार और जवाबदेही का प्रश्न उठता है।

कथा-गहन संदर्भ और अन्य भागों के संकेत

यह पाठ यिर्मयाह की पुस्तक में एक सामान्य संदेश के अंतर्गत आता है कि परमेश्वर के सामने पाप का परिणाम कितनी गहरी है, परन्तु भागीदारी-आह्वान भी बचा लेने की आशा देता है। इससे मिलती-जुलती चेतावनियाँ पूर्व वादों के भीतर भी मिलती हैं कि प्रभु लौटने के लिए खुला है और जो पाप से पलटकर उसके पास लौटते हैं, उनके लिए मोक्ष के मार्ग बनते हैं।

अन्य प्रचलित टिप्पणीकारों के संकेत (संक्षेप)

Matthew Henry और Albert Barnes ने यह विचार प्रस्तुत किया है कि जब लोग अपने रास्ते से भटकते हैं, तब न्याय के साथ कृपा भी एक आकर्षण बनकर रहता है; पुनः लौटना संभव है यदि वे अपने दिल की कठोरता को हटा दें। Adam Clarke यह रेखांकित करते हैं कि यह नसीहत सामाजिक और धार्मिक स्तर पर दोनों जगह लागू है—व्यक्ति के आचरण से लेकर सामूहिक व्यवहार तक।

पूरक क्रॉस-रेफरेंसे

  • यिर्मयाह 3:22 — वापसी की संभावना और नवीकरण का आह्वान; प्रयत्नों में God-ward लौटना संभव है।
  • याजकेल 18:21-22 — प्रत्येक के कर्म के अनुसार निर्णय और उद्धार का मार्ग, पुनः लौटना संभव है।
  • यहोशू 24:15 — लेकिन यदि छोड़ना चाहो तो भी सितकारियों से विपरीत आस्था नहीं बनती; परन्तु लौटना और दत्तक बनना संभव है।

आज के लिए उपयोगी समाधान

1) आत्म-स्वीकृति: अपनी भटकन का स्पष्ट आकलन करें—क्या आप सच में परमेश्वर के मार्ग से उतर रहे हैं? 2) पुनः समर्पण: समय लेकर दिल से परमेश्वर के आगे लौटने की ठोस प्रार्थना करें। 3) समुदाय साहचर्य: विश्वासी समुदाय के साथ ठहरना और मार्गदर्शन लेना। 4) व्यवहार में परिवर्तन: घृणा-भरण या बहाने छोड़ कर नियमित पवित्र-आचरण को अपनाने की ठोस योजना बनाएं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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तेरा निवास छल के बीच है; छल ही के कारण वे मेरा ज्ञान नहीं चाहते, यहोवा की यही वाणी है।

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हे यहोवा, क्या तेरी दृष्टि सच्चाई पर नहीं है?* तूने उनको दुःख दिया, परन्तु वे शोकित नहीं हुए; तूने उनको नाश किया, परन्तु उन्होंने ताड़ना से भी नहीं माना। उन्होंने अपना मन चट्टान से भी अधिक कठोर किया है; उन्होंने पश्चाताप करने से इन्कार किया है।

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परन्तु उन्होंने चित्त लगाना न चाहा, और हठ किया, और अपने कानों को बन्द कर लिया ताकि सुन न सके।

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