यिर्मयाह 8:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

मुझे अपने लोगों की चिल्लाहट दूर के देश से सुनाई देती है: “क्या यहोवा सिय्योन में नहीं हैं? क्या उसका राजा उसमें नहीं?” “उन्होंने क्यों मुझको अपनी खोदी हुई मूरतों और परदेश की व्यर्थ वस्तुओं के द्वारा क्यों क्रोध दिलाया है?”

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यिर्मयाह 8:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य बिंदु: यहोवा के विरह और चिल्लाहट में ईश्वर की उपस्थिति पर निर्भरता

यिर्मयाह 8:19 में शोकगीत का वाक्य यह दर्शाता है कि परमेश्वर के लोग अपने विरुद्ध फैली मृत्यु-भय और बुरे दिनों के बीच भी उसकी सामर्थ्य और उपस्थिति पर आश्रित हैं। भविष्यवक्ता Yahweh के भीतर और बाहर के आतंक के बीच उम्मीद ढूंढ़ते हैं, क्योंकि उनके धैर्य का स्रोत वही है जो सिय्योन की गूँज सुन रहा है: क्या यहोवा यहाँ सिय्योन में नहीं है? यह कहानि हमें यह स्मरण कराती है कि परमेश्वर की सत्ता और उत्तरदायित्व उसकी वास्तविक उपस्थिति से जुड़ी है, भले ही लोगों के मन में डर और निराशा कितनी भी गहरी क्यों न हो।

साहित्यिक संदर्भ (पाठ के संदर्भ में)

यह सन्देश यिर्मयाह के समय की विपत्ति-काल की है, जब इस्राइल-यूदाह के लोग अपनी मूर्तिपूजा और सिद्धांत-त्याग के कारण उखड़ चुके थे। प्रश्न “क्या यहोवा सिय्योन में नहीं हैं?” एक प्रकार का नैतिक और आध्यात्मिक जाँच है: परमेश्वर की उपस्थिति और राजसी अधिकार शरणस्थल के भीतर भी कायम रहते हैं, भले ही लोग भय और क्रोध के कारण उसे भूले हों। अन्य जगहों पर भी येरुशलेम की गवाही और उसकी दया के बारे में स्मरण दिलाने वाले संकेत मिलते हैं कि परमेश्वर निवास-स्रोत है, और उसकी खोज में ही शांति है।

धर्मशास्त्रीय महत्त्व

1) परमेश्वर की उपस्थिति: तड़ित-क्रोध के बीच भी वह मौज़ूद है; यह हमारे लिए एक आश्वासन है कि ईश्वर के निर्णय एक निर्बाध सत्ता के साथ होते हैं, जिन्हें क्रोध के क्षणों में भी पहचाना जा सकता है।

2) मूर्तिपूजा का आलोचनात्मक प्रश्न: “क्यों क्रोध?” का उत्तर यह कि खोदी हुई मूरतें और परदेशी वस्तुएं हमारे दिल के स्रोत से दूरी बनाती हैं। यह बताती है कि आंतरिक विश्वास-व्यवस्था सीधे ईश्वर के मंत्रालय से जुड़ी होती है।

3) राजा की उपस्थिति का संकेत: क्या उसका राजा उसमें नहीं? इसका तात्पर्य है कि परमेश्वर के राज्य-प्रबंधन की सत्यता और उसके निर्देशित शासन का प्रमाण वास्तविक सत्ता के भीतर है—यही विश्वास रक्षक है।

पूर्ववर्ती पवित्रशास्त्र से संबंध (cross-references)

  • यशायّा 45:22-24 — परमेश्वर के एकत्व और उद्धार के लिए आह्वान; यह दर्शाता है कि अन्य वस्तुओं से उद्धार संभव नहीं, केवल Yahweh ही है. यह संदर्भ इस पाठ के मूर्तिपूजा-विरोधी संदेश से जुड़ता है।
  • भजन 46:2-3 — परमेश्वर की सुरक्षा में भय-घटाने वाला आश्रय; विपत्ति में भी उसका निवास स्थान स्थिर रहता है।
  • यिर्मयाह 7:4-7 — इही मौके पर यहूदियों के भीतर ईश्वर के मंदिर-आस्थाओं के घटने की चेतावनी; सच्ची आराधना अंतर-हृदय में रहती है, न कि मूर्तियों में।

स्वरामक विचार (Reflection Questions)

  • क्या मेरी आस्था अभी भी प्रत्यक्ष ईश्वर के साथ एक जीवित संबंध के रूप में है, या मैं परदेशी वस्तुओं और व्यवहारों पर निर्भर हो गया हूँ?
  • क्रोध के समय मैं कैसे यहोवा के राज्य-प्रभाव को याद रख सकता/सकती हूँ?
  • क्या मैं अपने जीवन के कार्या-स्थलों में उन मूर्त-विचारों से मुक्त होकर ईश्वर की सच-उपस्थिति को प्रमुख मान रहा/रही हूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यिर्मयाह 8:19 हमें यह सिखाता है कि विपत्ति के बीच भी ईश्वर की उपस्थिति और राजा का अस्तित्व हमारी सुरक्षा का आधार हैं। मूर्तिपूजा और संसार-उपकृतियों का मोहजब भी बढ़े, परमेश्वर की सत्ता और उसकी सन्तुष्टि के साथ ही शांति मिलती है। यहोवा की सीरत, उसका राज्य और उसकी प्रिय प्रजा—इन तीनों के संगम में ही वास्तविक राहत पाया जा सकता है।

कथन-चिह्न (धार्मिक अनुभव पर आधार)

महँई: "क्यों क्रोध किया है?"—यहोवा के न्याय से पहले हमारा विवेक जगता है कि सच्ची पूजा क्या है।

एडम क्लार्क या मैथ्यू henry आदि के संकलन से: यह पाठ मूर्तिपूजा के विरुद्ध एक स्पष्ट सच बोलता है: परमेश्वर की उपस्थिति हर हाल में एक एकमात्र ठोस आश्रय है।

अनुमोदन के लिए उद्धृत स्वर: कोई पूर्ण उद्धरण इस पाठ से स्वतंत्र रूप में नहीं दया गया; यदि उपलब्ध हो, तो मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बर्न्स या एडम क्लार्क के संकलनों से कृत एक्विट उद्धरण सीधे उद्धृत होंगे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 8:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब यशायाह नबी ने हिजकिय्याह राजा के पास जाकर पूछा, “वे मनुष्य क्या कह गए, और वे कहाँ से तेरे पास आए थे?” हिजकिय्याह ने कहा, “वे तो दूर देश से अर्थात् बाबेल से मेरे पास आए थे।”

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वे दूर देश से, आकाश के छोर से आए हैं, हाँ, यहोवा अपने क्रोध के हथियारों समेत सारे देश को नाश करने के लिये आया है।

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“इफिसुस की कलीसिया के स्वर्गदूत को यह लिख: “जो सातों तारे अपने दाहिने हाथ में लिए हुए है, और सोने की सातों दीवटों के बीच में फिरता है, वह यह कहता है:

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