Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 9:1 दानिय्येल 9:2 दानिय्येल 9:3 दानिय्येल 9:4 दानिय्येल 9:5 दानिय्येल 9:6 दानिय्येल 9:7 दानिय्येल 9:8 दानिय्येल 9:9 दानिय्येल 9:10 दानिय्येल 9:11 दानिय्येल 9:12 दानिय्येल 9:13 दानिय्येल 9:14 दानिय्येल 9:15 दानिय्येल 9:16 दानिय्येल 9:17 दानिय्येल 9:18 दानिय्येल 9:19 दानिय्येल 9:20 दानिय्येल 9:21 दानिय्येल 9:22 दानिय्येल 9:23 दानिय्येल 9:24 दानिय्येल 9:25 दानिय्येल 9:26 दानिय्येल 9:27



दानिय्येल 9:15 — तत्काल संदर्भ और अर्थ
वचन का आरम्भिक पृष्ठभूमि: इस पद में दानिय्येल प्रार्थना करते हैं क्योंकि यह व्यवस्थाविधि के अनुसार समयकी विफलताओं के बाद बिशप और यहूदियों के सामूहिक दोषों को स्मरण कर भाग्य के लिए परमेश्वर से कृपा माँगते हैं। वे नबी-प्रकार के रूप में अपने लोगों के इतिहास को याद कर रहे हैं—जो मिस्र से निकासी के बड़े चमत्कार से शुरू हुआ—और परमेश्वर के महान नाम को याद करते हैं, जो “आज तक प्रसिद्ध” रहा है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से क्या संकेत मिलता है
यह पाठ दिखाता है कि परमेश्वर का महान और कर्तव्यनिष्ठ चरित्र अनुसार पहचाना जाता है: वह जो अपने लोगों को बुलाने, बचाने और उनकी दशा सुधारने के लिए शक्तिपूर्ण रूप से救 निकालता है। दानिय्येल मानते हैं कि परमेश्वर ने मिस्र से निकाल कर अपना नाम स्थापित किया है—यानी वह एक ऐसा ईश्वर है जो अपने लोगों के इतिहास के घटना-चिह्नों से अपने पवित्र नाम को सम्मानित करता है। इसके साथ वे स्वीकार करते हैं कि यहूदियों ने पाप किया है और दुष्टता की है; पर वे भरोसा दिखाते हैं कि परमेश्वर अपनी दया और चंगाई के लिए शब्दावली बनाये रखेंगे।
मुख्य शब्द और चित्रण की स्पष्ट व्याख्या
अनुसंगत संदेशन (Related Cross-References)
• निर्गमन 15 के महान उद्धार का स्मरण कराता है कि परमेश्वर अपने लोगों की विपत्ति में भी अपनी महिमा दिखाते हैं, और उनके नाम को महिमा मिलती है।
• 2 क्रांतियों 7:14-15 की तरह, जब लोग विनयपूर्वक_Call करते हैं, तब ईश्वर क्षमा और चंगाई देता है—उनके नाम के कारण नहीं, बल्कि उनकी दया के कारण।
• यहाँ के “पाप और दुष्टता” का बोध, हेब्रू 12:5-6 के दंड-प्रश्न से मिलता-जुलता है: परमेश्वर सुधार के लिए प्रेम-युक्त अनुशासन करते हैं ताकि लोग धर्मी बनें।
आज के संदर्भ में कितना लागू
- अपनी सामाजिक-आर्थिक या व्यक्तिगत असफलताओं के बावजूद, हम ईश्वर के महान नाम और उसकी शक्ति में स्थिर आशा रखें। उनके उद्धार के स्मृतिचिन्ह हमारे दैनिक जीवन में भी उद्धार का आह्वान बनते हैं।
- विनय और पश्चात्ताप की Haltung बनाए रखें: “हमने पाप किया है” कहकर ईश्वर के पास लौटना ही चंगाई की पहली सीढ़ी है।
एक संक्षिप्त समेकन
दानिय्येल 9:15 में एक पिता-वत्सल परमेश्वर के साथ एक युग-पुरोहित की नम्र प्रार्थना है—जहाँ मिस्र से निकासी के स्मरण के साथ परमेश्वर के नाम की महिमा और उसकी शक्ति पर भरोसा किया गया है। यह पाठ सिखाता है कि दोष स्वीकार कर विनम्रता से लौटना और परमेश्वर के चरित्र पर भरोसा करना ही सच्चे उद्धार का मार्ग है।
शब्द-योगदान (कोर्टेशन संकेत)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के स्पष्ट संक्षिप्त उद्धरण देखना चाहें, तो वे सामान्यतः इस प्रकार के पाठ में परमेश्वर की चंगाई और प्रेम की पुष्टि करते हैं—परंतु यहाँ का लेखन स्वतंत्र रूप से नया निर्माण है।