Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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क्यों यह Verse महत्वपूर्ण है
2 इतिहास 36:17 में वह समय दिखाया गया है जब यहोवा ने יהוים पर चढ़ाई करने वाले अधिकार-शासनियों के धाराप्रवाह क्रोध को अपने तरीके से पूरा किया। इस वचन के भीतर यह दर्शाया गया है कि प्रभु की न्याय और नियंत्रण स्पष्टStretch होती है: जिन लोगों ने प्रभु के चुने हुए लोगों पर अत्याचार किया, वे सब एक-एक करके दुष्कर्म के वेग से नष्ट किये गए। यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि प्रभु विश्व के राजाओं पर भी नियंत्रण रखता है और उनके निर्णयों के पीछे उसकी योजना रहती है। इसलिए बंधन, दमन और अन्याय के विरुद्ध परमेश्वर की न्याय-सिद्धि पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
पार्श्व-प्रस्तावना: मूल संदर्भ
यह इतिहास-ग्रंथों का काल ऐसा है जब कई राष्ट्र इशाई शासन के विरुद्ध उठे और यरुशलेम के बादशाह ने राज्य-युद्धों में भाग लिया। यहाँ कसदियों के राजा की चढ़ाई और उनके सैनिकों का विनाश जो पवित्र भवन—यानी त्रुटिहीनता के साथ यहोवा के घर में—किया गया, यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के विरुद्ध हो रहे अत्याचारों को कैसे रोकते हैं। यह बताता है कि पाप और दमन की शक्तियों पर परमेश्वर का न्यायकारी हाथ तना रहता है।
मुख्य संदेश
इस वचन का मूल संदेश यह है: परमेश्वर अपने लोक के साथ रहता है और वेतन-भुक्तान तब होता है जब अन्य अत्याचार करते हैं; प्रभु उन शक्तियों को भी नियंत्रित करता है जो उनके विरुद्ध उकसाती हैं। यह उक्ति यह भी दिखाती है कि परमेश्वर की करुणा और पवित्रता किसी भी अन्याय को सुरक्षित नहीं रहने देतीं—आखिरकार न्याय होता है और दया पथ पर सफलता मिलती है।
मुख्य विषय-संक्षेप
पवित्रशास्त्रिक संरचनात्मक क्रॉस-रेफरेंसे
कई बार पवित्रशास्त्र में परमेश्वर की न्याय-नियोजन को अन्य भागों में भी स्पष्ट किया गया है:
- न्याय के लिए परमेश्वर का नियम: इस प्रकार की घटनाएं बताती हैं कि दमन के विरुद्ध परमेश्वर का न्याय समय पर आता है।
- दया और न्याय का संयुक्त संदेश: यह घटना यह दिखाती है कि परमेश्वर न केवल दया दिखाते हैं, बल्कि अत्याचार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी करते हैं।
विधिवाक्यों के साथ संकलन
1) 2 राष्ट्रों के इतिहास में सत्ता-चेतना और परमेश्वर की योजना के अनुसार क्रिया-प्रतिक्रिया।
2) यहोवा के घर पर अत्याचार के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े होना और परमेश्वर की सुरक्षा।
3) समाज-निर्माण के लिए न्याय-संरचना का महत्व, जिसमें कमजोरों की रक्षा शीर्ष प्रायोरिटी रहती है।
गहरे मनन: एक devotional विचार
जो लोग अन्याय के विरुद्ध खड़े होते हैं, उनके लिए यह संदेश आश्वस्त करता है कि परमेश्वर इनकी रक्षा के लिए सक्रिय रहते हैं। दुखित और डरित मन भी परमेश्वर की साक्षी-नज़र से देखने पर निश्चल हो सकता है कि वह सत्ता की ठंडी आंधी में भी अपने लोगों को सुरक्षित और संबलित रखने को अनुभूत करते हैं। ऐसे समय में धीरज और प्रार्थना बनाये रखना चाहिए, क्योंकि प्रभु न्याय के समय पर प्रभावी क्रिया करते हैं।
सूक्ष्म उद्धरणों के संदर्भ
एमैथ्यू हैनरी, अल्बर्ट बर्न्स, एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरी-धर्मी टिप्पणीकारों के शब्द-उद्धरण इस पाठ के भीतर नीचे दिए गए हैं, परन्तु पूर्ण उद्धरण के बजाय उनके विचार का संक्षेप उपयोग किया गया है:
“...किसी भी दमन के सामने परमेश्वर की सत्ता अचल रहती है; वह अपने लोगों के लिए रक्षा-हाथ फैलाते हैं—यही न्याय का नियम है।”
संक्षिप्त उद्धरण नोट
अगर आवश्यक हो तो नीचे के विशिष्ट उद्धरणों का संक्षेप प्रयोग किया जा सकता है, किन्तु पूर्ण पाठ यहाँ नहीं दिया गया है:
यह पाठ प्रमुखतः यह सीख देता है कि परमेश्वर का नियंत्रण हर अत्याचार के पीछे है और समय आने पर न्याय होता है।