Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
नहेम्याह 9:1 नहेम्याह 9:2 नहेम्याह 9:3 नहेम्याह 9:4 नहेम्याह 9:5 नहेम्याह 9:6 नहेम्याह 9:7 नहेम्याह 9:8 नहेम्याह 9:9 नहेम्याह 9:10 नहेम्याह 9:11 नहेम्याह 9:12 नहेम्याह 9:13 नहेम्याह 9:14 नहेम्याह 9:15 नहेम्याह 9:16 नहेम्याह 9:17 नहेम्याह 9:18 नहेम्याह 9:19 नहेम्याह 9:20 नहेम्याह 9:21 नहेम्याह 9:22 नहेम्याह 9:23 नहेम्याह 9:24 नहेम्याह 9:25 नहेम्याह 9:26 नहेम्याह 9:27 नहेम्याह 9:28 नहेम्याह 9:29 नहेम्याह 9:30 नहेम्याह 9:31 नहेम्याह 9:32 नहेम्याह 9:33 नहेम्याह 9:34 नहेम्याह 9:35 नहेम्याह 9:36 नहेम्याह 9:37 नहेम्याह 9:38



मुख्य व्याख्या प्रवेश
नहेम्याह 9:30 में ईश्वर की दया-आंचल और मानव अवमानना दोनों एक साथ उभरती हैं। परमेश्वर ने बार-बार उनके साथ सहानुभूति दिखाई, उन्हें चेतावनियाँ दीं और नबियों के माध्यम से चिताने की कोशिश की; परन्तु उन्होंने उनके निर्देशों को ठुकरा दिया, वे कान नहीं लगाते थे। परिणामस्वरूप, यह कर्मकांड और अविचार का चक्र टूट नहीं पाया; अतः ईश्वर ने उन्हें देशों के हाथ में कर दिया। यह पद हमें—धर्म की कठोरता और ईश्वरीय धैर्य के संतुलन को—समझने में मदद देता है।
पाठ-वाचन पर ध्यानाकर्षण
यह आयत नेहेमीह-युग के अंत के संदर्भ में है, जब अधिकृत पवित्रता के बावजूद सत्ता और भक्ति के बीच समझौता नहीं हो पाया। नबियों के द्वारा चितावन स्पष्ट रूप से यह दर्शाती है कि ईश्वर सतर्क है और उसका धैर्य अंतहीन नहीं।
पाठिक संरचना और साहित्यिक संदर्भ
यह अनुभाग नहेम्याह के पुनर्निर्माण-युग के क्रम में आता है, जहाँ इतिहासक संदर्भ उजागर होता है: ईश्वर ने पिछली पीढ़ियों से जुड़े पापों के बावजूद लगातार उद्धार की योजना दिखाई। यहाँ “कहाँ तक सहन” का मर्म यह है कि पवित्रता-आचरण में असंगतियाँ कैसे सामाजिक-राजनैतिक प्रभाव डालती हैं।
केन्द्रीय theological संकेत
अन्य शास्त्रीय संदर्भ से संबंध
1) यह विचार मोयन के 'कहना' में मिलती-जुलती धारणा के साथ है कि ईश्वर की करुणा समय-समय पर पापियों के लिए परीक्षा बन जाती है।
2) यह विचार यिर्मयाह/यहोशू के इतिहास से जुड़ता है जिसमें विवेकहीन जवाबों पर प्रतिफल मिलता है।
3) परमेश्वर के दायित्व-प्रणालियों पर न्याय का आयाम डोमिनेट होता है—सकून भी तब तक जब तक परिवर्तन नहीं आता।
आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
नहेम्याह 9:30 यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की करुणा असीम है, परन्तु मानव की प्रतिक्रिया की अपनी सीमा है। चेतावनियाँ मिलती रहीं, परन्तु सुनवाई कमी रही, जिसके परिणामस्वरूप सत्ता-देश-हाथ का अनुशासन आया। यह शिक्षा हमें विश्वास की गहराई, नैतिक उत्तरदायित्व और परिवर्तन-योग्यता के महत्व की याद दिलाती है।
पूर्व-प्रस्तावित उद्धरण संदर्भ
अगर आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के विचारों को संदर्भित उद्धरण के रूप में देखना चाहें, तो वे इस प्रकार की धरोहर में होते हैं: प्रमुख-उद्धृत विचारों को संक्षेप में पाठ-उद्धरण के रूप में समाहित किया गया है, किन्तु पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है।
क्रॉस-रेफरेंस
कथा से जुड़े तीन क्रॉस-रेफरेंसेस—उद्धार, चेतावनी, और दंड—यह दर्शाते हैं कि परमेश्वर कभी भी अपने उद्देश्य से नहीं हटता: उदाहरण: पुराने नियम के न्याय-संहिता से जुड़े पाठ; नबियों के संदेशों के रूपांतरण; और भविष्य-प्रकाश में उद्धार की आशा।