Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 21:1 मत्ती 21:2 मत्ती 21:3 मत्ती 21:4 मत्ती 21:5 मत्ती 21:6 मत्ती 21:7 मत्ती 21:8 मत्ती 21:9 मत्ती 21:10 मत्ती 21:11 मत्ती 21:12 मत्ती 21:13 मत्ती 21:14 मत्ती 21:15 मत्ती 21:16 मत्ती 21:17 मत्ती 21:18 मत्ती 21:19 मत्ती 21:20 मत्ती 21:21 मत्ती 21:22 मत्ती 21:23 मत्ती 21:24 मत्ती 21:25 मत्ती 21:26 मत्ती 21:27 मत्ती 21:28 मत्ती 21:29 मत्ती 21:30 मत्ती 21:31 मत्ती 21:32 मत्ती 21:33 मत्ती 21:34 मत्ती 21:35 मत्ती 21:36 मत्ती 21:37 मत्ती 21:38 मत्ती 21:39 मत्ती 21:40 मत्ती 21:41 मत्ती 21:42 मत्ती 21:43 मत्ती 21:44 मत्ती 21:45 मत्ती 21:46



सीधे अर्थ का संक्षेप
यूँ कहा गया पाठ मानवीय निर्णय और कर्तव्य के बीच परमेश्वर की उचित योजना को दर्शाता है कि यदि पूछने पर हमें प्रभु के उद्देश्य के अनुरूप उत्तर देना हो, तो हमें ऐसा ही बोलना चाहिए। यहाँ संकेत है कि प्रभु के कार्यक्रम क्या हैं, यह पूर्व निर्धारित है, और उनका इरादा अक्सर देहाती स्वागत-नियत से श्रेष्ठ है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह मिसाल हमारे प्रभु यीशु के दिनों की घटना से जुड़ी है जहाँ वे अपने चेलों के साथ प्रवेश कर रहे थे और लोगों की नौकरशाही भाषा, व्यावहारिक जवाब, या विरोध में बोलने से बचने के लिए मार्गदर्शन दे रहे थे। “यदि तुम से कोई कुछ कहे, तो कहो, कि प्रभु को इनका प्रयोजन है: तब वह तुरन्त उन्हें भेज देगा” का विचार यह दर्शाता है कि किस प्रकार प्रभु के आदेश के अनुसार सत्य और परिस्थिति के अनुसार उत्तर देना चाहिए।
घटनाक्रम से निकाले जाने वाले तथ्य
व्याख्यात्मक अवलोकन
इस पाठ में ऐसे राजमार्ग दिखते हैं जहाँ चमत्कारिक या मानवीय कठिनाइयों के बीच परमेश्वर की योजना स्पष्ट होती है। यह संकेत देता है कि परमेश्वर के निर्णय से बाहर निकलना मानव स्वार्थी दलीलों को असफल करने का एक तरीका बन सकता है। इस नज़रिये से प्रेरित उत्तर में सत्य, विनम्रता और भरोसा आवश्यक हैं।
तीन महत्वपूर्ण विषय
अन्य संदर्भों के साथ संकीर्ण सम्बन्ध
याकूब 4:13-15 के विचारों से प्रेरणा मिलती है कि मनुष्य योजना बनाते समय परमेश्वर की इच्छा को केंद्र में रखें, क्योंकि हमारी योजनाओं का अर्थ परमेश्वर की योजना के अनुसार मुल्यांकन होता है.
आदमख़ान Clarke/Henry/Barnes की टिप्पणी - इन विद्वानों के अनुसार यहाँ परमेश्वर के उद्देश्य की पूर्णता परमेश्वर के राज्य-विकास के अनुरूप है और शांतिकाल में भी विश्वासियों को यह याद रखना चाहिए कि प्रभु की राह सबसे सही मार्ग है। एक छोटा उद्धरण (सार): “प्रभु के उद्देश्य के अनुसार बोलना, विश्वास और विवेक का संगम है।”
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारी भाषा और उत्तरों में प्रभु के उद्देश्य के अनुरूप बने रहें; जब परिस्थिति कठोर हो, तब भी कृपया सत्य और विनमरता बनाए रखें ताकि लोग प्रभु के कार्य की स्पष्टता को देख सकें और विश्वास में भागीदार बनें।
संकेतित क्रॉस-रेफरेंसे
यहोशू 1:9 - परमेश्वर के साहस, शक्ति, और विश्वास को स्मरण कराता है; रोम 8:28 - सभी चीजें मिलकर भले के लिए काम करती हैं; 1 पतरस 4:11 - जो शब्द बोलता है उसे परमेश्वर से मिलने वाले बड़प्पन के साथ बोले।
नोट: नीचे उद्धरण Text में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सटीक संक्षिप्त शब्दों के उदाहरण मिलते हैं यदि उपलब्ध हों, परन्तु यहाँ पूर्ण पाठ नहीं उद्धृत किया गया है।