Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 5:1 मरकुस 5:2 मरकुस 5:3 मरकुस 5:4 मरकुस 5:5 मरकुस 5:6 मरकुस 5:7 मरकुस 5:8 मरकुस 5:9 मरकुस 5:10 मरकुस 5:11 मरकुस 5:12 मरकुस 5:13 मरकुस 5:14 मरकुस 5:15 मरकुस 5:16 मरकुस 5:17 मरकुस 5:18 मरकुस 5:19 मरकुस 5:20 मरकुस 5:21 मरकुस 5:22 मरकुस 5:23 मरकुस 5:24 मरकुस 5:25 मरकुस 5:26 मरकुस 5:27 मरकुस 5:28 मरकुस 5:29 मरकुस 5:30 मरकुस 5:31 मरकुस 5:32 मरकुस 5:33 मरकुस 5:34 मरकुस 5:35 मरकुस 5:36 मरकुस 5:37 मरकुस 5:38 मरकुस 5:39 मरकुस 5:40 मरकुस 5:41 मरकुस 5:42 मरकुस 5:43



मतलब का सीधा सार
मरकुस 5:37 में यीशु ने पतरस, याकूब और यूहन्ना को छोड़कर अन्य लोगों को नहीं आने दिया—यह दर्शाता है कि विशिष्ट निकटता और आध्यात्मिक घनिष्ठता के बावजूद भी वे सब कुछ नहीं जानते थे और उनके दायरे में अधिकतम अंतरंगता केवल चुने हुए तीन चेलों के साथ संभव थी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
इस घटना में यीशु अपनी मित्र और सहयोगी की दुखद परिस्थिति—जिरीह के पुत्र की बिंब के रूप में—के साथ एक निजी अवसर चाहते थे। बे्र्ष्ट से नीचे एक बड़ा जुलूस इकट्ठा था, पर यीशु ने निष्कर्ष रूप से केवल तीन चेलों को साथ लेने का निर्णय किया: पतरस, याकूब और यूहन्ना। यह निर्णय विश्वसनीय रूप से यह दिखाता है कि कुछ घड़ियों में प्रवेश, गहराई और आश्वासन के लिए आध्यात्मिक गहराई आवश्यक होती है, जिसे सामान्य प्रेरित लोग भी नहीं समझ पाते।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमैटिक बिंदु
संबद्ध बाईबल के अंश (संक्षेप explanations)
योहान्न 11:3-4— यीशु के निजी उपस्थिति का संदेश, कि धार्मिक उत्साह के पीछे भी एक गहरा उद्देश्य रहता है जो केवल विश्वासी महसूस करते हैं।
यूहन्ना 13:23— पतरस-याकूब-यूहन्ना की विशिष्ट भूमिका का संकेत, एक नज़दीकी धागा यीशु के साथ जुड़ा रहता है।
लूका 8:51— मृत्यु के निकट यीशु का दृष्टिकोण एक सीमित समूह के साथ गहरी चर्चा का संकेत देता है।
पूर्व-दृष्टांत के उद्धरण (संक्षेप)
मैथ्यू हेनरी या एल्बर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के शब्द यदि उपलब्ध हों, तो वे कहते हैं कि ईश्वर की योजना में निकटता और पवित्रता के संकेत मिलते हैं: विशेष अवसरों पर भगवान विशिष्ट विश्वासियों को बुलाते हैं; यह सामान्य जनता के लिए नहीं होता। (कृपया ध्यान दें: नीचे उद्धृत संक्षिप्त पाठ में पूर्ण वाक्यांश नहीं दिया गया है।)
संरक्षित वास्तविक प्रभाव
इस पद के माध्यम से हमें सीख मिलती है कि: हर परिस्थिति में God के कार्यक्रम के भीतर एक गहरी और निजी प्रक्रिया होती है; कभी-कभी आध्यात्मिक चढ़ाव केवल कुछ चुने हुए लोगों के साथ साझा होता है। यह पथ हमें विश्वास, निष्ठा और ईश्वर की योजना के प्रति विनम्रता दिखाने की प्रेरणा देता है।
छोटा practically-takeaway
परस्पर-उद्धृत पाठ (2-3 cross-references)
1) मरकुस 4:34 — यीशु ने बार-बार निजी उपदेशों से शिष्य-समूह को संबोधित किया; यहाँ भी प्रसंग का निजी संकेत है।
2) मत्ती 17:1-9 — पवित्र पर्वत पर तीन चेलों का चयनित सन्निकटता; यह स्पष्ट करता है कि कुछ दर्शन और चमत्कार विशिष्ट भागीदारी से परिचालित होते हैं।
3) ल्यूक 9:28-36 — यीशु के घनिष्ठ चक्करों और उनके साथ रहने की महत्ता को दर्शाता है।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शाब्दिक उद्धरण सीधे उद्धृत नहीं किए गए; अगर उपलब्ध हों तो छोटा-सा स्पष्ट उद्धरण ही शामिल किया जाएगा।