Old Testament
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मरकुस 5:30 का तात्पर्य
संदेश यह है कि यीशु ने तुरंत जान लिया कि मुझसे शक्ति निकल चुकी है और वह सामने वाली भीड़ के बीच उन क्षणों को भी पहचान लेते हैं जब उसकी ही शक्ति किसी के लिए लाभदायक बनती है। प्रेरणा यह है कि ईश्वर की चंगेरी हमारी वस्तियाँ और आस्था से जुड़ती है, और ईश्वर चाहते हैं कि लोग उसे पाये और जानें कि उन्हें चंगा करने की सार है।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यह घटना मरकुस 5:21-34 के हिस्से में आती है, जहाँ एक घायल महिला अपने दमनकारी रोग के बावजूद यीशु की परिधान को छूकर चंगा होना चाहती है। दूरी, भीड़, और एक महिला की दृढ़ आशा के बीच यीशु अपनी शक्ति को महसूस करते हैं। उसे अपनी सामर्थ्य निकले जाने का संकेत अपने भीतर महसूस होता है, जिससे पता चलता है कि चंगे की प्रक्रिया शारीरिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक सामाजिक संबंधों से भी जुड़ी है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
सारांश विचार
संबद्ध आयत-उद्धरण विस्तार
यह संदर्भ मरकुस के पूरे परिपाटी का हिस्सा है जहाँ यीशु की महिमा और उसकी चंगा करने की क्षमता एक साथ स्पष्ट होती है। अन्य निकट संदर्भ जो इस धारा से संबद्ध हैं, वे बताते हैं कि 1) यीशु की शक्ति की पहचान आस्था से होती है, 2) चंगा केवल शारीरिक नहीं बल्कि सामाजिक-आध्यात्मिक पुनःस्थापना भी है, 3) यीशु का निजी स्पर्श भी चंगा करने की प्रक्रियाओं में एक व्यक्तिगत भागीदारी है।
पासेज़-क्रॉसरेफरेंसे
1) মर्कुस 5:34—यीशु ने कहा, “तुम्हारी आस्था ने तुम्हें चंगा कर दिया।” यह सीधे प्रत्यक्ष प्रभाव दर्शाता है कि आस्था ही सूत्र है।
2) मत्ती 9:22—“तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया,” यह भी आस्था के महत्व को पुष्ट करता है।
3) लूका 8:48—“ध्यान से कहा गया, ‘डरो नहीं, बेटी, तुम्हारी आस्था ने तुम्हें बचाया है’।” यह सुनिश्चय देता है कि यीशु के सामने आस्था की आवाज सुनाई देती है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे लिये संदेश: प्रभु की शक्ति जब-जब मांगते हैं तब उपलब्ध होती है; विश्वास सधे मन से उसे पकड़ता है और चंगेपन के रास्ते खोलता है। किसी भी भीड़ में भी हम अपनी आस्था को पहचानें और यीशु के आने में उसे पकड़ें।
उद्धरण नोट: नीचे के प्रसिद्ध विवेचकों के संक्षित पूर्व-चयनित विचारों से आवश्यक अंश दिए गए हैं—
Matthew Henry: “The Woman’s faith touched Christ, and Christ perceived it.”
Albert Barnes: “The power went out of him; she was healed by faith.”
Adam Clarke: “The Lord perceived that virtue had gone out of him; the touch of faith rescued the afflicted.”