Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 5:1 मरकुस 5:2 मरकुस 5:3 मरकुस 5:4 मरकुस 5:5 मरकुस 5:6 मरकुस 5:7 मरकुस 5:8 मरकुस 5:9 मरकुस 5:10 मरकुस 5:11 मरकुस 5:12 मरकुस 5:13 मरकुस 5:14 मरकुस 5:15 मरकुस 5:16 मरकुस 5:17 मरकुस 5:18 मरकुस 5:19 मरकुस 5:20 मरकुस 5:21 मरकुस 5:22 मरकुस 5:23 मरकुस 5:24 मरकुस 5:25 मरकुस 5:26 मरकुस 5:27 मरकुस 5:28 मरकुस 5:29 मरकुस 5:30 मरकुस 5:31 मरकुस 5:32 मरकुस 5:33 मरकुस 5:34 मरकुस 5:35 मरकुस 5:36 मरकुस 5:37 मरकुस 5:38 मरकुस 5:39 मरकुस 5:40 मरकुस 5:41 मरकुस 5:42 मरकुस 5:43



मरकूस 5:35 का अर्थ संक्षेप में
जब वे आराधनालय के सरदार के घर से आ रहे थे कि बेटी अब मर चुकी है, तब Jesus ने कहा: “मत घबराओ; विश्वास रखा रहो।” इसका मतलब है कि कठिन परीक्षा में भी परम विश्वास से आगे बढ़ना चाहिए, भले ही परिस्थिति कितनी ही नाटकीय क्यों न हो जाए।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
इस अध्याय में Jesus ने जख्मी और असंभावित स्थितियों में आशा दी है—पहले एक महिला के पूर्ण स्वास्थ्य के लिए; फिर एक सरदार की बेटी की मृत्यु की खबर पर, Jesus ने कहा कि विश्वास ही उपचार का मार्ग है। इस क्रम में मरकूस 5:35 दृश्य स्पष्ट करता है कि जीवन-जगत के अधिकारी Jesús के साथ कैसे भीषण दुख के बीच भी विश्वास की किरण रखते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
1-2 उल्लेखनीय विचार
यह उद्धरण दिखाता है कि संकट में भी विश्वास की क्रिया कैसी काम करती है—यथा प्रभु का आदेश भय से ऊपर उठकर विश्वास बनाये रखना है। यह व्यक्तिगत आस्था की परीक्षा नहीं, बल्कि समुदायिक विश्वास का संचालन है, जो कठिन समय में भी आशा को जीवित रखता है।
चर्चित संदर्भ (Cross-references)
इन संदर्भों में समूहगत संदेश यही है कि जीवन की आपात परिस्थितियों में भी प्रभु पर अटल विश्वास ही आशा की कुंजी है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
मरकूस 5:35 हमें सिखाता है कि भय के समय भी एक मजबूत विश्वास ही परिस्थितियाँ पलट सकता है। यह न केवल व्यक्तिगत राहत देता है, बल्कि विश्वास के समुदाय में भी उम्मीद बनाए रखता है।