Old Testament
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मरकुस 5:1 मरकुस 5:2 मरकुस 5:3 मरकुस 5:4 मरकुस 5:5 मरकुस 5:6 मरकुस 5:7 मरकुस 5:8 मरकुस 5:9 मरकुस 5:10 मरकुस 5:11 मरकुस 5:12 मरकुस 5:13 मरकुस 5:14 मरकुस 5:15 मरकुस 5:16 मरकुस 5:17 मरकुस 5:18 मरकुस 5:19 मरकुस 5:20 मरकुस 5:21 मरकुस 5:22 मरकुस 5:23 मरकुस 5:24 मरकुस 5:25 मरकुस 5:26 मरकुस 5:27 मरकुस 5:28 मरकुस 5:29 मरकुस 5:30 मरकुस 5:31 मरकुस 5:32 मरकुस 5:33 मरकुस 5:34 मरकुस 5:35 मरकुस 5:36 मरकुस 5:37 मरकुस 5:38 मरकुस 5:39 मरकुस 5:40 मरकुस 5:41 मरकुस 5:42 मरकुस 5:43



मुख्य व्याख्या बिंदु
मरकुस 5:41 में यीशु ने अपनी सूक्ष्म करुणा और सत्ता दोनों को दिखाया: वह मरत होती न हो, एक घायल आत्मा की आवाज़ पर अचानक जीवन का शब्द बोलते हैं। लड़की के हाथ को पकड़कर “उठ” कहने से एक अविश्वसनीय बात घटित होती है—मर hex, वास्तविकता में जीवन लौट आता है। यह पद यीशु की शक्ति के साथ-साथ उसकी सदा-प्रेरित दया का संकेत है: वह मृत्यु के आगे भी आवाज देता है और मानव-जीवन का पुनर्जन्म करता है।
साहित्यिक संदर्भ के साथ संरचना
यह घटना मरकुस के क्रमिक वर्णन में एक प्रमुख चिह्न है, जहां Jésus के नगर-व्यापार और सामाजिक-ऐहंकार से दूर एक व्यक्ति की ज़रूरत दिखाई देती है। कथा-रेखा में एक व्याप्त भय और तड़प के बीच, यीशु का आदेश “उठ” एक दायित्वपूर्ण उद्घोषणा बनती है; क्रिया-शक्ति शब्द के साथ जुड़कर जीवंत पुनर्जीवन का संकेत देती है, जो विश्वास के साथ जुड़ता है।
धार्मिक महत्व
यहké उद्धारपूर्ण चमत्कार से एक बार फिर यह स्पष्ट होता है कि यीशु वह है जो जीवन का स्रोत है—मृतप्राय अवस्था से भी वह जीवित कर सकता है। बच्चों, पारिवारिक संबंधों और समाज के Margaret-गट से जुड़े दुःखों में, यीशु की चमत्कारिक करुणा पाठकों को यह शिक्षा देती है कि ईश्वर की शक्ति और मानवीय दया साथ-साथ चलते हैं।
ग्रंथ-निर्देश (Cross-References)
नोट: उपरोक्त संदर्भ पूर्ण पदों के बजाय संक्षेपित विचार हैं ताकि एक ही पाठ में संदर्भित सहायता मिल सके।
केंद्रीय प्रश्न
संक्षेप निष्कर्ष
मरकुस 5:41 में यीशु की शब्द-शक्ति और दया एक साथ उभरती है। वह हर मृत-स्थिति में भी जीवन का संकेत दे सकता है—यह संदेश हमारे लिए आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना वह समय था जब यह घटना हुई। विश्वास के साथ उसकी आवाज़ सुनना और उसका आज्ञा स्वीकारना, जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में नई चेतना और जिंदा आशा लाता है।
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