मरकुस 5:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और वे उससे विनती कर के कहने लगे, कि हमारी सीमा से चला जा।

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मरकुस 5:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

मरकुस 5:17 का संदर्भ: सीमा से जाने की विनती

परिदृश्य की झलक: यीशु ने रोगी-समुदाय से दूर जाकर एक विशाल घटना घटाई—एक युवक को पाला-पाला रोककर वह पापी-परंपराओं के स्थान पर आकर उसने संतापित दुष्ट आत्माओं से उद्धार का संदेश दिया। इस संदर्भ में गाँव के लोग, पवित्र समुदाय और रोग से त्रस्त लोग सब एक साथ थे। जब वे उसे अपने समाज के समाज-सीमा से बाहर निकलते देखते हैं, वे भयभीत होकर पूछते हैं कि यह परिवर्तन कैसे होगा और किन प्रथाओं के अनुसार जीवन बदलेगा। उसी समय, शुद्ध मन से आये लोग विनती करते हैं कि “हमारी सीमा से चला जा।”

आत्म-विश्लेषण: ईश्वर में विश्वास और सीमा-परिवर्तन

इस पाठ से ज्ञात होता है कि ईश्वर के राज्य में सीमा-बंधनों का ढांचा लचीला होता है। दुष्ट आस्थाओं के प्रभाव पर विजय पाते समय लोग मान लेते हैं कि उनके सामाजिक और धार्मिक दायरे उनके लिए अपरिहार्य हैं, पर प्रभु से मिलने पर वे अपनी सीमाओं को छोड़कर उद्धार की उम्मीद पाते हैं। प्रभु यीशु का उत्तर उन्हें आश्वस्त करता है कि सत्ता उनमें नहीं, वरन ईश्वर के प्रेम और पवित्रता से है।

महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की चर्चा

• सीमा: यहाँ “सीमा” से तात्पर्य सामाजिक-धार्मिक मानक और पहचानें हैं जो लोगों को एक-दूसरे से अलग रखती हैं। यीशु के निकट आने पर यह सीमा टूटती है, क्योंकि परमेश्वर का राज्य प्रेम और चंगा करने की इच्छा से चलता है।

• विनती: आत्मीयता, साहस और आशा का संकेत—वे साफ-साफ अपनी सीमाओं को यीशु के सामने रखते हैं ताकि उनकी स्थिति बदले।

अन्य समान संदर्भ

• मरकुस 4–5 की घटनाओं में ईश्वर के राज्य की सीमा पिघलती है जब प्रभु साक्षात क्रिया करते हैं।

• मत्ती 8 में एक समान दृश्य मिलता है जहां एक नव-वाक्य क्षेत्र से बाहर की सीमाएँ टूटती हैं और प्रभु के पास आकर लोगों की बेड़ियाँ टूटती हैं।

• लूका 8 में भी इस प्रकार के उद्धार की गवाही मिलती है जो बताती है कि प्रभु के पास आकर लोग अपने समाज-रुपी बंधनों से मुक्त होते हैं।

व्यावहारिक today-आधार: आज के विश्वास के लिए क्या सिखाता है

  • हम भी अपनी “सीमाओं” को यीशु के सामने स्वीकार करें—परिवर्तन के लिए तैयार रहें, खासकर जब वह हमारे भीतर से भय, अपराध-बोध या न मैं सही हूँ जैसे मानक हटा देते हैं।
  • सीमा-विध्वंस का अर्थ है समुदाय के लिए खुलापन—द दूसरों के लिए पंक्ति से बाहर निकलना और प्रेम का उदाहरण बनना।

सारांश

यह पाठ दिखाता है कि प्रभु के आगमन से मानवीय सीमाओं में परिवर्तन संभव है। विनती करने वाले लोग यह समझाते हैं कि उनके समाज के नियम और भेदभाव उनकी पीड़ा का कारण बनते हैं। ईश्वर के राज्य में सीमा नहीं, बल्कि विश्वास, करूणा और उद्धार की शक्ति है।

उद्धरण नोट: नीचे दी गई उद्धरण केवल संदर्भ के लिए हैं—Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट शब्दों के छोटे-छोटे अंश यदि उपलब्ध हों तो उल्लेखित किये जा सकते हैं।

Cross-references (संगत पाठ) के संक्षिप्त उल्लेख: मरकुस 4–5; मत्ती 8; लूका 8 — इनमें प्रभु के अधिकार और सीमा-भंग का थीम देखने को मिलता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मरकुस 5:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और सारे नगर के लोग यीशु से भेंट करने को निकल आए और उसे देखकर विनती की, कि हमारे क्षेत्र से बाहर निकल जा।

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मरकुस 1:24 (HINIRV) »
उसने चिल्लाकर कहा, “हे यीशु नासरी, हमें तुझ से क्या काम? क्या तू हमें नाश करने आया है? मैं तुझे जानता हूँ, तू कौन है? परमेश्‍वर का पवित्र जन!”

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मरकुस 5:7 (HINIRV) »
और ऊँचे शब्द से चिल्लाकर कहा, “हे यीशु, परमप्रधान परमेश्‍वर के पुत्र, मुझे तुझ से क्या काम? मैं तुझे परमेश्‍वर की शपथ देता हूँ, कि मुझे पीड़ा न दे।” (मत्ती 8:29, 1 राजा. 17:18)

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