Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 5:1 मरकुस 5:2 मरकुस 5:3 मरकुस 5:4 मरकुस 5:5 मरकुस 5:6 मरकुस 5:7 मरकुस 5:8 मरकुस 5:9 मरकुस 5:10 मरकुस 5:11 मरकुस 5:12 मरकुस 5:13 मरकुस 5:14 मरकुस 5:15 मरकुस 5:16 मरकुस 5:17 मरकुस 5:18 मरकुस 5:19 मरकुस 5:20 मरकुस 5:21 मरकुस 5:22 मरकुस 5:23 मरकुस 5:24 मरकुस 5:25 मरकुस 5:26 मरकुस 5:27 मरकुस 5:28 मरकुस 5:29 मरकुस 5:30 मरकुस 5:31 मरकुस 5:32 मरकुस 5:33 मरकुस 5:34 मरकुस 5:35 मरकुस 5:36 मरकुस 5:37 मरकुस 5:38 मरकुस 5:39 मरकुस 5:40 मरकुस 5:41 मरकुस 5:42 मरकुस 5:43



मरकुस 5:26 का संदर्भार्थ: रोगी से अधिक दुःख उठाने वाला प्रयास
यह पद मरकुस 5 अध्याय के प्रारम्भिक अंशों में वह कथा है जिसमें एक बभारती स्त्री (रहस्यपूर्ण आत्मा या रक्तस्त्रिता) और एक साहसी पूसाकत भीतरी रोग से ग्रस्त एक व्यक्ति के साथ ईश्वरीय क्रिया दिखती है। यहाँ एक ऐसी महिला का उदाहरण है जो अनेकों वैद्य्यों से परामर्श करती है और अपना सब कुछ खर्च कर देती है, परन्तु उसे लाभ नहीं मिलता, बल्कि उसकी परिस्थिति और भी क्रम बद्ध होती जाती है।
पाठ का क्या संकेत देता है
यह अंश यह दर्शाता है कि मानव प्रयास कितनी भी कठोर मेहनत कर ले, जब तक परमेश्वर की कृपा और विश्वास की क्रिया उसमें उद्देश्य नहीं बनती, तब तक प्रभाव सीमित रहते हैं। जिस woman को “बहुत वैद्यों से बड़ा दुःख उठाया” कहा गया है, वह बताती है कि दुख-सहिष्णुता और उपचार की कोशिशें कभी-कभी मनुष्य के संसाधनों से बाहर निकल कर भी पर्याप्त नहीं होतीं। लोग कुछ भी खर्च कर दें, पर सचमुच का परिवर्तन रीढ़ की हड्डी में विवेक के विश्वास से ही संभव है।
प्रमुख शब्दों और छवियों की व्याख्या
अन्य अनुभागों के साथ सम्बन्ध
यह पाठ अन्य पानी की बर्तनों के चक्र से जुड़कर दिखाता है कि ईश्वर की दया और विश्वास दोनों का सम्मिलन कैसे हुँकता है।
क्यों यह आज भी प्रासंगिक है—आज का अनुप्रयोग
हम में से हर कोई भारी खर्च कर देता है—डाक्टर, उपचार, और उपाय—पर कभी-कभी हमें आन्तरिक शांति और परिवर्तन के लिए आध्यात्मिक विश्वास के क्षणों की आवश्यकता होती है। यह पाठ याद दिलाता है कि सही स्थान पर सही विश्वास और उम्मीद लगाने से ही जीवन नया बन सकता है, भले ही परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।
क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षेप स्पष्टीकरण
इन संदर्भों में संकेत यह है कि स्वास्थ्य और परिवर्तन न केवल शरीर में बल्कि विश्वास के कारण मन में भी होता है; परमेश्वर की कृपा विशेष रूप से विश्वास पर निर्भर करती है।
सारांश व्याख्या
इस पाठ से यह समझना महत्वपूर्ण है कि ईश्वर की चंगेरी केवल औषधि या धन पर निर्भर नहीं करती। verdaderamente परिवर्तन तब आता है जब भीतर की आस्था और परमेश्वर के करुणाहीन प्रेम की कृपा एक साथ काम करती है। यह कहानी मानव-प्रयासों के बावजूद हमारे उद्धार का स्रोत केवल क्रिस्त की कृपा ही रखती है।
उद्धृत अवश्यक बिंदु (public-domain commentators): पाठ के संकल्प को स्पष्ट करते हुए, Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के विचारों से समेकित निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया है। नीचे छोटे उद्धरण केवल संकेतार्थ हैं:
नोट: ऊपर दिए गए उद्धृत संकेत प्रेस के लिए हैं; पूर्ण ग्रंथों के स्पष्ट उद्धरण वास्तविक पाठ में हो सकते हैं, पर यहां केवल सार संक्षेप प्रस्तुत है।