Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 5:1 मरकुस 5:2 मरकुस 5:3 मरकुस 5:4 मरकुस 5:5 मरकुस 5:6 मरकुस 5:7 मरकुस 5:8 मरकुस 5:9 मरकुस 5:10 मरकुस 5:11 मरकुस 5:12 मरकुस 5:13 मरकुस 5:14 मरकुस 5:15 मरकुस 5:16 मरकुस 5:17 मरकुस 5:18 मरकुस 5:19 मरकुस 5:20 मरकुस 5:21 मरकुस 5:22 मरकुस 5:23 मरकुस 5:24 मरकुस 5:25 मरकुस 5:26 मरकुस 5:27 मरकुस 5:28 मरकुस 5:29 मरकुस 5:30 मरकुस 5:31 मरकुस 5:32 मरकुस 5:33 मरकुस 5:34 मरकुस 5:35 मरकुस 5:36 मरकुस 5:37 मरकुस 5:38 मरकुस 5:39 मरकुस 5:40 मरकुस 5:41 मरकुस 5:42 मरकुस 5:43


मरकुस 5:20 का अर्थ
इस वचन में येसु ने चिकित्सा पायी एक व्यक्ति मरकुस के पंक्ति में मुक्त होकर अपनी कहानी को इलाके में फैलाया; परिणाम यह हुआ कि गाँव-गाँव में लोग यीशु के बारे में पूछने लगे और दिकापुलिस क्षेत्र भी चिह्नित हुआ कि परमेश्वर के यीशु महिमा दिखा रहे हैं।
प्रसंग का पृष्ठभूमि
पहले भाग (मरकुस 5:1–20) में यीशु ने गदेरे में एक अंध-आत्मा से पीड़ित आदमी को चंगा किया। वह आदमी अपनी पुरानी भीड़-भाड़ और दुष्टात्माओं से मुक्त होकर नई जीविका की ओर चला। उसने लोगों के बीच यह घोषणा की कि “यीशु ने मेरे लिये बड़े काम किए”—यानी वह अपने जीवन की दिशा को पूरी तरह से बदल देने वाला उद्धार-पयामाल सकता है।
व्याख्यात्मक विचार
छोटे विषयगत बिंदु
अनुसरण करने योग्य क्रॉस-रेफ़रेंसेस
1) मरकुस 1:28 — यीशु के प्रचार का तेज और उसका प्रभाव शहरों में फैलना शुरू होता है; यह दिखाता है कि चमत्कार समाज में स्मरणीय बदलाव ला सकता है।
2) लूकas 8:39 — आदमी अपनी नई पहचान और उद्धार की गवाही देता है; यह मेल खाती है कि व्यक्तिगत परिवर्तन समुदाय तक पहुँचता है।
3) मत्ती 4:24 — क्षेत्र की भिन्न-भिन्न जगहों पर यीशु की शक्तियाँ फैलीं, और यह प्रचार की गति को बताता है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे जीवन में उद्धार का अनुभव यदि होता है, तो उसे छुपाने के बजाय दूसरों के साथ बांटना चाहिए, ताकि विश्वास की गवाही से और भी लोग प्रभु पर आ सकें। विश्वास का अनुभव समुदाय के लिए प्रेरणा बन सकता है, और ऐसे अवसरों पर हमारी चूक नहीं करनी चाहिए—बल्कि ईश्वर के कार्य को साझा करना चाहिए।
कथनात्मक समापन
इस कथा में पाए जाते हैं कि एक व्यक्ति के परिवर्तन से क्षेत्र के मन-प्रदेश संकेतित होते हैं। यह प्रति-वाचन हमें याद दिलाता है कि यीशु के काम का प्रभाव व्यक्तिगत जीवन से होकर समाज तक फैला करता है, और यही चमत्कारिक रूप से हमारे दिन-प्रतिदिन के प्रचार का आधार बन सकता है।
उद्धरण-नोट: पाठ के प्रचलित टिप्पणीकारों के सार्वजनिक-डायरेक्ट उद्धरण केवल आवश्यक स्थिति में संक्षेप में प्रयोग किए गए हैं; यदि ऐसी उद्धरण हों, वे मौलिक पाठ के साथ संगत संदर्भ में हैं।