Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 8:1 लूका 8:2 लूका 8:3 लूका 8:4 लूका 8:5 लूका 8:6 लूका 8:7 लूका 8:8 लूका 8:9 लूका 8:10 लूका 8:11 लूका 8:12 लूका 8:13 लूका 8:14 लूका 8:15 लूका 8:16 लूका 8:17 लूका 8:18 लूका 8:19 लूका 8:20 लूका 8:21 लूका 8:22 लूका 8:23 लूका 8:24 लूका 8:25 लूका 8:26 लूका 8:27 लूका 8:28 लूका 8:29 लूका 8:30 लूका 8:31 लूका 8:32 लूका 8:33 लूका 8:34 लूका 8:35 लूका 8:36 लूका 8:37 लूका 8:38 लूका 8:39 लूका 8:40 लूका 8:41 लूका 8:42 लूका 8:43 लूका 8:44 लूका 8:45 लूका 8:46 लूका 8:47 लूका 8:48 लूका 8:49 लूका 8:50 लूका 8:51 लूका 8:52 लूका 8:53 लूका 8:54 लूका 8:55 लूका 8:56



कथन-भिन्नता: परन्तु उसने उसका हाथ पकड़ा, और पुकारकर कहा, “हे लड़की उठ!” (लूका 8:54)
सीधे शब्दों में कहें तो यीशु द्वारा मृतक के बाद जीवित हुआ युवक/युवती को पुनर्जीवित करने के लिए की गई आवाज है: कृपा से उसने लड़की को जगा दिया और उसे जीवन लौटाने का उद्घोष किया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह कथा लूका के गॉस्पेल के उसी खंड में है जहाँ यीशु ने Jairus की पुत्री को जीवित किया और एक पुत्री के साथ हुए उपचार का उल्लेख किया गया है। इस क्षणों में यीशु की दया, प्रयास और विश्वास का संयुक्त प्रभाव स्पष्ट होता है। लड़की दाहिनी ओर से मृत मान ली गई थी; पिता Jairus ने विश्वास से यीशु से मदद माँगी थी। यीशु ने धीरे-धीरे घटनाक्रम को आगे बढ़ाते हुए कहा, और अंत में उसने लड़की का हाथ पकड़ा और पुकारकर कहा, “हे लड़की उठ!”
व्याख्यात्मक बिंदु
शास्त्रीय दृष्टिकोण से कुछ संजोए विचार
इस पाठ में देखने को मिलता है कि यीशु का अधिकार जीवन के हर क्षण पर है—स्पर्श से चंगा करना, आदेश से जी उठना। यह उद्धार के संदेश को साकार करता है कि परमेश्वर के राज्य में मृत्यु की सीमा भी प्रभु के शब्द से पराजित हो सकती है।
संयुक्त संदर्भों के छोटे cross-रिफरेंस
1) मरकुस 5:41—यही घटना अधिक संकुचित विवरण के साथ प्रस्तुत है; यह दर्शाता है कि यीशु के शब्द और स्पर्श कैसे जीवन को पुनः ताजा करते हैं।
2) मत्ती 9:24—पुनर्जीवित करने के संदर्भ में, यीशु के शब्दों की स्पष्टता और उनके विश्वास की मांग दिखती है।
3) योहान 11:43—जीवदायिनी शब्द और बुलावे के माध्यम से दिव्यता का प्रदर्शन; मृत्यु पर विजय की ठोस स्मृति देता है।
छोटे निर्देशात्मक निष्कर्ष
परिणामकारी Takeaway
यह कथा हमें बताती है कि प्रभु के किसी भी समय के स्पर्श और शब्द से जीवन नई दिशा ले सकता है। सरल विश्वास, विनम्र निवेदन, और यीशु के अधिकार की मान्यता—इन तीनों का संगम जीवन के सबसे कठिन क्षणों में भी आशा को जगा सकता है।
कैसूट उद्धरण (पावर-पंजा): ऐसी पंक्तियाँ John Henry/Albert Barnes/Adam Clarke के प्रामाणिक-विधियों से साक्ष्य के अनुरूप उद्धृत हैं; नीचे के हिस्सों में उनके विचारों का संकेतिक सार दिया गया है।
नोट्स
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के उद्धृत विचारों के संक्षेप से प्रेरणा चाहते हैं, इनमें एक संयुक्त, विशुद्ध हिन्दी-समझदारी के साथ एकीकृत विश्लेषण प्रस्तुत है।
हिंदी-अनुवाद किंचित उद्धरण
ध्यान दें: इस पंक्ति की मौलिक प्रेरणा यीशु का स्पर्श और बुलावा है; आधिकारिक उद्धरणों की छोटी-सी वाक्य-रेखा, यदि उपलब्ध हो, नीचे के पाठ में संदर्भ-चिह्न के साथ बताए गए हैं।