Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 8:1 लूका 8:2 लूका 8:3 लूका 8:4 लूका 8:5 लूका 8:6 लूका 8:7 लूका 8:8 लूका 8:9 लूका 8:10 लूका 8:11 लूका 8:12 लूका 8:13 लूका 8:14 लूका 8:15 लूका 8:16 लूका 8:17 लूका 8:18 लूका 8:19 लूका 8:20 लूका 8:21 लूका 8:22 लूका 8:23 लूका 8:24 लूका 8:25 लूका 8:26 लूका 8:27 लूका 8:28 लूका 8:29 लूका 8:30 लूका 8:31 लूका 8:32 लूका 8:33 लूका 8:34 लूका 8:35 लूका 8:36 लूका 8:37 लूका 8:38 लूका 8:39 लूका 8:40 लूका 8:41 लूका 8:42 लूका 8:43 लूका 8:44 लूका 8:45 लूका 8:46 लूका 8:47 लूका 8:48 लूका 8:49 लूका 8:50 लूका 8:51 लूका 8:52 लूका 8:53 लूका 8:54 लूका 8:55 लूका 8:56



लूका 8:25 — तत्कालीन संदर्भ और संदेश
घटना वह बड़ी आंधी और समुद्री क्रोध के बीच है, जब यीशु और उसके शिष्य नाव पर बैठे थे। अचानक जल-तरंगें उठीं, और नाव डूबने जैसी स्थिति बन गई। यीशु सोए हुए थे, पर शिष्यों ने उनकी नींद की गहराई को पानी पर अधिकार समझ लिया और भय से पुकारा: प्रभु, हमारी सहायता करो, हम खतरे में हैं। इस पर्वत-सी स्थिति में यीशु ने प्रश्न किया: तुम्हारा विश्वास कहाँ था?
कथा से निकलने वाला पाठ: परमेश्वर की सत्ता और विश्वास की जगह
यह वाक्य उस समय के पाठ को उभारता है जब ईश्वर के पुत्र के पास आत्म-विश्वास से भरे शब्द नहीं थे, पर उसी क्रम में ईश्वर के राज की सत्ता प्रकट होती है। यीशु का यह प्रश्न एक आह्वान है: विश्वासी का स्थिर विश्वास किन कारणों से नहीं उठता? नाविकों के भय के बीच उनकी मान्यता की कसौटी यह है कि उन्होंने अपने परिवेश के भय को देखकर नहीं, बल्कि परमेश्वर के मत्व को मानकर साहस पाया।
शब्दार्थ और छवि-विशेष
“आंधी” और “पानी को आज्ञा देना” की छवि पवित्र ग्रंथ में परमेश्वर की सत्ता के संकेत के तौर पर बार-बार आती है। यहाँ भी यह दर्शाया गया है कि प्राकृतिक शक्तियाँ भी प्रभु के आदेश के अधीन हैं। शिष्य यह समझ लेते हैं कि जो कुछ वे देखते हैं, वह एक ऐसी सत्ता के विरुद्ध नहीं है जो उन्हें सुरक्षित न दे सके; परन्तु उनके भीतर का विश्वास अभी परखा जा रहा है।
संबंधित पद
इन स्थानों में यह स्पष्ट होता है कि यीशु के साथ विश्वास रखने वाले लोग तूफान के बावजूद भी ईश्वर की सुरक्षा पर निर्भर रहते हैं, न कि अपनी परिस्थितियों पर।
आज के लिए लागू बातें
1) भय से ग्रस्त स्थिति में भी हमें प्रभु की सत्ता पर भरोसा रखना चाहिए, विशेषकर जीवन के कठिन तूफानों में। 2) pahaन पर जोर देने के बजाय भरोसा वही है जो संकट में भी ईश्वर की पहचान और उसकी इच्छा पर केन्द्रित रहता है। 3) परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, ईश्वर के साथ विश्वास एक ऐसा दृढ़ साधन है जो मन को शांति देता है और जीवन की दिशा स्पष्ट करता है।
संक्षिप्त समालोचना
प्रकाशित पाठ से यह स्पष्ट होता है कि मानवीय डर और अखंड विश्वास के बीच एक नैतिक द्वंद्व उभरता है। पवित्रता और यीशु की परम सत्ता पर आधारित विश्वास आत्म-समझ और शांति के मार्ग abrir करता है। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि खतरे के समय भी ईश्वर के साथ रहने से ही वास्तविक सुरक्षा मिलती है—यही संदेश है कि “तुम्हारा विश्वास कहाँ था?”
प्रसंगिक उद्धरण (संक्षेप):
“तुम्हारा विश्वास कहाँ था?” — यह शब्द ईश्वर की सत्ता और शोधन-विश्वास की आवश्यकता को उजागर करते हैं; यह विचार हिनिर्व संस्करण के अनुरूप है।