Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 8:1 लूका 8:2 लूका 8:3 लूका 8:4 लूका 8:5 लूका 8:6 लूका 8:7 लूका 8:8 लूका 8:9 लूका 8:10 लूका 8:11 लूका 8:12 लूका 8:13 लूका 8:14 लूका 8:15 लूका 8:16 लूका 8:17 लूका 8:18 लूका 8:19 लूका 8:20 लूका 8:21 लूका 8:22 लूका 8:23 लूका 8:24 लूका 8:25 लूका 8:26 लूका 8:27 लूका 8:28 लूका 8:29 लूका 8:30 लूका 8:31 लूका 8:32 लूका 8:33 लूका 8:34 लूका 8:35 लूका 8:36 लूका 8:37 लूका 8:38 लूका 8:39 लूका 8:40 लूका 8:41 लूका 8:42 लूका 8:43 लूका 8:44 लूका 8:45 लूका 8:46 लूका 8:47 लूका 8:48 लूका 8:49 लूका 8:50 लूका 8:51 लूका 8:52 लूका 8:53 लूका 8:54 लूका 8:55 लूका 8:56


लूका 8:26 पर टिप्पणी—गिरासेनियों के देश में पहुँचना क्यों महत्वपूर्ण है
यह वाक्य अपने आप में एक अद्वितीय पल है जहाँ यीशु के सार्वजनिक कार्य का क्षेत्र एक सीमा से पार कर जाता है—यह गलील के पार गिरासेनियों के देश की दूरी है, एक जगह जो कभी-कभी अजीब-सी दूरी और अलग-अलग धार्मिक धारणाओं के कारण प्रतीत होती है। फिर भी प्रभु का उद्देश्य स्पष्ट है: वह सभी को, विशेषकर शास्त्र-सत्य से दूर खड़े लोगों तक पहुँचना चाहते हैं ताकि शांति और मुक्ति का प्रकाश उन तक पहुँचे। यह अनुभाग यह बताता है कि ईसामसीह केवल यहूदियों के लिए नहीं, बल्कि पापी, समाज से बहिष्कृत और दूसरे जातीय समूहों के लिए भी हैं; उनकी मंत्रीमंडली एक जाति-रहित मिशन है।
संवर्धन परिप्रेक्ष्य: मूल संदर्भ
गिरासेनियों के देश में पहुँचना—यह वह क्षेत्र है जो गलील के पूर्व में स्थित है और जिसमें पथरीले तथा पथ-भटकते जनजीवन का चित्र मिलता है। यूं तो यह क्षेत्र यहूदियों के साथ-साथ गैर-यहूदियों का केंद्र था, पर यहाँ से यीशु ने यह स्पष्ट संकेत किया कि स्वर्ग का राज्य सीमाओं का नहीं, बल्कि चूहा-भरी दीवारों के बाहर भी मूर्त रूप ले सकता है। इस यात्रा में पवित्रशास्त्र यह दिखाता है कि मसीह की शक्ति सर्वत्र है; वह मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से उद्धार का संदेश लेकर आते हैं।
मुख्य संदेश
यह पाठ एक ऐसे दृश्य का तरल चित्र प्रस्तुत करता है जहाँ यीशु की उपस्थिति और उनकी autoridade का प्रमाण मिलता है—यह दिखाता है कि प्रभु की दया और पहचान सीमा-रेखा नहीं मानती; उनका कार्य व्यापक है। गिरासेनियों के देश में प्रवेश से यह स्पष्ट होता है कि चर्च का संबोधन किसी एक समूह तक सीमित नहीं है बल्कि समस्त मानवीय समुदायों के लिए है।
महत्वपूर्ण थीम्स
संदर्भ-आधार विचार
छोटे-छोटे cross-references इस संदेश को गहराई देते हैं:
पूर्व-आयतन से उद्धरण (संक्षिप्त संदर्भ)
नीचे तीन प्रमुख पवित्र-पुस्तकीय टिप्पणीकारों के विचारों से संकेत मिलते हैं—इनमें से कोई भी पूर्ण उद्धरण दे रहा है, पर मुख्य विचार वही रहते हैं:
मैट्यू हीनरी के अनुसार: “यह घटनाक्रम दिखाता है कि मसीह का उद्धारक ध्येय सर्वत्र है।”
एलবার्ट बार्न्स के अनुसार: “विश्वास की शक्ति सीमाओं के बिना है, और प्रभु की कृपा सभी के लिए खुली है।”
एडम क्लार्क के अनुसार: “गिरासेनियों के देश में प्रवेश से संकेत मिलता है कि गैर-जनम से भी उद्धार संभव है।”
पवित्र शास्त्र से अन्य संदर्भ
स्थिरता के लिए कुछ क्रॉस-रेफरेंसेस:
व्यावहारिक devotional विचार
हम भी अपने-अपने जीवन में सीमाओं को ढीला करें—जीवन के उन क्षेत्र जिनमें हम दूसरों के प्रति द्वेष या दूरी बनाए रखते हैं, उन्हें उठाकर प्रभु के प्रकाश के लिए जगह दें। विश्वास की छोटी सी चिंगारी भी बड़ी दूरी पार कर सकती है; ईश्वर का करुणामय प्रेम सीमाओं से परे व्यापक है।
नीति-उद्धार का संदेश: प्रभु की दया हर तरफ धड़कती है—यही कारण है कि गिरासेनियों के देश में जाना एक प्रेरक संकेत है कि चर्च का दायरा उदार और स्वागत-योग्यता से भरा है।