Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 8:1 लूका 8:2 लूका 8:3 लूका 8:4 लूका 8:5 लूका 8:6 लूका 8:7 लूका 8:8 लूका 8:9 लूका 8:10 लूका 8:11 लूका 8:12 लूका 8:13 लूका 8:14 लूका 8:15 लूका 8:16 लूका 8:17 लूका 8:18 लूका 8:19 लूका 8:20 लूका 8:21 लूका 8:22 लूका 8:23 लूका 8:24 लूका 8:25 लूका 8:26 लूका 8:27 लूका 8:28 लूका 8:29 लूका 8:30 लूका 8:31 लूका 8:32 लूका 8:33 लूका 8:34 लूका 8:35 लूका 8:36 लूका 8:37 लूका 8:38 लूका 8:39 लूका 8:40 लूका 8:41 लूका 8:42 लूका 8:43 लूका 8:44 लूका 8:45 लूका 8:46 लूका 8:47 लूका 8:48 लूका 8:49 लूका 8:50 लूका 8:51 लूका 8:52 लूका 8:53 लूका 8:54 लूका 8:55 लूका 8:56



लूका 8:21—Verse in Context
इस पद में यीशु के परिवार के बारे में उनके द्वारा दी गई टिप्पणी दृश्य के पीछे की घटना को दिखाया गया है। लोग भीड़ में थे और उनसे कहा गया कि उनकी माता और भाइयों की प्रतीक्षा है। यीशु ने उत्तर दिया कि परमेश्वर का वचन सुनना और उसे मानना ही उसका परिवार है। यह कहा गया कि असली परिवार वही हैं जो परमेश्वर की इच्छा को अपनाते हैं और उसे पालन करते हैं।
केंद्रीय समझ
माता-पिता-परिवार के सामाजिक मानदंडों के बाहर यीशु का इस प्रकार का संबोधन यह बताता है कि एक नया, आध्यात्मिक परिवार उत्पन्न होता है—जो ईश्वर के वचन के अनुरूप जीवन बिताते हैं। यह वचन सुनना और मानना केवल ज्ञान नहीं है, बल्कि जीवन के दैनिक व्यवहार में उसका पालन है। ऐसे लोग परमेश्वर के बराबर मानव रिश्तों में भी विशिष्ट स्थान रखते हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के निर्देशों के अनुरूप अपनी आचरण बनाते हैं।
मुख्य विषय
संदर्भित विचार (पूर्व-धारणा के लिए)
इयाकूब के आसन्न शिक्षाओं के साथ इस बात की गूंज मिलती है कि विश्वास के साथ कर्म भी आवश्यक हैं। कुँवरों के समान, परमेश्वर की इच्छा को मानना एक आत्मीय परिवार की नींव है।
निजी एवं व्यावहारिक संकेत
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप विवरण)
1) मत्ती 12:50 — यीशु स्पष्ट करते हैं कि जो कोई परमेश्वर की इच्छा के अनुसार करते हैं, वही उनका परिवार है; यह दृढ़ता से इस वचन के साथ संगत है।
2) मरकुस 3:34-35 — यीशु अपने शिष्यों के साथ एक नया पारिवारिक संबंध दिखाते हैं, जो नरक के बजाय स्वर्गीय उद्देश्य पर केंद्रित है।
3) याकूब 1:22 — सुनना नहीं, परन्तु कार्य में लाने को प्रेरित करता है; यह उस वक्तव्य को गहराई प्रदान करता है कि वचन-श्रवण और पालन एक ही चाबी हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
लूका 8:21 में यीशु ने परिवार की परिभाषा को ऊपर उठाया: परमेश्वर के वचन को सुनना और मानना—यही वास्तविक परिवार की पहचान है। यह उसी सामुदायिक-आत्मिक परिवर्तन का संकेत है जो ईश्वर के राज्य के भीतर बनती है और जो हमारे दैनिक जीवन को स्थिर, दयालु और उद्देश्यपूर्ण बनाती है।
ध्यान दें—ईसाई जीवन के लिए एक छोटा मार्गदर्शक
- सुनना: रोज़ाना पवित्रशास्त्र का अध्ययन करें।
- मानना: जो सिखाया गया है, उसे अपने फैसलों में लागू करें।
- साझा करना: आंतरिक परिवर्तन का प्रदर्शन दूसरों के साथ सच्चे व्यवहार के माध्यम से हो।
उद्धृत संकेत: इस प्रवचन के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke से सीधे उद्धरण विराम-वाक्यों के रूप में उपलब्ध नहीं हैं; फिर भी उनका सामान्य शिक्षात्मक दृष्टिकोण—वचन के सुनना, मानना और व्यवहार में परिवर्तन—यहाँ समाहित है।