मत्ती 11:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

कि हमने तुम्हारे लिये बाँसुरी बजाई, और तुम न नाचे; हमने विलाप किया, और तुम ने छाती नहीं पीटी।

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मत्ती 11:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्थी 11:17 का सीधा अर्थ

इस आयत में यीशु कह रहे हैं कि मानवजाति के लिए ईश्वर ने दो विपरीत संगीत रखे—बाँसुरी और विलाप—पर लोग न तो नाचे और न छाती पीटे। यह संकेत है कि उनके समय के लोग ईश्वर की नियति और संदेश के प्रति उदासीन रहे, वे आनंद से नहीं पलटे और न दुख में संवेदनशील बने।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

प्रसंग यह है कि यीशु ने शहरों के व्यवहार पर आर्जनी व्यक्त किए जो चमत्कारों के बावजूद उनके प्रभाव से बचते रहे। उन्होंने पहले दत्त वचन (यूहन्ना के लिए) और प्रचार के दौरान होने वाले प्रतिरोध को देखते हुए यह टिप्पणी दी। बाँसुरी का नाचना और विलाप का चीत्कार—ये केवल प्राकृतिक प्रतिक्रियाएँ नहीं, बल्कि उस समय की आध्यात्मिक प्रतिक्रिया के प्रतीक रूप हैं।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • आत्म-निग्रह का अभाव: लोग खुशियों से उन्मत्त होते नहीं, न दुखी होते हैं—यही आत्मिक अपराध के संकेत हैं।
  • पूर्वकल्पना बनाम वास्तविकता: उन्होंने चमत्कार देखकर भी ईश्वर के संदेश को अपनाने से इनकार किया; यह आत्म-न्यायप्रियता का परिणाम है।
  • प्रभु के राज के लिए प्रतिक्रिया के विविध रूप: कुछ लोग प्रसन्न रहे, परन्तु वे नाच या विलाप के बजाय जागरूक विश्वास स्वीकार नहीं कर पाए।

सूत्रगत विचार

मत्ती 11:17 पाठक को यह याद दिलाता है कि परमेश्वर के बंधन के सामने मानव प्रतिक्रिया कैसे बाधित हो जाती है—नाचना या रोना—यदि हृदय नहीं बदले। धर्मशास्त्रियों के अनुसार यह हमारे भीतर वाले जिद और धारणाओं के विरुद्ध एक बुलाहट है कि हम ईश्वर के संदेश के अनुरूप ढलें।

समानार्थी क्रॉस-रेफरेंस

1) पूर्व निर्धारित प्रतिक्रिया बनाम खुला चयन: लूका 7:32 में उद्धृत उदासी और नाच की अस्थिरता एक समान थी; जनता के प्रतिक्रियाओं की विविधता यही दिखाती है कि चमत्कार कैसे एक आर्दश परीक्षण बनता है।

2) उद्धारकर्ता के संदेश की अभिप्रेरणा: मरकेस 2:19 में कहा गया है कि उद्धारकर्ता के आगमन से पुराने रीति-रिवाजों की जगह नया जीवन चाहिए; इस आयत में भी एक नए प्रकार की आस्था की जरूरत है।

3) ईश्वर की इच्छा के प्रति मन की खुली स्वीकृति: यूहन्ना 6:37 में लिखा है कि जो आते हैं वे कभी निष्फल नहीं लौटते—यह संकेत देता है कि प्रतिक्रियाएँ अगर ईश्वर के काम के अनुरूप हों तो स्वीकार्य हैं।

संक्षेपित निष्कर्ष

हमारा हृदय ईश्वर की बात सुनने के लिए बंद नहीं होना चाहिए। बाँसुरी-सी खुशी या विलाप-सी दु:ख, दोनों प्रतिक्रियाओं का मकसद होता है—पर वास्तविक बदलाव तभी आता है जब हम ईश्वर की उन्नत योजना के प्रति खुले हों, अपने मन को बदलकर विश्वास की दिशा में बढ़ें।

संयुक्त निष्कर्ष

यह आयत हमें यह सिखाती है कि परमेश्वर के संदेशक संदेश के प्रति हमारी सच्ची प्रतिक्रिया विश्वास, अनुराग और परिवर्तन की मांग करती है—not mere outward प्रदर्शन. आध्यात्मिक दृष्टि से, नाचना और विलाप केवल संकेत हैं; असली प्रश्न है—क्या हमारा हृदय ईश्वर की आवाज़ सुनकर परिवर्तन के लिए तैयार है?

टेकअवे

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 11:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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