Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 15:1 मत्ती 15:2 मत्ती 15:3 मत्ती 15:4 मत्ती 15:5 मत्ती 15:6 मत्ती 15:7 मत्ती 15:8 मत्ती 15:9 मत्ती 15:10 मत्ती 15:11 मत्ती 15:12 मत्ती 15:13 मत्ती 15:14 मत्ती 15:15 मत्ती 15:16 मत्ती 15:17 मत्ती 15:18 मत्ती 15:19 मत्ती 15:20 मत्ती 15:21 मत्ती 15:22 मत्ती 15:23 मत्ती 15:24 मत्ती 15:25 मत्ती 15:26 मत्ती 15:27 मत्ती 15:28 मत्ती 15:29 मत्ती 15:30 मत्ती 15:31 मत्ती 15:32 मत्ती 15:33 मत्ती 15:34 मत्ती 15:35 मत्ती 15:36 मत्ती 15:37 मत्ती 15:38 मत्ती 15:39



मत्ती 15:15 पर टिप्पणी
पद का संक्षिप्त संदर्भ: पतरस ने यीशु से कहा, “यह दृष्टान्त हमें समझा दे।” यह घटनाक्रम वेदोपदेशक शिक्षण-संदेश के बीच आता है जब यीशु बहिर्मुखी बहसों और परंपरागत नियमों के बीच आध्यात्मिक गहराई स्पष्ट कर रहे थे। पतरस का यह निवेदन संकेत देता है कि शिष्यगण समझना चाहते हैं कि दृष्टान्त क्या बताता है, और इस बात पर वेग से उसकी व्याख्या चाहते हैं।
केंद्रीय अर्थ
यह verse शिष्य समुदाय की जिज्ञासा को दिखाता है कि रूपक या दृष्टान्त किन परिस्थतियों में उपयोग किए जाते हैं और क्यों शिष्य उसे समझना चाहते हैं। यीशु अपनी शिक्षाओं में अक्सर बाह्य कर्म-प्रथाओं से आगे जाकर हृदय की स्थिति पर ज़ोर देते हैं; पतरस का अनुरोध उसी अपेक्षा का संकेत है कि वे वास्तव में परमेश्वर के लोग बनें, न कि केवल रीति-रिवाज़ों के पालनकर्ता।
मुख्य थीम
अन्य पाठ के साथ सम्बद्ध संदेह
यहाँ नीचे दिए गए क्रॉस-रेफरेंस शास्त्रगत संबंधों को संदर्भ देता है—बिना पूर्ण पद उद्धरण के:
व्यावहारिक विचार
हमारे लिए यह पूछताछ है: क्या हम ईश्वरीय वाक्य को केवल परंपराएं मानकर रखते हैं या दिल से समझकर उसे अपनाते हैं? पतरस का संदेश यही है—संशय के समय भी हम ईश्वर से स्पष्टता माँगें, ताकि हमारा आचरण प्रेम, नम्रता और सत्य पर टिका रहे।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह verses यह स्पष्ट करता है कि वास्तविक शिष्यत्व तब प्रकाशित होता है जब ईश्वर हमें भरपूर समझ देता है। दृष्टान्त चाहे कितने भी जटिल क्यों न हों, परमेश्वर के प्रकाश से वे स्पष्ट होते हैं और हमारे जीवन का मार्ग निर्धारित करते हैं।
ब्रिटिश-प्रकाशित टिप्पणियाँ (संक्षेप)
यह अंश विभिन्न प्राचीन टिप्पणीकारों की संकेत-आत्माओं से जुड़ती एक समाकलित धारणा देता है:
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों का संक्षेप-संयोजन आपके लिए सहज पढ़ने योग्य रूप में प्रस्तुत है—किसी भी सीधे उद्धरण के लिए नीचे छोटे-चटकी टिप्पणियाँ दी गई हैं:
- Henry: पतरस के प्रश्न से शिक्षा मिलती है कि दिव्य सत्य को समझना शिष्य का कर्तव्य है; यीशु के शब्दों में गहराई रहती है जिन्हें आत्मिक उद्घाटन से ही समझना संभव है।
- Barnes: यह पूछना शिष्यत्व की रुचि और सत्य-खोज की इच्छा दर्शाता है; दृष्टान्त वास्तविकता की ओर संकेत करते हैं जो बाहरी धार्मिकता से परे हैं।
- Clarke: दृष्टान्तों की शिक्षा अंततः हृदय परिवर्तन की माँग है; यह परिवर्तन ही भीतर से नियमों का पालन कर सकता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (यदि उपलब्ध):
“यह दृष्टान्त हमें समझा दे” — पतरस का सरल, पर गहरा अनुरोध है कि यीशु की शिक्षाओं को ठोस समझ में बदला जाए।