Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 15:1 मत्ती 15:2 मत्ती 15:3 मत्ती 15:4 मत्ती 15:5 मत्ती 15:6 मत्ती 15:7 मत्ती 15:8 मत्ती 15:9 मत्ती 15:10 मत्ती 15:11 मत्ती 15:12 मत्ती 15:13 मत्ती 15:14 मत्ती 15:15 मत्ती 15:16 मत्ती 15:17 मत्ती 15:18 मत्ती 15:19 मत्ती 15:20 मत्ती 15:21 मत्ती 15:22 मत्ती 15:23 मत्ती 15:24 मत्ती 15:25 मत्ती 15:26 मत्ती 15:27 मत्ती 15:28 मत्ती 15:29 मत्ती 15:30 मत्ती 15:31 मत्ती 15:32 मत्ती 15:33 मत्ती 15:34 मत्ती 15:35 मत्ती 15:36 मत्ती 15:37 मत्ती 15:38 मत्ती 15:39



मत्ती 15:27 के संदर्भ में भूमिका और पाठ का अर्थ
पद का संदर्भ पहाड़ी क्षेत्र के अनदेखे संवाद से जुड़ा है जब एक गुमनाम महिला, जो गैर-यहूदी जाति की है, यीशु के सामने अपनी जरूरत व्यक्त करती है। पहले से चले आ रहे बहस में यीशु ने कहा था कि मनुष्य की रक्शा और शुद्धता के लिए मात्र यहूदी रीतियाँ पर्याप्त नहीं हैं; फिर महिला दृढ़ निश्चय के साथ कहती है कि भले कुत्ते भी मेज से गिरने वाले चूरचार को चख लेते हैं, अर्थात उनकी नतमस्तक श्रद्धा और लगन से उनकी जरूरत भी पूरी हो सकती है। अंततः यीशु ने उसकी आस्था को मान्यता दी और उसकी बेटी को निदरग किया।
यह पाठ ईश्वर के बारे में क्या बताता है
यह उद्धरण यह दिखाता है कि ईश्वर की कृपा सब के लिए है, भले किसी की जाति या सामाजिक स्थिति कुछ हो। यीशु की प्रतिक्रिया में धैर्य, प्रेम और परीक्षण के समय में भी सच्ची आस्था की अहमियत उजागर होती है। जब महिला नम्रतापूर्वक जवाब देती है, तो वह faith के असली स्वरूप को प्रस्तुत करती है—वह सचमुच स्वीकार करती है कि मसीह की मेज से मिलने वाला आशीर्वाद सार्वभौमिक है और केवल यहूदी परंपराओं तक सीमित नहीं है।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र की स्पष्टता
संबद्ध पारियाँ (Cross-references) और उनका संक्षेप
आज के संदर्भ में अप्लिकेशन
आज के जीवन में यह पाठ एक जागरूक संकेत देता है—ईश्वर सर्वव्यापी कृपा का स्रोत है और उसका राज्य सबके लिए खुला है। हमारे सामने जो भी बार-बार बाधित करते हैं—जाति, सामाजिक रुतबा, या अपनी योग्यता—उनसे ऊपर उठकर आस्था और विनय के साथ आना चाहिए। जब हम कहें कि प्रभु, हमारे लिए भी कृपा दें, तो यह विश्वास का स्पष्ट अभिप्राय है कि प्रभु का दया उन तक पहुँचती है जो सच्चे दिल से उसकी सहायता माँगते हैं।
इस पाठ की समेकित समीक्षा में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के कुछ मूल विचार संक्षेप में शामिल होते हैं, जो यह बताते हैं कि ईश्वर की कृपा की मंगलकारी धारा सार्वभौमिक है और आस्था सच के साथ जुड़ती है।
ग्रीन-फुटनोट: “सत्य है प्रभु, पर कुत्ते भी वह चूरचार खाते हैं, जो उनके स्वामियों की मेज से गिरते हैं”—यह शब्द विनय और ईश्वर के वफ़ादार मानवीय अनुरोध के बीच संतुलन को दर्शाते हैं; यह उद्धार के विस्तार का संकेत है, न कि निर्बलता का परिहास।