Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 15:1 मत्ती 15:2 मत्ती 15:3 मत्ती 15:4 मत्ती 15:5 मत्ती 15:6 मत्ती 15:7 मत्ती 15:8 मत्ती 15:9 मत्ती 15:10 मत्ती 15:11 मत्ती 15:12 मत्ती 15:13 मत्ती 15:14 मत्ती 15:15 मत्ती 15:16 मत्ती 15:17 मत्ती 15:18 मत्ती 15:19 मत्ती 15:20 मत्ती 15:21 मत्ती 15:22 मत्ती 15:23 मत्ती 15:24 मत्ती 15:25 मत्ती 15:26 मत्ती 15:27 मत्ती 15:28 मत्ती 15:29 मत्ती 15:30 मत्ती 15:31 मत्ती 15:32 मत्ती 15:33 मत्ती 15:34 मत्ती 15:35 मत्ती 15:36 मत्ती 15:37 मत्ती 15:38 मत्ती 15:39


मत्ती 15:39 — पाठ का मुख्य interpretive बिंदु
खास संदेश यह है कि यीशु ने समाज के बहिष्कृत समूहों को अपनी ओर आकर्षित किया, परन्तु अब वह बहाव से पुनः विश्राम पाने के लिए नाव से मगदन क्षेत्र में लौटते हैं। यह वाक्य प्रचारित शब्द को समेटे हुए है: यीशु के कार्य मिशन के स्थल-स्थान चक्र को दिखाते हैं—भीड़ के साथ भोजन, उपचार, और फिर एकांत–सम्भावना की ओर वापस जाना। यह दर्शाता है कि यीशु व्यवहारिक रूप से समुदाय के सामने रहते हुए भी एक विशिष्ट चतुर्थ भाग में रहते हैं—अधिकारों के भीतर और सीमाओं के बाहर दोनों तरह के प्रभावी कार्य करते हैं।
पाठ-संदेह के literary context
यह अनुभाग मत्ती के Gospel में Jesus की गतिविधियों के एक भाग के अंत का संकेत देता है: पहले पक्ष में यीशु ने पवित्रता के लिए नियमों का उद्घाटन किया, फिर बहिष्कृत लोगों के समूहों के साथ संवाद किया, और अंत में नाव पर बैठकर मगदन क्षेत्र की ओर चले गए। यह चित्र karmic rhythm दिखाता है—उद्धार का संदेश बारम्बार लोगों के बीच फैलता है, परन्तु Jesus शांतिक्रामण और साधना के लिए एकांत का आह्वान भी दे रहे हैं।
Theological significance
1) क्षेत्रीय यात्रा का संकेत: मगदन क्षेत्र के भीतर का निवास-बिंदु यह दर्शाता है कि यीशु का अनुसरण विश्वव्यापी है, पर वह स्थानीय-समुदाय के भीतर भी कदम रखते हैं। 2) शारीरिक आराम और आध्यात्मिक पुनर्निर्माण: भीड़ के ज्वर के बाद शांति और पुनः जागरण की आवश्यकता है; प्रेरित-टीका में यह दर्शाता है कि सेवक-कार्य के साथ व्यक्तिगत विरक्ति और शांति जरूरी है। 3) पूरी कथा में शब्द-संयोजन: यह वाक्य, जो भीड़-उन्मत्तता के बाद आता है, यह चित्र देता है कि उद्धारकर्ता सिर्फ संदेश नहीं देता बल्कि अपने दम पर परिस्थितियों में संतुलन बनाते हैं।
Literary and cross-reference connections
नोट: ऊपर के cross-references पूरी verse के पाठ-संदर्भ को नहीं दोहराते; केवल उनके विचार-विन्यास से जुड़ाव बताते हैं।
Questions for reflection
Summary and unified insight
यह वाक्य Jésus के कर्म-चक्र की एक सहज कड़ी है: फसल-समाधान के साथ मार्ग और विश्राम—भीड़ की जरूरतों को पूरा करना, फिर अपनी शक्तियों को पुनः केंद्रित करना। यह दिखाता है कि उद्धारकर्ता अपने समय और स्थान को समझते हैं; वह क्षण-क्षण में संतुलन बनाते हैं—भीड़ के बीच सेवा, और पीछे एकांत-prayer. Biblia-चर्च में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के मुक्तधारा टिप्पणियाँ इस क्रम की पुष्टि करती हैं: सेवक-कार्य में विश्राम और पुनः सक्रियता का संयोजन सफलता का सूचक है. (उद्धृत विचार: Matthew Henry के कुछ टिप्पणी-उद्धरण, Barnes और Clarke के संकेतों को संयुक्त-सार में समाहित किया गया है, नीचे छोटे उद्धरणों के रूप में दिखेगा)
उद्धरण संकेत: “Ye that have no environment of contemplation cannot sustain long labor.” (Matthew Henry-inspired summary; exact wording from Henry कृपया उद्धृत संदर्भ देखें).
“A holy rest is often the parent of renewed effort.” (Albert Barnes-inspired summary).
“The Master withdraws to renew strength for further service.” (Adam Clarke-inspired summary).