Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 15:1 रोमियों 15:2 रोमियों 15:3 रोमियों 15:4 रोमियों 15:5 रोमियों 15:6 रोमियों 15:7 रोमियों 15:8 रोमियों 15:9 रोमियों 15:10 रोमियों 15:11 रोमियों 15:12 रोमियों 15:13 रोमियों 15:14 रोमियों 15:15 रोमियों 15:16 रोमियों 15:17 रोमियों 15:18 रोमियों 15:19 रोमियों 15:20 रोमियों 15:21 रोमियों 15:22 रोमियों 15:23 रोमियों 15:24 रोमियों 15:25 रोमियों 15:26 रोमियों 15:27 रोमियों 15:28 रोमियों 15:29 रोमियों 15:30 रोमियों 15:31 रोमियों 15:32 रोमियों 15:33



रोमियों 15:12 पर टिप्पणी: यह आशा और सभीजातियों की आस्थाओं का एक समान सूत्र
मुख्य interpretive बिंदु: रोमियों 15:12 में यशायाह की प्रेरित-कथन के माध्यम से दिखाया गया है कि मसीह के अनुपम काम के कारण जुदा-जातियों के लिए भी एक समान आशा खुलती है। एक “जड़” से यिशै की और एक उठेगा, जो सब को एक ही भगवान के साथ जोड़ता है। इस वचन का उद्देश्य यह है कि, पुराने नियम और नई वाचा के बीच एक अखंड कड़ी है, जहां गैर-यहूदियों को भी वरदान मिलना निश्चित रहता है।
पाठिक प्रासंगिक साहित्यिक संदर्भ
– संदर्भ ग्रंथ के रूप में यशायाह 11:11-12 से संकेत मिलता है कि मसीह के आने पर इजराइल और अन्यजातियाँ एक साथ उद्धार पाएंगी। यह उद्धारक का उद्घोष है जो पृथ्वी के कोनों तक फैलकर सभी आगमनियों के लिए आशा बनता है।
– हिनरीव अनुवाद की भाषा में यह पंक्ति एक एकजुटता का संदेश देती है: एक जड़ से अनेक शाखाएं नहीं बल्कि एक आत्मीयता, एक मसीह के एकेश्वर में सभी का एकत्व।
टेरा-थियोलॉजिकल महत्व
यह पंक्ति द्वैत-योजना को समेकित करती है: पहले परमेश्वर ने चूने हुओं के माध्यम से अपने कार्यों की योजना प्रकट की, फिर सभी जातियों को भी भागीदारी दी। यह दिखाता है कि ईश्वर की योजनाएं सार्वभौमिक उपहार हैं, न कि केवल एक जाति तक सीमित।
पाठकीय परिप्रेक्ष्य
रोमियों के प्रवचनों में पौलुस का उद्देश्य यह है कि ईसाई समुदाय में जातीय भेदभाव मिटे और समान आनंद साझा किया जाए। यह वचन समुदाय-निर्माण का एक महत्वपूर्ण संदेश देता है: एक अलौकिक जड़ से सभी सदस्य बनते हैं, और सभी की उद्देश्य एक ही रहता है—मसीह में आशा।
संक्रमण और अन्याय से मुक्तता
शास्त्रीय टिप्पणीकारों के अनुसार यह विचार: न सिर्फ ऐतिहासिक रूप से यहूदियों के साथ, बल्कि गैर-यहूदियों के बीच भी उद्धार का मार्ग खुलना—यह ईसाई समुदाय की समावेशन की भावना को पुष्ट करता है।
Cross-references (संक्षिप्त, बिना पूर्ण आयत पाठ)
हर लिंक संकेत देता है कि गौई जाति-विभेद के पार परमेश्वर का उद्देश्य एक एकता का समाज बनना है, जिसमें मसीह सभी के लिए सिंचित आशा है।
विचार के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 15:12 हमें याद दिलाता है कि मसीह का कर्तव्य सभी जातियों के लिए आशा बनाए रखना है—एक जड़ से अनेक शाखाएं नहीं, बल्कि एक ही जीवनधारा से सभी को नवजीवन मिलना। पुराने नियम के उद्धारक-योजनाओं के साथ यह नयी साक्षीता है कि प्रभु यीशु में सभी विश्व की आशा और एकता सुरक्षित है।
उद्धरण-नोट: नीचे दी गई省 Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो उन्हें उद्धृत किया गया है—परंतु यहाँ मुख्य रूप से उनके विचारों के सार संक्षेप रूप में प्रस्तुत हैं।