Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 15:1 रोमियों 15:2 रोमियों 15:3 रोमियों 15:4 रोमियों 15:5 रोमियों 15:6 रोमियों 15:7 रोमियों 15:8 रोमियों 15:9 रोमियों 15:10 रोमियों 15:11 रोमियों 15:12 रोमियों 15:13 रोमियों 15:14 रोमियों 15:15 रोमियों 15:16 रोमियों 15:17 रोमियों 15:18 रोमियों 15:19 रोमियों 15:20 रोमियों 15:21 रोमियों 15:22 रोमियों 15:23 रोमियों 15:24 रोमियों 15:25 रोमियों 15:26 रोमियों 15:27 रोमियों 15:28 रोमियों 15:29 रोमियों 15:30 रोमियों 15:31 रोमियों 15:32 रोमियों 15:33



रोमियों 15:17 – एक उद्धारक के द्वारा परमेश्वर के विषय में बड़ाई
पद में पौलुस स्वयं को परमेश्वर के कार्यों का वाहक मानते हैं—ऐसे काम जिनमें ईमानदार विश्वास और मसीह यीशु के कारण परमेश्वर की महिमा प्रदर्शित होती है। यह आश्वासन स्पष्ट करता है कि एक विश्वासी की सफलता केवल अपनी सामर्थ्य में नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा और मसीह के माध्यम से होती है।
पाए जाने वाले संदर्भ में अध्याय का संदर्भ
रोमियों की पंक्ति-परिचय में पौलुस बताता है कि वह दूत-कार्य नहीं है, बल्कि उन बातों के विषय में बड़ाई करता है जो परमेश्वर के कारण हैं—यानी यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के उद्देश्य पूरे करते समय उसकी महिमा स्पष्ट होती है। यह संदेशRomans 15 के समग्र विचार-चक्र का भाग है, जिसमें उपलब्ध विश्वास-योर और जीनेसिस से प्रेरित निष्ठा के साथ अन्यजातियों के बीच यीशु मसीह की महिमा फैलाने का लक्ष्य है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस verse की केंद्रीय सीख यह है कि एक विश्वासी का परमेश्वर-सम्बन्धी शोधन और महिमा-प्रकाशन मसीह के कारण संभव है, न कि अपनी शक्ति के माध्यम से। जब कुछ बातें “परमेश्वर से सम्बन्ध रखती हैं”, तब हमारी बड़ाई उसी की महिमा के लिए होनी चाहिए—ताकि मानवीय गौरव का मार्ग न रोका जाए और अज्ञानता के स्थान पर उनके ज्ञान के उच्चतम स्तर पर पहुँच सके।
अन्य बाइबल पाठ से सम्बद्ध तुलनाएँ
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि चर्चित सफलता और प्रभु की महिमा एक ही धारा के दो पहलू हैं: परमेश्वर की कृपा और विश्वास की सहभागिता।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
पक्का निष्कर्ष
रोमियों 15:17 हमें बताता है कि सफलता, प्रशंसा और सेवकत्व—all शिलालेख परमेश्वर के कारण बनते हैं। मसीह यीशु के माध्यम से जो कुछ भी परमेश्वर के लिए किया जाता है, वही जीवन की वास्तविक बड़ाई है।
छोटे cross-references के साथ संक्षिप्त व्याख्या
1) 2 कुरिन्थियों 10:17: स्पष्ट करता है कि जो दावे सचमुच महान हैं, वे परमेश्वर की महिमा के अनुरूप हों।
2) यशायाह 42:8: परमेश्वर की महिमा स्वयं के लिए है; यह हमें याद दिलाता है कि human boasting को सीमित रखना चाहिए।
3) प्रेरितों के काम 13:47: सभी से मिलने वाला प्रकाश इसराइल–जातीय सीमाओं से मुक्त होकर सुसमाचार की रोशनी को फैलाने की प्रेरणा देता है।
ध्यान दें: नीचे दिए गए उद्धरण केवल उनके सार्वजनिक-डायरेक्ट पाठ से छोटे अंश के रूप में उद्धृत किए जा सकते हैं; पूरी पंक्ति के पाठ स्वरूप से बचें:
प्रसंगिक टिप्पणी के दौरान Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त वाक्यों में से कुछ सीधे उद्धृत हो सकते हैं, यदि उपलब्ध हों।