रोमियों 15:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए, जैसा मसीह ने भी परमेश्‍वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो।

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रोमियों 15:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 15:7 परिज्ञानात्मक टिप्पणी

पाठ का संक्षिप्त अवलोकन: रोमियों के संदेश का यह अंश freshly स्थापित समुदाय में एकता की मांग करता है। मसीह ने परमेश्वर की महिमा के लिये हमें ग्रहण किया है, ताकि हम एक-दूसरे को ग्रहण करें। इसका मतलब है—स्वतंत्र व्यक्तिगत अधिकारों के स्थान पर, प्रेम-सम्बंध और एकत्व की व्यवस्था। यह उद्धार की उत्सर्ग-भावना को व्यवहारिक रूप में दर्शाता है: बाहरी भिन्नताओं के बावजूद भीतर से एकात्मता की पहल।

पर्वchapter में यह विचार

रोमियों 15 अध्याय में पापा लेखक पोस्‍त्रता के लिए एके सामाजिक-धार्मिक समन्वय का आह्वान है। यहाँ चहेते भाइयों-बहनों के बीच स्वीकार्यता, सहनशीलता और एक दूसरे के कार्यों को सम्मान देने का निर्देश है। verse 7 विशेष रूप से 'जैसा मसीह ने परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो' की प्रेरणा देता है कि हमारा संबंध परमेश्वर की महिमा के अनुरूप क्रिया-निष्ठ बने।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

मुख्य पाठ यह है कि उद्धारकर्ता के प्रकार-भिन्नता के बावजूद, विश्वासियों का सामाजिक-धार्मिक जीवन एकता के सूत्र से बंधा है। ग्रहण करना यहाँ दया, क्षमा और सम्मान का व्यवहार है—खासकर उन लोगों के साथ जो हमारे विचारों, पवित्र नियमों या पारिवारिक-समुदाय के हिसाब से भिन्न हैं। यह ग्रहण शरीर की विविधता को मान्यता देता है ताकि एक प्रेरित समुदाय परमेश्वर की महिमा में बढ़े।

पवित्र शास्त्रों के साथ तुलना

- मत्ती 5:7 के अनुसार करुणा की भावना से व्यवहार करना सीखते हैं;—- “धन्यता, एक-दूसरे के कृपामात्र से प्रेम करें।”
- 1 करिन्थियों 12:13 में कहा गया कि एक ही आत्मा के द्वारा सभी को एक ही शरीर में जोड़ा गया है; विविधताओं के बावजूद सह-अस्तित्व का महत्व स्पष्ट है।

इन पदों से समझ आता है कि ग्रहण करना केवल व्यक्तिगत व्यवहार नहीं, बल्कि समुदाय-जीवन के लिए ईश्वर-योजना का भाग है।

व्यावहारिक आवेदन

  • पारस्परिक सम्मान: विविध पहचान वाले साथियो के प्रति सम्मान बनाए रखें; आलोचना कम करें, सहयोग अधिक।
  • क्षमा और सहिष्णुता: पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर प्रेम-युक्त समाधान खोजें।
  • उद्धार-जीवन की दृष्टि: एकता के लिए प्रेरित रहें ताकि परमेश्वर की महिमा बढ़े और समुदाय की साख बनें।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)

• रोमियों 12:16—हृदय में एकता की नीति; दूसरों के सहयोग में मेलजोल रखना।

• ईफिसियों 4:2–3—धैर्यपूर्ण तरीके से एकीकरण का प्रयास और आत्म-न्याय के बिना सौहार्द बनाए रखना।

व्याख्यात्मक स्पर्श: इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि ग्रहण करने का धर्म, व्यवहार में नम्रता और प्रेम से परिपूर्ण है, न कि स्व-स्वार्थ से संचालित।

संक्षेप सार

रोमियों 15:7 में प्रेरक संदेश यही है कि मसीह की महिमा के लिए हमने एक-दूसरे को ग्रहण करना चाहिए। यह एकता का आह्वान है जो व्यक्तिगत और संस्थागत दोनों स्तरों पर रिश्तों को संचालित करता है। यह ग्रहण हर प्रकार की असमानताओं को सुरक्षित दूरी पर नहीं छोड़ता, बल्कि प्रेम-सम्बन्धों को मजबूत कर परमेश्वर की महिमा के लिए एकता का जीवन देता है।

उद्धरण नोट: इस सम्पादन में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन तत्त्वों के विचारों को समाहित किया गया है; यदि उनके कोई संक्षिप्त उद्धरण उपलब्ध हों तो नीचे दिए गए पंक्तियों में उद्धृत किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 15:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मत्ती 10:40 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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“जो तुम्हें ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है।

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यूहन्ना 13:34 (HINIRV) »
मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूँ*, कि एक दूसरे से प्रेम रखो जैसा मैंने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।

रोमियों 5:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
रोमियों 5:2 (HINIRV) »
जिसके द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक जिसमें हम बने हैं, हमारी पहुँच* भी हुई, और परमेश्‍वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें।

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