Old Testament
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1 कुरिन्थियों 6:1 1 कुरिन्थियों 6:2 1 कुरिन्थियों 6:3 1 कुरिन्थियों 6:4 1 कुरिन्थियों 6:5 1 कुरिन्थियों 6:6 1 कुरिन्थियों 6:7 1 कुरिन्थियों 6:8 1 कुरिन्थियों 6:9 1 कुरिन्थियों 6:10 1 कुरिन्थियों 6:11 1 कुरिन्थियों 6:12 1 कुरिन्थियों 6:13 1 कुरिन्थियों 6:14 1 कुरिन्थियों 6:15 1 कुरिन्थियों 6:16 1 कुरिन्थियों 6:17 1 कुरिन्थियों 6:18 1 कुरिन्थियों 6:19 1 कुरिन्थियों 6:20



1 कुरिन्थियों 6:17 — प्रभु के साथ संगति:
पद का तात्पर्य और संदर्भ: इस वाक्य में पवित्र Apostles Paul मसीह के अनुयायियों के बीच संबंध के गहरे आयाम को दिखाते हैं। कुरिन्थ के समुदाय के भीतर कई प्रकार के नैतिक प्रयास थे; Paul यहाँ स्पष्ट करते हैं कि जो व्यक्ति प्रभु के साथ संगति में रहता है, वह बदले में प्रभु के साथ एक आत्मा बन जाता है। इसका अर्थ है व्यक्तिगत आस्थाहीनता से ऊपर उठकर, दासी के बजाय दयालु, नई जिंदगी के अनुरूप रहने की आस्था का संयोग।
ईश्वर-आस्था का यह तथ्य
यह वचन इस पर बल देता है कि ईश्वर के साथ जुड़ना एक एकात्मता है, न कि सिर्फ एक बाहरी अनुशासन. यह एक ऋणी संबंध नहीं, बल्कि एक नयी जीवन-शैली का आरम्भ है। जो प्रभु की संगति में रहता है, वह अपने आत्म-स्वाभाव, विचार और व्यवहार में पवित्रता की ओर ढलता है; वह परमेश्वर की आत्मा के अनुरक्षण में चलने लगता है।
कुंजियाँ शब्दों की व्याख्या
प्रभु की संगति से आशय है — जीते-जी प्रभु यीशु के साथ आंतरिक एकात्मता और नये नियम के अनुसार जीवन अपनाना। एक आत्मा की बात से यह संकेत मिलता है कि ईश्वर की आत्मा और हमारे आत्मा मिलकर एक ही केंद्र से जुड़ जाते हैं, जिससे आंतरिक परिवर्तन और एकता संभव बनती है।
क्रियात्मक संदर्भ
1 कुरिन्थियों 6:17 के संदर्भ में, Paul बल देते हैं कि पापी लक्ष्यों से अलग, मसीह के साथ एक नई धारा में बहना ही जीवन की वास्तविक संगति है। यह परमेश्वर की पवित्रता के अनुरूप रहने की प्रेरणा है, न कि परहेज़-करने के नियमों के संकलन से।
अन्य पूर्व पाठ (Cross-references)
इन उद्धरणों से स्पष्ट होता है कि पवित्र आत्मा के साथ एकता में रहना विश्वास का केंद्रीय चिह्न है, जो व्यक्ति को परमेश्वर के दिल के अनुरूप बनाता है।
प्रत्येक दिन के लिए आवेदन
इस पाठ का संयुक्त संदेश है: जिनके भीतर प्रभु का जीवन प्रवाहित होता है, वे एक ही आत्मा बनकर ईश्वर के उद्देश्य की पूर्ति में भागीदार बनते हैं।
उद्धरण-साक्ष्य: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के परंपरागत टिप्पणियों में संगति का यह विचार बार-बार नज़र आता है; उनके विश्लेषण संकेत करते हैं कि यह एक आंतरिक परिवर्तन और भगवान के साथ संयुक्त जीवन का आह्वान है. (कथित उद्धरण देखें: उनसे सम्बद्ध सामान्य टिप्पणी-रेखाएं, परन्तु यहाँ इन्हें संक्षेप में एकीकृत किया गया है।)