Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 6:1 1 कुरिन्थियों 6:2 1 कुरिन्थियों 6:3 1 कुरिन्थियों 6:4 1 कुरिन्थियों 6:5 1 कुरिन्थियों 6:6 1 कुरिन्थियों 6:7 1 कुरिन्थियों 6:8 1 कुरिन्थियों 6:9 1 कुरिन्थियों 6:10 1 कुरिन्थियों 6:11 1 कुरिन्थियों 6:12 1 कुरिन्थियों 6:13 1 कुरिन्थियों 6:14 1 कुरिन्थियों 6:15 1 कुरिन्थियों 6:16 1 कुरिन्थियों 6:17 1 कुरिन्थियों 6:18 1 कुरिन्थियों 6:19 1 कुरिन्थियों 6:20



असल मतलब (Meaning at a glance)
प्यारी देह यीशु मसीह के अंग हैं। इसलिए इसे किसी अन्य प्रिय वस्तु के साथ, खासकर अशुद्ध संबंधों के रूप में नहीं जोड़ा जा सकता। इस पद से स्पष्ट है कि हमारे शरीर का उपयोग ईश्वर की महिमा और पवित्रता के लिए होना चाहिए, न कि विनाशी वेश्याओं जैसी आत्म-व्यवस्था के लिए।
प्रसंग और पृष्ठभूमि (Contextual background)
1 कुरिन्थियों 6 में पॉल ने कुरिन्थ के मसीही समुदाय की नैतिक अस्थिरता की कड़ी आलोचना की। पर्वत-like नगर कुरिन्थ में विविध संस्कार और व्यवहार थे, और श्रद्धालुओं पर नैतिक परीक्षणों ने चरित्र-नियमन की महत्ता स्पष्ट की। यहाँ वह सवाल उठाते हैं कि कैसे मसीह के शरीर के अंग निजी जीवन के नैतिक निर्णयों से जुड़ते हैं, और क्यों हमें पवित्रता बनाए रखनी चाहिए।
व्याख्यात्मक अवलोकन (Interpretive observations)
थीमेटिक बिंब (Thematic highlights)
अन्य आयतों से संबंध (Cross-references) और संक्षेप व्याख्या
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि देह का पवित्र उपयोग एकता की सुरक्षा और विश्वास-जीवन के विकास में केंद्रीय है।
कठोर, पर आवेदन योग्य निष्कर्ष (Practical takeaway)
अपने दैनिक जीवन में अपने शरीर को मसीह के अंग के रूप में देखें: शरीर की इच्छाओं पर प्रभु यीशु के सम्मान के अनुसार नियंत्रण रखें, प्रेम, मर्यादा और आत्म-नियंत्रण को लक्ष्य बनाएं, ताकि देह भी मसीह के गौरव को प्रकट करे।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण: "क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह मसीह के अंग हैं?" (1 कुरिन्थियों 6:15, संकलन) — यह सार मोड़ देता है कि देह से जुड़ी हर क्रिया से शरीर-परमेश्वर की महिमा संलग्न है।
लेखन-धारा का सार: देह का पवित्र प्रयोग ईश्वर के लोक के लिए पवित्रता और समर्पण की leef है; इस लक्ष्य के लिए Selbst-नियंत्रण और प्रेम-जीवन को प्राथमिकता दें।