Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 6:1 1 कुरिन्थियों 6:2 1 कुरिन्थियों 6:3 1 कुरिन्थियों 6:4 1 कुरिन्थियों 6:5 1 कुरिन्थियों 6:6 1 कुरिन्थियों 6:7 1 कुरिन्थियों 6:8 1 कुरिन्थियों 6:9 1 कुरिन्थियों 6:10 1 कुरिन्थियों 6:11 1 कुरिन्थियों 6:12 1 कुरिन्थियों 6:13 1 कुरिन्थियों 6:14 1 कुरिन्थियों 6:15 1 कुरिन्थियों 6:16 1 कुरिन्थियों 6:17 1 कुरिन्थियों 6:18 1 कुरिन्थियों 6:19 1 कुरिन्थियों 6:20



1 कुरिन्थियों 6:11 पर नवीन हिन्दी टिप्पणी
यह वचन उन लोगों के बारे में है जो पहले जिन्दगी के गंदे व्यवहार के दायरे में थे, परन्तु परमेश्वर के करुणामय हाथों से नई पहचान पाते हैं। पवित्र लेख स्पष्ट करता है कि उद्धार केवल विचारशील परिवर्तन नहीं, बल्कि एक क्रिया-स्थापित परिवर्तन है: धोए जाना, पवित्र होना और धर्मी ठहरना—यानी परमेश्वर के उद्धारकारी काम से एक नयी जीवन-स्थिति।
पाठ का हल्काOverview (अध्याय संदर्भ के साथ)
इस अध्याय में प्रेरित पतरस स्पष्ट करते हैं कि ख्रीस्तीय समुदाय में भ्रष्टाचार, अन्याय और घिनौने व्यवहारों के स्थान नहीं हैं। 6:11 का वचन वही परिवर्तन दर्शाता है जो मसीही समुदाय को परिभाषित करता है: विश्वास के परिणामस्वरूप धोए जाना, पवित्र होना और धर्मी ठहरना। यह स्मरण दिलाता है कि हमारा व्यक्तिगत इतिहास परमेश्वर के पास नहीं रहा, बल्कि उद्धारकर्ता यीशु मसीह के नाम और परमेश्वर की आत्मा से किया गया है।
मुख्य पाठ: वचन का अर्थ
“और तुम में से कितने ऐसे ही थे, परन्तु तुम प्रभु यीशु मसीह के नाम से और हमारे परमेश्वर के आत्मा से धोए गए, और पवित्र हुए और धर्मी ठहरे।”
इस वाक्य में तीन क्रिया-परिवर्तन उभरकर सामने आते हैं: धोए गए (cleansed), पवित्र हुए (sanctified), और धर्मी ठहरे (justified)। यीशु मसीह के नाम से जुड़ना बताता है कि उद्धार का दायरा नया संबंध बनाता है—खुद की योग्यता नहीं, बल्कि मसीही-शरणागत विश्वास। साथ ही परमेश्वर की आत्मा से होने वाला परिवर्तन आंतरिक सत्ता को दर्शाता है, जो बाहर के व्यवहार में भी परिवर्तन लाता है।
पारिवारिक और शास्त्रीय परिप्रेक्ष्य
सम्भावित सन्देश यह है कि पाप से उद्धार केवल न्याय नहीं, बल्कि परमेश्वर के करुणा-पूर्ण क्रिया-कलाप के द्वारा है। यह क्षेत्र-उन्नति में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन दार्शनिक-व्याख्यों के सामान्य मत को समाहित करने वाला एक संयुक्त विचार है:
अनुकूलन पाठ से सीखे गए पाठ
मुख्य सिद्धांत यह है कि उद्धार केवल परिवारिक या सामाजिक सुधार नहीं, बल्कि दिव्य संप्रेषण से होता है। जो लोग पुराने जीवन में थे, उनके लिए यह स्वतंत्र नहीं कि अब वे पवित्र और धर्मी हो जाएं; इसका आधार यीशु के नाम और परमेश्वर की आत्मा में है।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (관련 छोरें)
1) रोमियों 6:4–6: पुराने जीवन का मरना और नए जीवन में उठना—जो "धोए जाना" के अंतःकरण से जुड़ा है.
2) गलातियों 2:20: मसीह के साथ मेरी जीवन-यात्रा; मैं जीवित नहीं, परन्तु वह मुझ में जीता है — पवित्र आत्मा के प्रभाव से आंतरिक परिवर्तन।
3) यूहन्ना 15:3: तुम शब्दों द्वारा शुद्ध होते हो— विश्वास और वचन के संपर्क से पवित्रता का विकास।
व्यावहारिक आवेदन
संक्षेप
1 कुरिन्थियों 6:11 दर्शाता है कि उद्धार एक पूर्ण परिवर्तन है—धोए जाना, पवित्र होना और धर्मी ठहरना—जो केवल यीशु मसीह के नाम और परमेश्वर की आत्मा के प्रभाव से होता है। यह मसीही पहचान की मूल धुरी है, जो हर विश्वासयोग्यता व्यक्ति के भीतर निरंतर विकसित होती है।
सूचना: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संकेत-उद्धरण उपलब्ध हैं; आवश्यक जगहों पर इनके विचार का समावेश किया गया है।