Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 6:1 1 कुरिन्थियों 6:2 1 कुरिन्थियों 6:3 1 कुरिन्थियों 6:4 1 कुरिन्थियों 6:5 1 कुरिन्थियों 6:6 1 कुरिन्थियों 6:7 1 कुरिन्थियों 6:8 1 कुरिन्थियों 6:9 1 कुरिन्थियों 6:10 1 कुरिन्थियों 6:11 1 कुरिन्थियों 6:12 1 कुरिन्थियों 6:13 1 कुरिन्थियों 6:14 1 कुरिन्थियों 6:15 1 कुरिन्थियों 6:16 1 कुरिन्थियों 6:17 1 कुरिन्थियों 6:18 1 कुरिन्थियों 6:19 1 कुरिन्थियों 6:20



सार-सत्य: दाम देकर मोल लिये गए हो—अपनी देह से परमेश्वर की महिमा
1 कुरिन्थियों 6:20 का मूल संदेश है: तुम्हें धन देकर नहीं, बल्कि बेचकर नहीं, बल्कि दाम देकर मोल लिए गए हो; इसलिए अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो। इस वाक्य का अर्थ है कि ईश्वर ने हमें एक पवित्र मूल्य चुकाकर प्राप्त किया है और हमारी शारीरिक-मानवीय जीवनशैली अब उसी उद्देश्य के अनुरूप विकसित होनी चाहिए: परमेश्वर का सम्मान और महिमा करना।
प्रसंगगत पृष्ठभूमि
पौलुस ने कुरिन्थियों को अपने आवास में विभिन्न प्रकार के नैतिक और सामाजिक परीक्षणों से निपटते देखा। वे यह बतलाते हैं कि हमारी देह मात्र शरीर नहीं, बल्कि वह स्थान है जहाँ परमेश्वर के पुत्र का प्रभाव और शक्ति प्रकट होती है। कुरिन्थ में समकालीन संस्कृति में जश्न, भोग और शारीरिक स्खलन सामान्य थे; ईश्वर की महिमा के लिए आत्मा-मन और देह के समन्वय की अनिवार्यता स्पष्ट करना ज़रूरी था।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संभावित उद्धरणी संकेत (केवल संदर्भ हेतु)
हिंदी पुरालेख-टीका और स्वीकृत टिप्पणियों के अनुसार: कुछ प्राचीन व्यक्तव्यों में दिखता है कि मूल उद्देश्य—हमारा जीवन का उद्देश्य—ईश्वर के सम्मान को सर्वोच्च रखना है। नीचे उद्धरण नहीं हैं, केवल संदर्भ के संकेत:
2-3 प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंसे
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
व्यावहारिक निष्कर्ष
आज के जीवन में यह बताता है कि हम अपने शारीरिक निर्णयों—खान-पान, व्यवहार, समय-संशोधन, संबंध—यथासंभव ईश्वर की महिमा के अनुरूप बनाएं। “दाम देकर मोल लिये गए हो” का तात्पर्य यह है कि हमारी स्वतंत्रता यहाँ ईश्वर के उद्देश्य के दायरे में हो; ताकि हर दृश्य-व्यवहार परमेश्वर के सामने सम्मानजनक रहे।
टिप्पणी: पूर्व-प्रेरणा से निष्कर्ष
प्रसंग को देखते हुए, कुछ पुरालेख-टिप्पणियाँ यह बताती हैं कि दाम देकर मिला मूल्य हमारे व्यक्तित्व और कार्यों की नया दिशा देता है। इसे अपनाते हुए प्रेरितों के मार्गदर्शन जीवन-व्यवहार में स्पष्ट दिखता है: नैतिकता, प्रेम, और सेवाभाव से भरा हुआ एक जीवन।