Old Testament
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यिर्मयाह 32:1 यिर्मयाह 32:2 यिर्मयाह 32:3 यिर्मयाह 32:4 यिर्मयाह 32:5 यिर्मयाह 32:6 यिर्मयाह 32:7 यिर्मयाह 32:8 यिर्मयाह 32:9 यिर्मयाह 32:10 यिर्मयाह 32:11 यिर्मयाह 32:12 यिर्मयाह 32:13 यिर्मयाह 32:14 यिर्मयाह 32:15 यिर्मयाह 32:16 यिर्मयाह 32:17 यिर्मयाह 32:18 यिर्मयाह 32:19 यिर्मयाह 32:20 यिर्मयाह 32:21 यिर्मयाह 32:22 यिर्मयाह 32:23 यिर्मयाह 32:24 यिर्मयाह 32:25 यिर्मयाह 32:26 यिर्मयाह 32:27 यिर्मयाह 32:28 यिर्मयाह 32:29 यिर्मयाह 32:30 यिर्मयाह 32:31 यिर्मयाह 32:32 यिर्मयाह 32:33 यिर्मयाह 32:34 यिर्मयाह 32:35 यिर्मयाह 32:36 यिर्मयाह 32:37 यिर्मयाह 32:38 यिर्मयाह 32:39 यिर्मयाह 32:40 यिर्मयाह 32:41 यिर्मयाह 32:42 यिर्मयाह 32:43 यिर्मयाह 32:44



यिर्मयाह 32:17 पर टिप्पणी — परम सामर्थ्य और संपूर्ण नियंत्रण
पृष्ठभूमि में यिर्मयाह की भविष्यवाणी एक समय की विचलित घटना के बीच है जब राज्य के विनाश की आशंका थी, परांत में प्रभु Yehovah की असीम शक्ति और ध्यानाकर्षक योजना का स्मरण कराया गया है। यह पद यहोवा के महत्त्वपूर्ण गुण—सामर्थ्य, बुद्धिमत्ता, और सब कुछ के निर्माता—को उजागर करता है।
पद का पाठ और संदर्भ
यिर्मयाह 32:17 कहता है: “हे प्रभु यहोवा, तूने बड़े सामर्थ्य और बढ़ाई हुई भुजा से आकाश और पृथ्वी को बनाया है! तेरे लिये कोई काम कठिन नहीं है।” इस संदर्भ में परमेश्वर की रचनात्मक सत्ता और निर्भीक नियंत्रण पर बल दिया गया है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस verse में दो गुण उभरकर सामने आते हैं: पहला—सामर्थ्य की विशालता; दूसरा—परमेश्वर की योग्यता हर परिस्थिति में संभव है। यिर्मयाह शब्दों में साक्षात प्रदर्शन है कि जो ब्रह्मांड को संचालित करता है, वही हमारे जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं में भी मार्गदर्शक है। यहूदियों के लिए यह समय-सा विचार है जब वे लुटेरे बनाम बुरी परिस्थितियों में थे; भाषा में आश्वासन है कि विश्व की सारी गतिविधियाँ उनके निर्माता के नियंत्रण में हैं।
अनुभविक और अनुभूति-आधारित पाठ
Matthew Henry के आशीर्वादजनक स्वर में हमें उद्धार की आशा मिलती है—परमेश्वर की शक्ति उद्धार के लिए पर्याप्त है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों। Albert Barnes यह दर्शाते हैं कि “बड़े सामर्थ्य” से प्रेरित होकर ईश्वर हर बाधा को पार कर सकता है, और “भुजा” से संकेत मिलता है कि His providence is vigilant and ready. Adam Clarke रेखांकित करते हैं कि यह क्रिश्चियन विश्वास को दृढ़ करता है किCreator का सामर्थ्य भागीदारी में है, न कि केवल दार्शनिक सिद्धांत में। यह सन्देश प्रार्थना में भी विश्वास बढ़ाता है कि यदि परमेश्वर चाहे तो असंभव लक्ष्य भी संभव होते हैं।
मूल संदेश का एकीकृत सार
इस पद का सार यह है: ब्रह्माण्ड बनाते-सम्हालते परमेश्वर के पास किसी भी कठिनाई की ज़रूरत नहीं है। वह क्रम-निर्माण का सच्चा स्रोत है; उसका चमत्कार और योजना हर चीज को सीधे मार्गदर्शित कर सकता है। हमारी विपत्तियों में भी वह विश्वस्त रहता है और आशा देता है कि उसकी योजना सही और पूर्ण है।
शिक्षण-शृंखला और क्रॉस-रेफरेंस
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की शक्ति और उसकी योजनाएँ विश्वस्त विश्वासियों के लिए स्थिर आधार बनती हैं; उनकी सामर्थ्य हर परिस्थिति में उपलब्ध है और उसकी योजना प्रकट होती है।
व्यावहारिक application
संक्षेप सार
यिर्मयाह 32:17 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की महान शक्ति और पूर्ण योग्यता सभी परिस्थितियों के ऊपर है। उसके कारणों के साथ सहयोगी बनकर हम आशा, धैर्य, और विश्वास के साथ आगे बढ़ सकते हैं।
छूटे हुए बिन्दु: इस टिप्पणी का उद्देश्य प्रेरणा देना है—ना कि किसी धार्मिक पद-व्याख्या के दायरे को बढ़ाना।
Cross-references explained briefly: यशायाह 40 से ज्ञात होता है कि परमेश्वर की बहुधा शक्तियाँ निर्भय करती हैं; रोमियों 8 में परिस्थिति-सम्बन्धी योजना का आश्वासन है; उत्पत्ति 17 में ईश्वर के स्थिर और पवित्र वादों की पुष्टि है।
उद्धरण के लिए स्रोत-स्त्रोत: Adam Clarke, Albert Barnes, Matthew Henry के विचारों से संकलित विचारों में उनके स्पष्ट उद्धरणों के संक्षेप शामिल हैं—परन्तु पूर्ण वाक्य उद्धरण यहां नहीं दिए गए हैं ताकि मूल पाठ के साथ संरेखण बना रहे।