Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 4:21 का अर्थ
इस पद में भविष्यवक्ता यिर्मयाह परमेश्वर के निर्णय और लोक-व्यथा के बीच की दूरी पर है। वह कह रहा है कि कब तक उसे दण्ड की आवाज और नरसिंगे का शब्द सुनना पड़ेगा? सरल शब्दों में, अब्बाहक (यहूदियों के नेता) के विरुद्ध आने वाले विनाश के लिए उसकी आत्मा तड़प उठी है कि कैसी कष्टदायक यात्रा अभी बाकी है। यह एक तीखी आह है कि दण्ड के समय में भी गहरी पीड़ा और प्रतीक्षा चल रही है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यिर्मयाह का यह भाग पहले एक व्यापक आह्वान निश्चय और न्याय के लिए है। यिर्मयाह अगले कतरा-क्रम में यह बताता है कि बुराई के कारण उनके देश में विपत्ति आ रही है, परन्तु वे दण्ड के समय और नरसिंगे के शब्दों के मध्य फँसे हुए हैं। यह भाव व्याप्त है कि ईश्वर की योजना के अनुसार समय पर ही दंड आयेगा, परन्तु यह वेदना अभी भी गहरी है।
interpretive observations
संरचना-सार (थीम)
अन्य संबंधित अंश (Cross-references)
1) यिर्मयाह 6:11 — दण्ड की स्थिति में जनता के रोष और भविष्य की उथल-पुथल का संकेत। यह दिखाता है कि चीखें आध्यात्मिक और सामाजिक क्षोभ को प्रकट करती हैं।
2) यिर्मयाह 7:16 — प्रभु के लिए संकेत है कि विरोधी समय भी परमेश्वर के नियंत्रण में रहता है; दण्ड के बीच भी दया की राह खुली रहती है।
3) इब्रायियों 12:11 — सही मार्ग पर惟 संभव है जब कष्ट स्थिरता लाते हैं; धैर्य और पुनर्स्थापन की दिशा मिलती है।
संक्षेप सचेतना
यिर्मयाह 4:21 हमें यह सिखाता है कि ईश्वर के न्याय के दिन-निर्धारण में कोई ढील नहीं है, परन्तु दण्ड के बीच भी विश्वासियों के लिए आशा की एक राह है। यह पाठ हमारी आंतरिक बेचैनी को परमेश्वर की सच्चाई के सामने रखने का अवसर है—कि हम समय आने पर उनके पूर्ण नियम के साथ समर्पित रहें, और दया के साथ त्रस्त लोगों के लिए प्रार्थना करें।
उद्धृत छोटे टिप्पणियाँ (यदि उपयुक्त)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke में से यदि उनके अभिन्न शब्द सीधे उद्धृत हों, तो वे विशेष रूप से दण्ड के स्वभाव और भाईचारे के संदर्भ में आंतरिक भावणा को प्रकाश में लाते हैं। यह पाठ उनके मानक टिप्पणी-संदर्भों से प्रेरित एक निष्कर्ष-वाक्य की तरह है: दण्ड के समय में निष्ठा और ईश्वर-भक्ति को मत छोड़िए; पीड़ा के बीच भी ईश्वर की योजना बनती है।
निहित पाठ के साथ, यह टिप्पणी एक पाठ-व्यवस्थित संकल्प प्रदान करती है—यह स्पष्ट करती है कि दण्ड और कष्ट के बावजूद 하나님 की योजना आगे बढ़ती है, और उसके अनुयायियों को धीरे-धीरे सचेत और धैर्यवान बने रहने की प्रेरणा मिलती है।