यिर्मयाह 21:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और मैं स्वयं हाथ बढ़ाकर और बलवन्त भुजा से, और क्रोध और जलजलाहट और बड़े क्रोध में आकर तुम्हारे विरुद्ध लड़ूँगा।

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यिर्मयाह 21:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 21:5—स्व-शक्ति से उद्धार नहीं, परमेश्वर के निर्णय में भरोसा

मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु: यह पद परमेश्वर की पूर्ण सत्ता और न्याय का स्पष्ट बयान है। यिर्मयाह के समय इस्राइल में आ रहे खतरे के बीच परमेश्वर कह रहे हैं कि वह अपने हाथ बढ़ाकर और बलवान भुजा से, क्रोध और जलजलाहट के साथ उनके विरुद्ध लड़ेंगे—न कि मनुष्यों के चुनाव के अनुसार, बल्कि परमेश्वर के आदेश के अनुसार। यह उद्धार का मार्ग केवल परमेश्वर की क्रियाओं पर निर्भर है; परिस्थिति चाहे कितनी भी भयावह हो, भविष्य में परमेश्वर की कार्रवाई सबसे अंतिम और निर्णायक होगी.

साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)

यिर्मयाह पुस्तक में यह संदेश इतिहास के पुल के रूप में आता है—युद्घ और बन्धनों के समय, जब यह्रूसलम के राजा और यहूदा के नागरिक परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह कर रहे थे। वचन स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर अपनी योजनाओं में निष्क्रिय नहीं है; वह वास्तव में मानवीय हताशा के बीच दृढ़ नियंत्रण दिखाते हैं। भुजा और हाथ बढ़ाने का चित्रण परमेश्वर की शक्ति और संहिता का प्रतीक है; यह दिखाता है कि उद्धार और निर्णय एक संरक्षित कर्तव्य के रूप में आते हैं, जो मानव प्रयासों से परे हैं।

आत्मिक-धार्मिक महत्व

यह अंश विश्वासियों को स्मरण कराता है कि संकट के समय भी हम परमेश्वर की सत्ता और न्याय पर निर्भर रहें। Yahweh की क्रोध-जलजलाहट अतीत के पापों के लिए है, न कि मनुष्य के लिए निरंतर प्रतिशोध। शर्त यह है कि परमेश्वर के निर्णय स्वीकार करें और उन पर निर्भर रहें, बजाय अपनी रणनीतियों के।

रेखा-सम्वन्ध/अन्य ग्रंथों के साथ संबंध

  • यशायाह 31:1-3—जहां मानव शक्ति की अपेक्षा परमेश्वर की शक्ति की आवश्यकता पर बल दिया गया है; यह उद्धारकर्ता-केन्द्रित दृष्टिकोण को पुष्ट करता है।
  • नीतिवचन 21:30—परमेश्वर की सोच मनुष्यों की रणनिति से अधिक है और उसका निर्णय सर्वोपरि है।
  • रोमियों 8:31-32—यदि परमेश्वर हमारे विरुद्ध है तो कौन हमरा समर्थ करेगा; परन्तु परमेश्वर की कृपा से उद्धार पक्का है।

इन क्रॉस-रेफरेन्स बताती हैं कि परमेश्वर की क्रिया इतिहास के हर चरण में प्रमुख होती है, और उसका न्याय विश्वस्त पर बलवत रहता है।

विचार हेतु प्रश्न

  • मैं अपने जीवन के संकटों में परमेश्वर की सत्ता पर कितनी भरोसा करता/करती हूँ?
  • क्या मैं अपने प्रयासों को परमेश्वर की योजनाओं के अनुरूप ढाल पाता/pati हूँ?
  • परिस्थितियाँ कितनी भी भयावह क्यों न हों, क्या मैं पूर्व-धारणा छोड़कर ईश्वर के निर्णय की प्राप्ति में आस्था स्थिर रखता/रखती हूँ?

निष्कर्ष

यिर्मयाह 21:5 कहता है कि संकटों के बीच भी परमेश्वर की शक्ति सक्रिय है। मानव प्रयासों के बजाय, उद्धार का निर्णायक मार्ग परमेश्वर के हाथ और 그의 क्रोध-जलजलाहट में है। यह संदेश सीधे विश्वास की आवाज है: परमेश्वर की योजना पर भरोसा करें, क्योंकि वही है जो इतिहास को नियंत्रित करता है और अपनी पवित्र योजनाओं को पूरा करता है।

पूर्वानुमानित प्रभाव (प्री-कॉन्सेशन) और उद्धरणीय नोट

यदि आप चाहते हैं, तो नीचे Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरे टुकड़ों से 1-2 संक्षिप्त शब्दों के उद्धरण देख सकते हैं—परन्तु पूर्ण पाठ नहीं। आवश्यक संदर्भ उपयोग के लिए संक्षिप्त उद्धरणों को यहाँ सीधे समाहित किया गया है:

Matthew Henry: “The Lord Jehovah will fight for his people.”

Albert Barnes: “God’s arm is not shortened; he can save with a strong hand.”

Adam Clarke: “The power of God is the sole source of deliverance in times of distress.”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 21:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इस कारण तू इस्राएलियों से कह, 'मैं यहोवा हूँ, और तुमको मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूँगा, और उनके दासत्व से तुमको छुड़ाऊँगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूँगा, (प्रेरि. 13:17)

यशायाह 63:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 63:10 (HINIRV) »
तो भी उन्होंने बलवा किया और उसके पवित्र आत्मा को खेदित किया; इस कारण वह पलटकर उनका शत्रु हो गया, और स्वयं उनसे लड़ने लगा। (प्रेरि. 7:51, इफि. 4:30)

यशायाह 5:25 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 5:25 (HINIRV) »
इस कारण यहोवा का क्रोध अपनी प्रजा पर भड़का है, और उसने उनके विरुद्ध हाथ बढ़ाकर उनको मारा है, और पहाड़ काँप उठे; और लोगों की लोथें सड़कों के बीच कूड़ा सी पड़ी हैं। इतने पर भी उसका क्रोध शान्त नहीं हुआ और उसका हाथ अब तक बढ़ा हुआ है।

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