यिर्मयाह 15:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यह हिजकिय्याह के पुत्र, यहूदा के राजा मनश्शे के उन कामों के कारण होगा जो उसने यरूशलेम में किए हैं, और मैं उन्हें ऐसा करूँगा कि वे पृथ्वी के राज्य-राज्य में मारे-मारे फिरेंगे।

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यिर्मयाह 15:4 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 15:4 — संदर्भ और अर्थ

यिर्मयाह नबी के समय वैश्विक संकट का भाग बनता है जब यहोवा के चुने लोगों के विरोध के कारण आदर्श से भटकते राष्ट्रों पर दंड के वचन उद्घोषित होते हैं। इस पद में परमेश्वर कहता है कि महामारी और विनाश उन कारणों से आएंगे जो यहूदा ने राजाओं और नगर-प्रबंधकों के रूप में देखा था—विशेषकर मनश्शे के अत्याचार और बुरे कर्मों के कारण। यह दंडिक नीतिगत क्रिया का संकेत है कि परमेश्वर अपने लोगों को उनकी पथभ्रष्टताओं से वापस लाने के लिए कड़ी विपत्ति के रास्ते अपनाता है।

मुख्य अर्थ

यह वचन भविष्यवाणी के धंधे में एक कठोर पर सुसंगत सच को रेखांकित करता है: जब राष्ट्र पाप के मार्ग पर बह जाते हैं और सामाजिक-धार्मिक संस्थाएं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती हैं, तब परमेश्वर उन्हें कड़े परिणामों के साथ सबक सिखाता है। इस संदर्भ में मनश्शे का इतिहास विशेष है—यहोवा के न्याययोग के सिद्धांतों के विरुद्ध अधिकांश कठोर आचरण से वे यरूशलेम और यहूदा के लिए “राज्य-राज्य” के विनाश का कारण बनते हैं।

किए गए तीन प्रमुख विषय

  • सिर्फ दंड नहीं; उद्धार की संभावना भी बनी रहती है—यद्यपि प्रतीकात्मक रूप से कष्ट दिए जाते हैं, परमेश्वर की करुणा और व्यवस्था-उद्धार का मार्ग भी खुला है, यदि जनता फेर-फार कर अपनी राह से हटे।
  • यथार्थ पाप-निशान—मनश्शे के अत्याचार और यरूशलेम की अवहेलना एक समाज के मौलिक सत्य-आचरण के क्षय का प्रतीक बनते हैं, जो देवमूल्यों की अवहेलना है।
  • आस्था और लोक-न्याय की दूरी—राजाओं के भ्रष्टाचार से सामाजिक न्याय में आघात होता है; यह निष्कर्ष परमेश्वर के चितत्व में न्याय-उद्धार के मार्ग की आवश्यकता को दर्शाता है।

समान दृष्टांत और क्रॉस-रेफरेंसे

- 역 से प्रेरित अन्य संदर्भ जो इस दंड-नियम को पुष्ट करते हैं: यह्रोन (यहोवा के दंड के कारण) और न्याय के संकेत—उद्धार के बीच संतुलन का संकेत।

- हिब्रू साहित्य में पापकर्मों के परिणाम स्पष्ट होते हैं; मिसाल के तौर पर नबीय भाषण में दंड के साथ निवेदन भी रहता है कि लोग वापस लौटें।

व्यवहारिक चिंतन

हमारे जीवन से यह शिक्षा मिलती है कि बाहरी शासन-पथ के साथ-साथ आंतरिक नैतिकता का भी पालन महत्वपूर्ण है। सामाजिक दबाव और सत्ता-प्रभाव से परे, हमारे व्यक्तिगत आचरण एवं समुदाय-न्याय के लिए सत्य-निष्ठा बनाए रखना परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है। यदि हम पापों के पंजर से निकलकर सत्य के मार्ग पर लौटते हैं, तो परमेश्वर दंड के बावजूद भी उद्धार और कृपा की राह खोलते हैं।

संक्षिप्त समापन

यिर्मयाह 15:4 बताता है कि परमेश्वर का न्याय भागीदार है—यही कारण है कि मनश्शे के अत्याचार और यरूशलेम की पाप-प्रवृत्ति के कारण विनाश की चेतावनी दी गई है। परंतु साथ ही यह आश्वासन भी नीति बनता है कि सचेत और परिवर्तनशील हृदय के साथ लौटना संभव है, क्योंकि परमेश्वर अपनी करुणा के लिए तैयार है।

क्रॉस-रेफरेंसे (संक्षेप)

1) यिर्मयाह 29:10–14 — दोषों के बावजूद पुनर्स्थापना की उम्मीद; जनता की फर्क-फरक और उद्धरण का मार्ग स्पष्ट।

2) यह्रोन 3:7 — इसके समान संदेश: दंड के साथ आस्था-भक्ति की पुनर्स्थापनात्मक राह मौजूद है।

3) यशायाह 1:19–20 — यदि तु परिवर्तन करों, तो तुम्हें आशीष मिल सकती है; अन्यथा परिणाम स्पष्ट है।

नोट: इस पवित्र अंश के बीच के सूक्ष्म उद्धरण अगर लेखक-टिप्पणियों से मिलते हैं, वे उद्धृत शैली में दर्ज हैं—जैसे Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke की छोटी-सी चूक-लकीर जो साहित्य में मिलती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 15:4 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इस कारण वे पृथ्वी के राज्य-राज्य में मारे-मारे फिरते हुए दुःख भोगते रहेंगे; और जितने स्थानों में मैं उन्हें जबरन निकाल दूँगा, उन सभी में वे नामधराई और दृष्टांत और श्राप का विषय होंगे।

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तो भी यहोवा का भड़का हुआ बड़ा कोप शान्त न हुआ, जो इस कारण से यहूदा पर भड़का था, कि मनश्शे ने यहोवा को क्रोध पर क्रोध दिलाया था।

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“यहूदा के राजा मनश्शे ने जो ये घृणित काम किए, और जितनी बुराइयाँ एमोरियों ने जो उससे पहले थे की थीं, उनसे भी अधिक बुराइयाँ की; और यहूदियों से अपनी बनाई हुई मूरतों की पूजा करवा के उन्हें पाप में फँसाया है।

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