Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 23:1 2 राजाओं 23:2 2 राजाओं 23:3 2 राजाओं 23:4 2 राजाओं 23:5 2 राजाओं 23:6 2 राजाओं 23:7 2 राजाओं 23:8 2 राजाओं 23:9 2 राजाओं 23:10 2 राजाओं 23:11 2 राजाओं 23:12 2 राजाओं 23:13 2 राजाओं 23:14 2 राजाओं 23:15 2 राजाओं 23:16 2 राजाओं 23:17 2 राजाओं 23:18 2 राजाओं 23:19 2 राजाओं 23:20 2 राजाओं 23:21 2 राजाओं 23:22 2 राजाओं 23:23 2 राजाओं 23:24 2 राजाओं 23:25 2 राजाओं 23:26 2 राजाओं 23:27 2 राजाओं 23:28 2 राजाओं 23:29 2 राजाओं 23:30 2 राजाओं 23:31 2 राजाओं 23:32 2 राजाओं 23:33 2 राजाओं 23:34 2 राजाओं 23:35 2 राजाओं 23:36 2 राजाओं 23:37



2 राजा 23:26 — संदर्भ और भावार्थ
यह शास्त्र पढ़ते समय ध्यान देता है कि जोहोवा का क्रोध शान्त नहीं हुआ। यहहूदा पर जोशिश्वर राजा मनश्शे के कारण ईश्वर के क्रोध को उग्र बनाता है, जिसकी वजह से यहूदा पर उनका संताप बना रहा। यह संदेश इतिहास के अंश में यह दिखाता है कि धार्मिक र adopts शुद्धता और विश्वासघात के परिणामस्वरूप परमेश्वर का क्रोध क्यों टूट पड़ता है, और यहूदियों के उत्तराधिकारी इस प्रभाव को कैसे भुगतते हैं।
मुख्य अर्थ
वाक्य यह बताता है कि मनश्शे के पापों ने यहूदा पर प्रभुवर के क्रोध को और भी गहरा कर दिया। परमेश्वर का क्रोध केवल एक क्षणिक आघात नहीं, बल्कि एक लंबे समय तक चलने वाला अनुभव है, जब लोग उसकी कृपा को ठुकराते हैं। यहूदा के लिए यह एक चेतावनी है कि परमेश्वर के साथ छेड़छाड़ का परिणाम आत्म-स्वीकृत दुःख और विनाश की प्रक्रिया को तेज कर देता है।
केंद्रीय विषय
अनुशासनात्मक और क्रिया-प्रयोजन
यह संदेश दो विचारों को मिलाता है: अपराध जितना गहरा, उतनी ही परमेश्वर की शांति में असंतोष और अस्थिरता रहती है; और जब लोग पाप से पलटते नहीं, तब दण्ड का गहरा असर रहता है। मनश्शे के भयावह कर्मों के कारण यह कहानी यहूदियों के लिए एक चेतावनी बनती है कि अहंकार और अविश्वास से निपटना आवश्यक है।
संदर्भित के संदर्भ
– 2 राजाओं 21–22: मनश्शे के पापों का सारांश और यहूदियों के अस्थिर इतिहास का उल्लेख।
– 2 राजा 24–25: बाबुल के चढ़ाव के पूर्व यहूदियों की भुखमरी और उद्धार के असफल प्रयासों का चित्रण।
– नीतियों 3:5–7: परमेश्वर के न्याय और दया का संतुलन दर्शाने वाले उद्धरण।
व्यावहारिक विचार
यदि हम अपने समय के धार्मिक अनुभव में देखे, तो मनश्शे की तरह, पाप के रास्ते पर अडिग रहने पर भी हम कई बार परिणामों से पार नहीं पा सकते। कारण क्या है? बोध और पश्चाताप के बिना प्रयास असफल होते हैं। इस वचन से सीख मिलती है कि जीवन के हर पहलू में सत्य, दया और निष्ठा आवश्यक है—यह परमेश्वर के सम्मान का मार्ग है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस आयतन में बताया गया है कि पाप का चलते हुए दायित्व और परमेश्वर के क्रोध के साथ जुड़ाव अस्थाई नहीं, बल्कि दीर्घकालिक परिणाम देता है। मनश्शे के कारण यहूदा पर भड़के क्रोध को रोकना सम्भव नहीं रहा, ताकि यह स्पष्ट हो कि धार्मिक शीलता और नैतिकता के बिना जीवन में संकट आते हैं।
शब्द-संदेश के उद्धरण (सार)
यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पूर्ण उद्धरण नहीं दिए जा रहे, पर उनके विचारों का सार यही रहा कि पाप की गहराई और प्रतिफल में न्याय का संगत अनुपात है और परमेश्वर की करुणा भी प्रबल रहती है, पर अवहेलना पर क्रोध बढ़ता है।