Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 23:1 2 राजाओं 23:2 2 राजाओं 23:3 2 राजाओं 23:4 2 राजाओं 23:5 2 राजाओं 23:6 2 राजाओं 23:7 2 राजाओं 23:8 2 राजाओं 23:9 2 राजाओं 23:10 2 राजाओं 23:11 2 राजाओं 23:12 2 राजाओं 23:13 2 राजाओं 23:14 2 राजाओं 23:15 2 राजाओं 23:16 2 राजाओं 23:17 2 राजाओं 23:18 2 राजाओं 23:19 2 राजाओं 23:20 2 राजाओं 23:21 2 राजाओं 23:22 2 राजाओं 23:23 2 राजाओं 23:24 2 राजाओं 23:25 2 राजाओं 23:26 2 राजाओं 23:27 2 राजाओं 23:28 2 राजाओं 23:29 2 राजाओं 23:30 2 राजाओं 23:31 2 राजाओं 23:32 2 राजाओं 23:33 2 राजाओं 23:34 2 राजाओं 23:35 2 राजाओं 23:36 2 राजाओं 23:37



2 राजाओं 23:5 पर हिन्दी टिप्पणी
यह पाठ यह दर्शाता है कि यरूशलेम के पास और यहूदा के नगरों के ऊँचे स्थानों पर स्थापित पंडितों—जो वेदानुसार परमेश्वर के स्थान के स्थानापन्न रूप में अस्थायी पूजन करते थे—को राजा ने हटवा दिया। देवदत्त राजा याकीम/यहोयाकिम के बाद आने वाले विनाशकारी समयों में, यीशु के वचन के अनुरूप एक धार्मिक पुनर्गठन होता है: मूर्तिपूजा से दूरी और एकात्मिक आराधना का पुनरुद्धार। यहाँ राजा के कदम का महत्व यह है कि वह अस्थायी स्थानों पर स्थापित पूजाओं को हटाकर परमेश्वर के उपाय और व्यवस्था के अनुरूप एक एकीकृत उपासना को प्रोत्साहन देता है।
पाठ का परिचय और capítulo में स्थिति
यह अध्याय राजा-यात्रा के क्रम में मूर्तिपूजा के विरुद्ध कार्रवाई को दर्शाता है। खास तौर पर उन पुजारियों को हटाने का आदेश दिया गया जो यहूदा के नगरों के ऊँचे स्थानों पर और यरूशलेम के आस-पास के स्थानों में मूर्तिपूजा के लिए धूप जलाते थे—बाल, सूर्य- चन्द्रमा, राशिचक्र आदि के गण भी जुड़ते थे। यह कदम धार्मिक रीति-रिवाजों के केंद्रितीकरण की दिशा में था, ताकि एक ही केंद्र पर एक ईश्वर की उपासना हो सके।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस verse से एक स्पष्ट पाठ निकलता है: परमेश्वर अपनी व्यवस्था की शुद्धिपरक उपासना की मांग करते हैं, और मानव-निर्मित स्थानों या विविध देवताओं के लोकेशन से परहेज करते हैं। राजा के इस कदम में यह संदेश है कि कट्टरपंथी सुधार तब प्रभावी होते हैं जब वे धार्मिक व्यवस्था को केंद्रित करें और हर प्रकार की कर्तव्य-भेट के रूप में एकीकरण करें। यह शिक्षा today के चर्च-समुदाय के लिए भी है कि ईश्वर की उपासना में विभाजन नहीं, बल्कि एकता और स्पष्टता हो।
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसे
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से यह स्पष्ट होता है कि पुरातन बाइबल में एक केंद्रित उपासना और अन्य देवताओं/स्थानों के विरुद्ध एकता की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
छोटे सार
यह verse बताता है कि धार्मिक सुधार तब मजबूत होता है जब वह केंद्रितता और एकता के साथ तोड़ा गया अन्य-देवताओं/आस्थानों के प्रभाव को कम कर देता है। राजा ने जो कदम उठाए, वे भविष्य के नीति-निर्माण और आराधना के लिए एक स्पष्ट मॉडल बनते हैं: एक ही परमेश्वर, एक ही मंदिर-स्थल, एक ही धर्म।
सारांश
2 राजाओं 23:5 में राज्ञ ने यहूदिया के नगरों के ऊँचे स्थानों और आसपास की जगहों पर धूप जलाने वाले पुजारी और अन्य देव-प्रतिमाओं को हटाकर एक शुद्ध, केंद्रीकृत उपासना की दिशा में कदम उठाया। यह कार्य धार्मिक व्यवस्था की शुद्धि और ईश्वर के राज्य के अनुरूपता की दिशा में एक उपयोगी उदाहरण है।