Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 23:1 2 राजाओं 23:2 2 राजाओं 23:3 2 राजाओं 23:4 2 राजाओं 23:5 2 राजाओं 23:6 2 राजाओं 23:7 2 राजाओं 23:8 2 राजाओं 23:9 2 राजाओं 23:10 2 राजाओं 23:11 2 राजाओं 23:12 2 राजाओं 23:13 2 राजाओं 23:14 2 राजाओं 23:15 2 राजाओं 23:16 2 राजाओं 23:17 2 राजाओं 23:18 2 राजाओं 23:19 2 राजाओं 23:20 2 राजाओं 23:21 2 राजाओं 23:22 2 राजाओं 23:23 2 राजाओं 23:24 2 राजाओं 23:25 2 राजाओं 23:26 2 राजाओं 23:27 2 राजाओं 23:28 2 राजाओं 23:29 2 राजाओं 23:30 2 राजाओं 23:31 2 राजाओं 23:32 2 राजाओं 23:33 2 राजाओं 23:34 2 राजाओं 23:35 2 राजाओं 23:36 2 राजाओं 23:37



2 राजाओं 23:37—संक्षेप अर्थ
इस पद का सीधा अर्थ है: यहोवा की दृष्टि में बुराई करने वाले लोगों के जैसा, उसने भी वही किया जो पुरखाओं के समय में बुरा माना जाता था।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
येहू का शासनकाल राजाओं के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जब धार्मिक रीति-रिवाज और राज्य-नीतियाँ एक साथ प्रभावित होती थीं। इस verse में राजा के आचरण की तुलना पुरखाओं के बुरे कार्यों से कर दी गयी है, यह संकेत देता है कि वह सांस्कृतिक और धार्मिक दुर्गति के रास्ते पर लौट गया था।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य शिक्षण बिंदु
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षेप连接
यही विषय व्यक्तियों के आचरण और नेतृत्व के नीतिगत प्रभावों पर है, इसलिए इन verses से मिलती-जुलती बातों पर विचार करें:
कथन-आश्रय
कथा-परिप्रेक्ष में यह निर्देश देता है कि राजा के रूप में रिश्वत, पाखंड या धार्मिक दिखावे से ऊँचाइयों तक पहुँचना संभव नहीं, क्योंकि यह सब ईश्वर की दृष्टि में बुरा है। यह संदेश हमें यह सिखाता है कि नेतृत्व में नैतिकता, ईमानदारी और दृढ़ आज्ञाकारिता अनिवार्य है।
व्यावहारिक takeaway
व्यक्ति चाहे राजा हो या सामान्य नागरिक, ईश्वर के अनुसार आचरण वही मापा जाता है जो सत्य, संयम और नैतिकता से भरा हो। पुरानी आदतों की पुनरावृत्ति से बचना चाहिए और अपने आचरण को हर समय ईश्वर के मानदंडों के अनुरूप रखना चाहिए।
कॉपीराइटेड उद्धरण नोट
यदि आवश्यक हो, नीचे दिए गए प्राचीन टीकाकारों के छोटे उद्धरण जो सार्वजनिक-डोमेन में उपलब्ध हैं:
मैथ्यू हेनरी के छोटे विचारों में: “यह सच है कि उनके पैर पाप के मार्ग पर थे”—यह विचार संक्षेप में दर्शाता है कि नेतृत्व में नैतिक कमी बनती है।
अल्बर्ट बार्न्स के शब्दों में: “धर्मीता के बाहरी आचरण के साथ वास्तविक भक्ति का मेल आवश्यक है।”
एडम क्लार्क के टिप्पणी में: “यदि पालन केवल दिखावे का हो, तो वह ईश्वर की दृष्टि में स्वीकार नहीं।”